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चुनाव परिणाम कुछ भी हो, पहली बार कांग्रेस से आगे निकली भाजपा

नई दिल्ली- आधी से ज्यादा लोकसभा सीटों पर चुनाव खत्म हो चुका है। बाकी 4 चरणों के मतदान के बाद करीब एक महीने बाद 23 मई को चुनाव परिणाम सबके सामने आना है। 2014 के चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक सफलता पाई थी, तो उसकी मुख्य प्रतिद्वंदी कांग्रेस का प्रदर्शन स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे खराब रहा था। हालांकि, उस चुनाव में भाजपा की स्ट्राइक रेट भले ही कांग्रेस से ज्यादा रही हो, लेकिन चुनाव में मौजूदगी के मामले में कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी से बड़ी पैन-इंडिया पार्टी थी। क्योंकि, उससे पहले के चुनावों तक उसने भाजपा से कहीं ज्यादा उम्मीदवार उतारे थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को उस मामले में भी पीछे छोड़ दिया है। अबकी बार वह कांग्रेस जैसी सबसे पुरानी पार्टी से कहीं ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि बदले हुए हालातों और गठबंधन की मजबूरियों ने कांग्रेस को अपनी ऊंचाई को कम करने पर मजबूर कर दिया है।

कहां से शुरू हुआ बदलाव?

कहां से शुरू हुआ बदलाव?

कांग्रेस एवं बीजेपी की पैन-इंडिया छवि में सबसे प्रभावी बदलाव 2014 के बाद से महसूस किया जाने लगा, जब मोदी लहर में सवार होकर बीजेपी ने पहली बार 282 सीटें हासिल कर पहली गैर-कांग्रेसी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई। वहीं आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस का ग्राफ इतना नीचे आ गिरा कि वह दो अंकों में सिमटकर 44 पर ही ठह गई। उस चुनाव के बाद से भाजपा का ग्राफ किस कदर बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहली बार बीजेपी सबसे ज्यादा सीटों पर, यानी 437 पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है। जबकि, कांग्रेस ने पहलीबार उससे कहीं पीछे रहकर सिर्फ 423 प्रत्याशियों के नाम ही घोषित किए हैं। उत्तर प्रदेश में कुछ सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन वह इतना भी नहीं है कि कांग्रेस इसबार सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के मामले में बीजेपी को इसबार भी पीछे छोड़ सके। कांग्रेस पार्टी के बीजेपी के मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लड़ना इस बात का भी संकेत है, कि अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही ग्रैंड ओल्ड पार्टी आज ज्यादा से ज्यादा गठबंधन को मजबूर हुई है और उसे कई जगहों पर सहयोगी दलों के लिए अधिक सीटें छोड़नी पड़ी हैं। दिलचस्प बात ये है कि 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है और अगर वहां उसका तालमेल बीएसपी-एसपी से हो जाता, तो उसके कुल प्रत्याशियों की संख्या और भी कम हो सकती थी। इसके ठीक उलट बीजेपी ने देश के उन हिस्सों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, जहां उसका पहले कोई सियासी वजूद महसूस ही नहीं होता था।

कैसे बदल चुके हैं हालात ?

कैसे बदल चुके हैं हालात ?

कांग्रेस और बीजेपी के इतिहास में बहुत लंबा अंतर है। कांग्रेस करीब 134 वर्षों का सफर करके यहां तक पहुंची है, तो भारतीय जनता पार्टी का सियासी सफर सिर्फ 39 साल पुराना है। अगर भारतीय जनसंघ को भी शामिल कर लें, तब भी उसका इतिहास महज 68 साल की होता है। 2014 से पहले तक लद्दाख से लक्षद्वीप तक और कच्छ से कामरूप तक कांग्रेस ही हर जगह दिखाई पड़ती थी। 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने धीरे-धीरे कांग्रेस का स्थान लेना शुरू कर दिया और वह लद्दाख भी जीती और अंडमान भी जीत लिया। गुजरात और राजस्थान में तो उसका दबदबा था ही, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल से लेकर नॉर्थ-ईस्ट में भी उसने अपने पांव जमाने शुरू कर दिएए। जबकि, इनमें से हर जगह पर कांग्रेस की पकड़ ढीली पड़ती गई। इसका नतीजा यही हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी आज कांग्रेस से बड़ी पैन-इंडिया पार्टी बनकर उभरी है, जबकि ग्रैंड ओल्ड पार्टी कई राज्यों में अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।

दोनों पार्टियों के अपने-अपने दावे

दोनों पार्टियों के अपने-अपने दावे

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के डाटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट के हेड प्रवीण चक्रवर्ती कहते हैं, " बीजेपी कांग्रेस से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इससे दिखता है कि यह धारना सच के कितना उलट है, क्योंकि इसबार नए गठबंधन बनाने में कांग्रेस कहीं ज्यादा सफल हुई है और बीजेपी ने 2014 के बाद से अपने सहयोगियों को गंवा दिया है।" जबकि, बीजेपी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव कहते हैं कि बीजेपी मेम्बरशिप, इलेक्ट्रोल बेस और राज्यों में सरकारों के मामले में कांग्रेस से कई गुना बड़ी है। उनका कहना है कि अभी भी कांग्रेस अपनी राजनीतिक हैसियत की तुलना में कहीं ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिससे पता चलता है कि वह अच्छा गठबंधन बना पाने में नाकाम रही है।

अगर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दावों पर गौर करें तो लगभग 125 करोड़ की आबादी वाले देश में करीब-करीब हर दसवां नागरिक आज भाजपा का सदस्य है। जबकि, कांग्रेस नेता ये दावा करते हैं कि चुनावों में राष्ट्रीय पार्टियां कितनी सीटों पर चुनाव लड़ती हैं और उनका स्ट्राइक रेट कितना होता है, इसमें उल्टा नाता है। चक्रवर्ती का कहना है कि, "1999 में बीजेपी सबसे कम यानी 339 सीटों पर लड़ी और 182 पर जीत गई। कांग्रेस 1996 के बाद 2014 में सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ी और परिणाम क्या रहा (44 सांसद)। " 2014 में बीजेपी 428 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जबकि कांग्रेस ने 464 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसी तरह 2009 में बीजेपी 433 और कांग्रेस 440, 2004 में बीजेपी 364 और कांग्रेस 414 सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे। यानी पिछली बार कांग्रेस से बहुत ही कम उम्मीदवार उतारकर भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक बहुमत पा लिया था, इसबार उससे कहीं ज्यादा उम्मीदवार उतारकर वह क्या गुल खिलाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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