आप, भाजपा ने की 1984 दंगों की एसआईटी जांच की मांग

दिल्ली की आप सरकार ने कहा है कि शुक्रवार को होने वाली मंत्रिमंडल की अगली बैठक में एसआईटी के मानदंडों पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार सुबह उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात की तथा दंगों की एसआईटी द्वारा जांच कराने की मांग करते हुए अपना निवेदन सौंपा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों के दौरान राजधानी में करीब 3000 लोग, जिनमें अधिकांश सिख समुदाय से थे, को मौत के घाट उतार दिया गया था।
एक अधिकारी ने बताया, "बैठक करीब आधा घंटे चली। उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री के निवेदन पर विचार करने तथा प्रधानमंत्री को इससे अवगत कराने का आश्वासन दिया।"
मुख्यमंत्री अरविंद ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में 84 के दंगों की एसआईटी से जांच कराने की मांग करने का वादा किया था, और वह अपना वादा पूरा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, हर्षवर्धन के नेतृत्व में भाजपा ने भी बुधवार को अपराह्न उपराज्यपाल से मुलाकात की। उपराज्यपाल से मिलने के बाद हर्षवर्धन ने मीडिया से कहा, "हम 1984 के दंगा पीड़ितों के लिए न्याय चाहते हैं, तथा दंगों की एसआईटी से जांच करवाए जाने की मांग कर रहे हैं।"
दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आप ने दिल्ली चुनाव से पहले एक रैली की थी और सिख विरोधी दंगों की एसआईटी से जांच कराने की मांग की थी।
एक टीवी साक्षात्कार में राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि कुछ कांग्रेसी नेता 1984 के दंगों में शामिल थे।
अकाली दल की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने कहा कि चूंकि राहुल गांधी कांग्रसी नेताओं की भूमिका से वाकिफ हैं, इसलिए उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
पंजाब के मुख्यमंत्री और अकाली दल के सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल ने हालांकि केजरीवाल की एसआईटी से जांच कराने की मांग को खारिज कर दिया।
पंजाब के मुक्तसर जिले में बादल ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पूर्व की कई उच्चस्तरीय जांच में बड़े पैमाने पर हुए नरसंहार में कांग्रेसी नेताओं की भूमिका पर ऊंगली उठाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इसकी जगह इस घिनौने कृत्य में शामिल रहे कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ कठोर और दृष्टांत दिए जाने लायक कार्रवाई करना समय की मांग है ताकि पीड़ित परिवारों को सुकून का अनुभव हो सके।
बादल ने कहा कि एक और एसआईटी गठित करने की जगह पीड़ितों को न्याय मुहैया कराना समय की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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