दिल्ली पुलिस ने AAP MLA सुखबीर दलाल को 'फर्जी' केस में फंसाया था, कोर्ट ने बरी किया
नई दिल्ली- दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी के विधायक सुखबीर सिंह दलाल और दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। इनपर 2015 में दिल्ली के नांगलोई थाने से एक आदमी को महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत से भगाने का आरोप था। अब कोर्ट ने पाया है कि "पूरा घटनाक्रम फर्जी था और उन्हें फंसाया गया था।"

दिल्ली पुलिस ने विधायक को 'फंसाया' था
दिल्ली में मुंडका के आम आदमी पार्टी विधायक सुखबीर दलाल पर 8 जुलाई, 2015 को 30-40 समर्थकों के साथ नांगलोई थाने में घुसकर पुलिस पर रोहताश तोमर नाम के शख्स को जबरन छोड़ने के लिए दबाव बनाने का आरोप था। उस व्यक्ति को महाराष्ट्र पुलिस ने कथित तौर पर प्लास्टिक ग्रैन्यूल खरीदने के आरोप में पकड़ा था। अपने आदेश में एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट समर विशाल ने दिल्ली पुलिस की खिंचाई करते हुआ कहा है कि बचाव पक्ष ने जो भी दलीलें पेश की हैं उससे, "यह साबित हो जाता है कि सारी घटना पूरी तरह से फर्जी और बनाई गई है। सभी दलील विश्वास करने और इस निष्कर्ष पर पहुंचने लायक है कि अभियोजन पक्ष द्वारा बनाए गए केस में कई सारी खामियां हैं।"

'डेली डायरी' ने पलटी पुलिसिया थ्योरी
दिल्ली पुलिस की थ्योरी को पलटने में महाराष्ट्र पुलिस के एक एएसआई की 'डेली डायरी' एंट्री बहुत ही महत्वपूर्ण सबूत साबित हुई है। कोर्ट ने कहा है कि एएसआई ने 'डेली डायरी' में इस बात का साफ तौर पर जिक्र किया है कि तोमर जांच में शामिल हुआ था और उसे यह कहकर सुखबीर सिंह दलाल के हवाले किया गया था कि उन्हें अगले दिन भी थाने आना है। अदालत ने कहा कि डीडी से साफ हो जाता है कि तोमर को जबरन छुड़ाने या मौके से खिसक लेने की अभियोजन पक्ष की दलील पूरी तरह से गलत है। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने डायरी में दर्ज एंट्री को जानबूझकर छिपा लिया। इसलिए अदालत ने पुलिस की सभी दलिलों को खारिज करते हुए तीनों आरोपियों रोहताश तोमर, राजेश उर्फ राजे और सुखबीर सिंह दलाल को बरी कर दिया है।

तत्कालीन एसएचओ पर कार्रवाई की मांग
अदालत द्वारा फर्जी केस से बरी किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी विधायक ने कहा कि, उन्हें न्यायपालिका में पूरा भरोसा है और पुलिस पर कोई यकीन नहीं है। विधायक ने बताया कि झूठे केस की वजह से उन्हें 4 साल तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। दलाल ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले एसएचओ के खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई करने की मांग की है। जाहिर है कि यह मामला दिल्ली में फिर से एक राजनीतिक शक्ल भी अख्तियार कर सकता है, क्यों दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी दिल्ली पुलिस पर हमेशा से ही उनके नेताओं-कार्यकर्ताओं के खिलाफ काम करने के आरोप लगाती रही है। यह मामला आने वाले विधानसभा चुनाव में भी उठ सकता है, क्योंकि दिल्ली पुलिस अभी बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मातहत काम कर रही है।












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