विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे 90% छात्र पास नहीं कर पाते NEET की परीक्षा- प्रह्लाद जोशी
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने विवादास्पद दावा करते हुए कहा कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 90 प्रतिशत भारतीय छात्र भारत में योग्यता परीक्षा पास करने में विफल रहते हैं।
नई दिल्ली, 1 मार्च। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने विवादास्पद दावा करते हुए कहा कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 90 प्रतिशत भारतीय छात्र भारत में योग्यता परीक्षा पास करने में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि फिलहाल यह इस विषय पर बहस करने का सही समय नहीं है कि छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने विदेश क्यों जा रहे हैं।

बता दें कि विदेश से मेडिकल की डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को भारत में मेडिसिन की प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना होता है। प्रल्हाद जोशी का बयान ऐसे समय में आया है जब हजारों की संख्या में मेडिकल के छात्र युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे हुए हैं।
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बता दें कि भारत से हर साल हजारों की संख्या में छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। इसके पीछे कई कारण है। जैसे भारत में मेडिकल की पढ़ाई विदेश से पढ़ाई की अपेक्षा महंगी है। दूसरा भारत में मेडिकल की बेहद कम सीटें होती हैं जबकि सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या काफी ज्यादा होती है।
विदेश से MBBS की पढ़ाई का पूरा खर्च 35 से 40 लाख के करीब आता है जबकि भारत में एमबीबीएस करने का खर्च 50 लाख के करीब आता है। भारत में मेडिकल की पढ़ाई के लिए छात्रों को NEET की परीक्षा पास करनी होती है। भारत में हर साल लगभघ 8 लाख लोग नीट क्वालिफाई करते हैं, लेकिन देशभर में नीट मेडिकल की लगभग 90 हजार ही सीटें हैं। इसलिए भारी संख्या में छात्र एडमिशन से वंचित रह जाते हैं।












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