Chandrayaan 2: मिशन पूरी तरह फेल नहीं, केवल 5 फीसदी का हुआ है नुकसान, उम्मीद अभी कायम
नई दिल्ली। 'चंद्रयान-2' के लैंडर 'विक्रम' का चांद पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान संपर्क टूट गया था। ये सपंर्क तब टूटा जब 'लैंडर विक्रम' चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था। इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर मायूसी छा गई। सबकुछ सामान्य चल रहा था, इसरो की टीम नजरें जमाए हुई थी। लेकिन अपने शुरुआती सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार करने के बाद लैंडिंग से पहले लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। इसरो प्रमुख के. सीवन ने वहां मौजूद पीएम मोदी से कुछ कहा और अटकलें लगाई जाने लगीं कि मिशन चंद्रयान-2 फेल हो गया है। लैंडर से संपर्क टूटने के बावजूद 978 करोड़ रुपये लागत वाला चंद्रयान-2 मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता है। लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर से संपर्क टूटने के बावजूद मिशन की 95 प्रतिशत सफलता ऑर्बिटर पर निर्भर है जो अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।

केवल 5 फीसदी का हुआ है नुकसान- इसरो के अधिकारी
कुछ देर के बाद पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया और कहा कि जीवन में उतर-चढ़ाव आते रहते हैं। दरअसल, लैंडर विक्रम अपने निर्धारित पथ से अलग हो गया था और उसके बाद संपर्क टूट गया। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अभी इस मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता है, लैंडर से पुन: स्थापित हो सकता है। इसरो के एक वैज्ञानिक ने नाम जाहिर ना करने की शर्त पर बताया, 'मिशन का केवल 5 फीसदी- लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर ही नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत -चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।

ऑर्बिटर सफलतापूर्वक चंद्रमा के चक्कर लगा रहा
एक साल मिशन की अवधि वाला ऑर्बिटर चंद्रमा की कई तस्वीरें भेज सकता है। अधिकारी ने कहा कि ऑर्बिटर लैंडर की तस्वीरें भी भेज सकता है, जिससे उसकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है। गौरतलब है कि भारत का चंद्रयान-2 पिछले 43 दिनों से स्पेस में है। 3.8 टन वजनी यह यान फिलहाल की चंद्रमा की कक्षा में टक्कर लगा रहा है। एक महत्वपूर्ण पड़ाव के दौरान चंद्रयान के विक्रम लैंडर अलग कर दिया गया था। लेकिन चांद से महज 2.1 किमी दूर लैंडर का संपर्क टूट गया, इससे इसरो के वैज्ञानिक बहुत मायूस हो गए लेकिन पीएम मोदी ने उनका हौसला बढ़ाया।

पीएम मोदी ने बढ़ाया इसरो के वैज्ञानिकों का हौसला
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे हजारों वर्षों का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा हुआ है जब शुरुआती रुकावटों के बावजूद हमने ऐतिहासिक सिद्धियां हासिल की हैं। खुद ISRO भी कभी न हार मानने वाली संस्कृति का जीता-जागता उदाहरण है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर अपनी शुरुआती चुनौतियों, दिक्कतों से हम हार जाते तो आज इसरो दुनिया की अग्रणी स्पेस एजेंसियों में से एक भी स्थान नहीं ले पाता। परिणाम अपनी जगह हैं, लेकिन मुझे और पूरे देश को अपने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों आप सभी के प्रयासों पर गर्व है।












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