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नसबंदी के बाद हुई मौतों से याद आये संजय गांधी

बिलासपुर। आज सुबह से एक खबर ने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया है और वो है बिलासपुर में नसबंदी का ऑप्रेशन कराने वाली नौ महिलाओं की मौत। जिसने हमारे देश के प्रशासन और लचर व्यवस्था की पोल खोल रख दी है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्‍य के पेंडारी गांव में सरकारी अस्‍पताल की ओर से नसबंदी कैंप लगाया गया है जहां पर नौ महिलाओं की मौत नसबंदी कराने के बाद हो गई। कैंप में अभी भी 32 महिलाओं की हालत गंभीर है। इस घटना ने सभी सरकारी इंतजामों की पोल खोल कर रख दी है।

9 Women died in Bilaspur medical camp Chattisgarh in sterilisation camp, Who is Responsible

अब इसे महज गलत संयोग कहे या खराब इत्तफाक कि नसंबदी के बारे में जब भी बातें होती हैं, लोगों के जेहन में तुरंत भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की यादें ताजा हो जाती है जिनके समय में भी फैमिली प्लानिंग कमिशन की ओर से भी इसी तरह की घटनाएं सामने आयी थीं जैसी की आज सुबह बिलासपुर से आयी है। उस समय देश में इमरजेंसी लगी हुई थी और संजय गांधी की फैमिली प्लानिंग प्लान ने मुसलमान महिलाओं और पुरूषों की हालत खराब कर दी थी, लोग भागे-भागे फिर रहे थे क्योंकि उनकी जबरदस्ती नसबंदी करायी जा रही थी।

जबरन करायी गई लोगों की नसबंदी

दरअसल संजय गांधी और इंदिरा गांधी को लगा कि जिस प्रकार चीन में सख्ती के साथ जनसंख्या को रोका जा रहा है ठीक उसी प्रकार वह भारत में यह चमत्कार करके दिखा दे। गांवों में डाक्टरों ने नसबंदी के आंकड़े पूरे करने के लिए जिस प्रकार फर्जी तरीके से नसबंदी की और झूठे आंकड़े पेश किए। उसी से लोगों में गुस्सा और कांग्रेस के खिलाफ नफरत फैली। हालांकि इस तानाशाह रवैये का दंड तत्कालिन सरकारो को मिला था।

वैसे नसबंदी ऑप्रेशन को लेकर देश में हमेशा बवाल होता रहा है। पिछले साल भी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से खबर आयी थी कि सरकारी टारगेट पूरा करने के चक्कर में स्वास्थ्य कार्यकर्ता जबरदस्ती भिखारियों की नसंबदी करा रहे हैं।

समाज का एक कुनबा आज भी इस आप्रेशन के खिलाफ है, तभी तो उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री व समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान ने हाल ही में कहा था कि संजय गांधी ने आपातकाल के दौरान बल प्रयोग कर नसबंदी कार्यक्रम चलवाया और इसलिए उन्हें अल्लाह ने सजा दी। गौरतलब है कि संजय गांधी वर्ष 1980 में एक विमान दुर्घटना में मारे गये थे।

आजम ने भी संजय को कोसा था

खैर यह सब तो राजनीति का हिस्सा है, लोग आरोप-प्रत्यारोप करते ही रहेंगे लेकिन प्राब्लम तो तब आती है जब इस राजनीति का शिकार हमारे सरकारी तंत्र हो जाते हैं।जिसका खामियाजा हमारे देश की जनता को भुगतना पड़ता है। आखिर कब तक हमारा समाज इस तरह की लापरवाही का शिकार होता रहेगा।

आखिर बिलासपुर में मौत की शिकार हुई महिलाओ की मौत का जिम्मेदार कौन है? है जवाब आपके पास.. अगर हां तो अपना जवाब नीचे के कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।

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