NRC में पहचान के लिए आधार-वोटर आईडी के अलावा गवाह भी मान्य, जानिए नागरिकता की पूरी प्रक्रिया
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधित कानून (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच मुस्लिम समुदाय को लेकर बहुत की अफवाहें भी फैल रही हैं। अभी तक एनआरसी से जुड़ी ना तो कोई आधिकारिक घोषणा हुई है और ही कोई नियम कानून तय किए गए हैं। इससे जुड़ी कुछ बातें हैं, जिन्हें जानना बेहद ही जरूरी है।

1971 नहीं है कटऑफ की डेट
अगर देश में एनआरसी लागू की जाती है तो साल 1971 से पहले का कोई दस्तावेज पेश करना जरूरी नहीं होगा। ये कटऑफ की डेट केवल असम के लिए ही थी। वहां अपनाई गई प्रक्रिया असम समझौते और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों पर आधारित थी। जबकि पूरे देश में ये प्रक्रिया अलग होगी। नागरिकता नियम 2009 के तहत किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय की जाएगी। ये नियम नागरिकता कानून, 1955 के आधार पर बना है। यह नियम सार्वजनिक रूप से सबके लिए समान है।

नागरिकता कैसे दी जाती है ?
आपको अपने जन्म का विवरण जैसे जन्म की तारीख, माह, वर्ष और स्थान के बारे में जानकारी देना ही पर्याप्त होगा। अगर आपके पास अपने जन्म का विवरण उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने माता-पिता के बारे में यही विवरण उपलब्ध कराना होगा। लेकिन कोई भी दस्तावेज माता-पिता के द्वारा ही प्रस्तुत करने की अनिवार्यता बिल्कुल नहीं होगी। जन्म की तारीख और जन्मस्थान से संबंधित कोई भी दस्तावेज जमाकर नागरिकता साबित की जा सकती है।
हालांकि अभी तक ऐसे स्वीकार्य दस्तावेजों को लेकर भी निर्णय होना बाकी है। इसके लिए वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, बीमा के पेपर, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र, जमीन या घर के कागजात या फिर सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी प्रकार के अन्य दस्तावेजों को शामिल करने की संभावना है। इन दस्तावेजों की सूची ज्यादा लंबी होने की संभावना है ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को अनावश्यक रूप से परेशानी न उठाना पड़े।

गवाह लाने की इजाजत
जो पढ़ा लिखा नहीं है, उस व्यक्ति को गवाह लाने की इजाजत होगी। साथ ही अन्य सबूतों और Community Verification आदि की भी अनुमति देंगे। एक उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। किसी भी भारतीय नागरिक को अनुचित परेशानी में नहीं डाला जाएगा।

भारत का नागरिक बनने के पांच तरीके-
1. जन्म के आधार पर नागरिकता
- 26 जनवरी 1950 के बाद लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति जन्म के द्वारा भारत का नागरिक है।
- 1 जुलाई 1987 को या इसके बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, अगर उसके जन्म के समय उसका कोई एक अभिभावक भारत का नागरिक था।
- 3 दिसंबर 2004 के बाद भारत में पैदा हुआ वह कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाता है, जिसके दोनों अभिभावक भारत के नागरिक हों या फिर अगर एक अभिभावक भारतीय हो और दूसरा अभिभावक उसके जन्म के समय पर गैर कानूनी अप्रवासी न हो, तो भी वह नागरिक भारतीय माना जाएगा।

2. वंश के आधार पर नागरिकता
- 26 जनवरी 1950 के बाद लेकिन 10 दिसंबर 1992 से पहले भारत के बाहर पैदा हुआ व्यक्ति वंश के आधार पर भारत का नागरिक है, अगर उसके जन्म के समय उसके पिता भारत के नागरिक थे।
- 10 दिसंबर 1992 को या इसके बाद भारत में पैदा हुआ व्यक्ति भारत का नागरिक है अगर उसके जन्म के समय कोई एक अभिभावक भारत का नागरिक था।
- 3 दिसंबर 2004 के बाद से, भारत के बाहर जन्मे व्यक्ति को भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा अगर जन्म के बाद एक साल की अवधि के भीतर उसके जन्म को भारतीय वाणिज्य दूतावास में पंजीकृत ना किया गया हो। कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार की अनुमति से 1 साल की अवधि के बाद पंजीकरण किया जा सकता है।

3. पंजीकरण के आधार पर नागरिकता
भारतीय मूल का वो व्यक्ति जो 7 साल से भारत में रह रहा है, यहां की नागरिकता का पात्र है। एक व्यक्ति जो भारत के नागरिक से शादी करता है और 7 साल से भारत का निवासी है, वह भी भारत का निवासी है। ऐसे लोग भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं। भारतीय नागरिकों के छोटे बच्चे भी भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत होने के योग्य हैं।
4. नेचरलाइजेशन के आधार पर नागरिकता
उसे भी भारतीय नागरिकता मिल सकती है, जो 12 साल से भारत में रह रहा हो, और बालिग और मानसिक रूप से स्वास्थ्य हो।
5. भूमि विस्तार के आधार पर नागरिकता
इसका मतलब ये है कि अगर कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है तो इस मामले में सरकार ये तय करेगी कि उस क्षेत्र के लोग भारत के नागरिक माने जाएंगे या नहीं। ये बात गोवा, दमन और दीव, सिक्किम और कई अन्य मामलों में भी लागू हुई है। साथ ही 2014 में भारत का हिस्सा बने बांग्लादेश एन्क्लेव के लोगों को भी भारतीय नागरिकता मिली थी।












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