महाराष्‍ट्र सरकार के शक्ति एक्‍ट के खिलाफ एक्टिविस्ट और महिला संगठन, सीएम ठाकरे को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने इस हफ्ते शक्ति बिल को मंजूरी दी है, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। मंत्रिमंडल से बिल को मंजूरी के बाद कई एक्टिविस्ट, वकील, सामाजिक और महिला संगठनों ने इसका विरोध किया है। इन संगठनों ने सीएम उद्धव ठाकरे से अपील की है कि इस बिल को विधानसभा में टेबल ना किया जाए। इन संगठनों ने इसे एक खराब कानून बताते हुए कहा है कि ये एक महिला विरोधी सोच रखता है। साथ ही ये मौलिक अधिकरों के भी खिलाफ जाता है। मुख्यमंत्री को लिखे इस खत में अलग-अलग क्षेत्रों के 92 लोगों के हस्ताक्षर हैं। महाराष्ट्र विधानसभा का 14 और 15 दिसंबर को शीत सत्र है। इसी दौरान ये बिल विधानमंडल में पेश किया जाएगा।

Activists women groups oppose Maharashtra govt Shakti bill ask uddhav Thackeray to not table it

इस हफ्ते बुधवार को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल ने बुधवार को कठोर सजा के प्रावधान वाले एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। शक्ति एक्‍ट के नाम से जाने जाने वाले इस एक्‍ट में रेप के दोषियों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास और भारी जुर्माना सहित कड़ी सजा और मुकदमे की त्वरित सुनवाई के प्रावधान हैं।

प्रस्तावित कानून को राज्य में लागू करने के लिए विधेयक के मसौदे में भारतीय दंड संहिता, सीआरपीसी और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में संशोधन करने का प्रस्ताव है। गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि मंत्रिमंडल ने एक बैठक में विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी और इसे आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा। देशमुख ने बताया है कि इसमें 15 दिनों के भीतर किसी मामले में जांच पूरी करने और 30 दिन के भीतर सुनवाई का प्रावधान है।

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