पहाड़ियों की रानी में गोरखालैंड पर भारी है विकास

पहाड़ियों की रानी के नाम से मशहूर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की संसदीय सीट के लिए होने वाले चुनाव में लगभग तीन दशकों बाद पहली बार गोरखालैंड की बजाय विकास का मुद्दा हावी है.
तृणमूल कांग्रेस कभी इस सीट को नहीं जीत सकी है. बीजेपी ने भी पिछली बार जीते एस.एस.आहलुवालिया की जगह इस बार राजू सिंह बिष्ट को अपना उम्मीदवार बनाया है.
इस सीट के लिए दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है.
इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. जिस गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के एक इशारे पर इलाके में किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय होती थी, वह अब खुद ही दो गुटों में बंटा हुआ है.
मोर्चा का विमल गुरुंग वाला गुट बीजेपी के साथ है तो विनय तमांग वाला गुट ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ.
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी बीजेपी को ही समर्थन देने का एलान किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ममता और अमित शाह भी इस इलाके में चुनावी रैलियां कर चुके हैं.
बंगाल की जुबान पर फिर चढ़े दीवार पर लिखे नारे
पश्चिम बंगाल: कैसे उतरा वामपंथ का लाल रंग

अस्सी के दशक के उत्तरार्ध से इस इलाके में होने वाले तमाम चुनावों में अलग गोरखालैंड का मुद्दा ही हावी रहता था. पहले सुभाष घीसिंग की अगुवाई वाला गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) यह मुद्दा उठाता रहता था, उसके बाद विमल गुरुंग के नेतृत्व वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा भी इसी मुद्दे पर अपना समर्थन तय करता था.
इसी वजह से मोर्चा ने पिछले दो चुनावों में भाजपा के क्रमशः जसवंत सिंह और एस.ए.आहलुवालिया को समर्थन देकर उनको यहां जिताया था. लेकिन अब खुद यह मोर्चा ही दो-फाड़ हो चुका है. गोरखा नेता विमल गुरुंग साल 2017 में हुए हिंसक आंदोलन के बाद से ही भूमिगत हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार गोरखा मोर्चा विधायक अमर सिंह राई को अपना उम्मीदवार बनाया है. लेकिन बीजेपी ने आहलुवालिया की जगह 33 साल के एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को मैदान में उतारा है.
मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले राजू का दिल्ली में कारोबार है. गोरखा मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के अलावा जीएनएलएफ ने भी उनके समर्थन का एलान किया है.
इसी वजह से ममता इलाके में अपने दौरे के दौरान स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठा चुकी हैं. इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है और दोनों दलों के उम्मीदवार उसी गोरखा तबके से हैं जो यहां निर्णायक हैं.
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो सीपीएम ने अपने पूर्व सांसद सुमन पाठक को उम्मीदवार बनाया है.
बंगाल में 'उधार के उम्मीदवारों' के भरोसे बीजेपी
ग्राउंड रिपोर्ट: 'हाम्रौ मांग गोरखालैंड'
राज्य की सबसे सुरक्षित सीट

दार्जिलिंग संसदीय सीट की गिनती राज्य की सबसे सुरक्षित सीटों में होती है.
यहां इलाके के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने जिसकी पीठ पर हाथ रख दिया उसकी जीत सौ फीसदी तय हो जाती है.
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के जमाने में उसके तत्कालीन प्रमुख सुभाष घीसिंग के समर्थन से इंद्रजीत खुल्लर जीतते रहे थे. उसके बाद इलाके में सत्ता बदली और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग के समर्थन से पहले जसवंत सिंह जीते और उसके बाद वर्ष 2014 में एस.एस. अहलुवालिया.
तृणमूल उम्मीदवार अमर सिंह कहते हैं, "विकास ही हमारा मुख्य मुद्दा है. बीते एक दशक से भी लंबे अरसे से इलाके में विकास का काम ठप है. बीजेपी सांसदों ने पहाड़ियों के विकास की दिशा में कोई पहल तक नहीं की है."
तृणणूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री गौतम देब कहते हैं, "अब अलग राज्य के मुद्दे को अलग रख कर विकास पर ध्यान देना जरूरी है. स्थानीय लोग भी अब इस बात को समझने लगे हैं."
बीजेपी के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष मनोज दीवान कहते हैं, "हमारे लिए अलग राज्य कोई मुद्दा नहीं है. हम इस पर्वतीय इलाके की समस्या के स्थायी राजनीतिक समाधान और यहां लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ रहे हैं."
मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के कार्यकारी अध्यक्ष लोकसांग लामा कहते हैं, "इन चुनावों से साबित हो जाएगा कि पहाड़ियों का शीर्ष नेता कौन है. स्थानीय लोग गुरुंग के साथ हैं."
हारने वाले गुटे के वजूद पर सवाल

विनय तामंग गुट के लोग भी यह बात मानते हैं कि अबकी हारने वाले गुट का वजूद लगभग खत्म हो जाएगा.
बीजेपी उम्मीदवार राजू सिंह मानते हैं कि लोग अबकी पहाड़ियों में लोकतंत्र की बहाली के लिए वोट देंगे. वर्ष 2017 के गोरखालैंड आंदोलन के दौरान तृणणूल कांग्रेस के लोगों ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिल कर जो अत्याचार किए हैं, उसे लोग अब तक नहीं भूल सके हैं.
वह कहते हैं कि दार्जिलिंग की समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान जरूरी है. लेकिन राजू सिंह अलग गोरखालैंड के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करते.
दूसरी ओर सीपीएम उम्मीदवार और राज्यसभा के पूर्व सांसद सुमन पाठक कहते हैं, "इलाके के लोग बीजेपी और तृममूल कांग्रेस के झूठे वादों से आजिज़ आ चुके हैं. अबकी लोग एक बार फिर सीपीएम पर ही भरोसा जताएंगे."
दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से तीन पर्वतीय इलाके में हैं और बाकी चार मैदानी इलाकों में. मैदानी इलाकों की सीटों में से दो कांग्रेस के कब्जे में हैं और एक-एक सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस के.
पर्वतीय इलाके की सीटों पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का ही कब्जा है. पर्वतीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे गोरखा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष कल्याण दीवान कहते हैं, "यह दशकों बाद पहला मौका है जब न तो कोई राजनीतिक दल गोरखालैंड की बात कर रहा है और न ही स्थानीय लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं."
इस संसदीय क्षेत्र में उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला पर्वतीय इलाके के वोटर ही करते रहे हैं. लगभग 16 लाख वोटरों में से सात लाख तीनों पर्वतीय विधानसभा क्षेत्रों में हैं. यहां वही जीतता है जिसे इलाके पर पकड़ रखने वाली पार्टी समर्थन देती है.

पहले जीएनएलएफ वह पार्टी थी और बाद में गोरखा मोर्चा ने उसकी जगह ले ली. लेकिन अबकी वह गोरखा मोर्चा भी दो गुटों में बंटी है. इस वजह से राजनीतिक पंडित भी इस सीट के नतीजों के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा पा रहे हैं.
लंबे अरसे तक दार्जिलिंग में रहकर गोरखालैंड आंदोलन कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "यह चुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गोरखा मोर्चा अध्यक्ष रहे विमल गुरुंग के बीच साख की लड़ाई है. इस वजह से इस सीट की अहमियत काफी बढ़ गई है. ऐसे में कोई पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है."
-
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार -
Who is Aryaman Birla Wife: RCB के नए चेयरमैन आर्यमन बिड़ला की पत्नी कौन है? Virat Kohli की टीम के बने बॉस












Click it and Unblock the Notifications