तो ये हैं वह नौ वजहें जिनकी वजह से आ गई है शशि थरूर पर मुसीबत
नई दिल्ली। कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ क्या कर दी, उनके लिए मुसीतब खड़ी हो गई है। शुक्रवार को जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अयर की ओर से शशि थरूर को झिड़की मिली तो अब पार्टी ने थरूर से सफाई मांगी है।
पार्टी के कड़े रुख के बाद थरूर ने पार्टी को चिट्ठी लिखकर सफाई दी है। अब इस बात के भी संकेत आ रहे हैं कि पार्टी थरूर को नियमित पार्टी ब्रीफिंग से दूर रख सकती है।
आखिर थरूर ने ऐसा क्या कह दिया जो पार्टी उनसे इतना खफा हो गई। दरअसल थरूर ने तीन जून को लीडिंग अमेरिकी न्यूजवेबसाइट हफिंगटन पोस्ट पर नरेंद्र मोदी को लेकर एक ब्लॉग लिखा और उसमें उन्होंने मोदी की दिल खोलकर तारीफ की।
शशि थरूर ने अपने आर्टिकल में मोदी के लिए 'मोदी 2.0' टाइटल का प्रयोग किया।
शशि थरूर के इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद एक बार को वाकई किसी को भी लग सकता है कि कभी जिस नरेंद्र मोदी ने शशि थरूर की स्वर्गीय पत्नी सुनंदा पुष्कर को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी थी, वह थरूर क्या मोदी के खेमे में शामिल हो गए हैं।
एक नजर डालिए हफिंगटन पोस्ट के ब्लॉग में थरूर की ओर से गिनाई गईं नरेंद्र मोदी की उन खूबियों पर जिसे लेकर कांग्रेस पार्टी में घमासान जारी है।

पिछली बातों से आगे निकले
शशि थरूर ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि विपक्ष में होने की वजह से अगर मैं मोदी 2.0 का आगे बढ़कर स्वागत नहीं किया तो फिर यह अशिष्ट होगा। थरूर ने लिखा है कि मोदी 1.0 एक विभाजनकारी मोदी थी लेकिन अब उन्होंने खुद को बदल लिया है। वह खुद को इन सबसे बचाकर रखेंगे और भारत के लोगों और लोकतंत्र को इसी की जरूरत है।
मोदी के ट्वीट ने जीता थरूर का दिल
थरूर ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि जिस तरह से बीजेपी और नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनावों में जीत हासिल हुर्इ उसका अंदाजा शायद कम ही लोगों को था। इस जीत पर थरूर ने नरेंद्र मोदी को बधाई ट्वीट किया। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने रिप्लाई ट्वीट किया। मोदी ने थरूर को जवाब दिया कि अब देश को आगे बढ़ाने के लिए साथ में काम करें। बस इस ट्वीट ने थरूर के दिल पर जादू कर दिया। थरूर ने लिखा है कि मोदी की यह अविश्वसनीय सहृदयता से साबित होता है कि वह एक शांतिकारक और सबको साथ लेकर चलने वाले नेता हैं।

गुजरात में आया निवेश
जिस गुजरात मॉडल को लेकर कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने पूरे चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा उसी मॉडल की तारीफ थरूर ने अपने इस आर्टिकल में कर डाली है। थरूर ने लिखा है कि मोदी का रिकॉर्ड गुजरात में काफी सफल है, एक ऐसा राज्य जो उनके नेतृत्थ्व में लगातार तरक्की के रास्ते पर है जो जिसके लिए वाकई निवेशक हर पल आकर्षित रहते हैं।

मोदी के वादे बदले वोट में
थरूर के मुताबिक 'हिंदुत्व' जो बीजेपी की धारा है नरेंद्र मोदी ने उसे किनारे करके वोटर्स से वादा किया कि वह देश में गुजरात मॉडल को लाकर दिखाएंगे। इस वादे का ही नतीजा है कि आज बीजेपी को 282 सीटें हासिल हुईं और मेरी पार्टी को 44 सीटों के साथ ही इतिहास की सबसे बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा।

नरेंद्र मोदी की पहली स्पीच से प्रभावित थरूर
थरूर ने लिखा है कि मोदी का मुझे ट्वीट करना इस बात को साबित करता है कि वह पुरानी दुश्मनी को भूलने को तैयार हैं। इसके साथ ही थरूर नरेंद्र मोदी उस पहले भाषण से भी काफी प्रभावित नजर आए जो उन्होंने जीतने के बाद दिया था। इस भाषण में मोदी ने कहा था, 'मैं हर भारतीय का प्रधानमंत्री बनूंगा। उनका भी जिन्होंने मुझे वोट नहीं दिया है।'

बढ़ा दिया विरोधियों की ओर हाथ
शशि थरूर ने लिखा है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा झगड़ा करने वाली भाषा से बचते नजर आए, न ही उन्होंने पुराने मुद्दे उठाए और न ही इस तरह की कोई बात कही जिससे भारत के धार्मिक अल्पसंख्यक लोग खुद को अपमानित महसूस करें। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी ने अपने विरोधियों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया।

पूरानी सरकार को दी पूरी अहमियत
थरूर ने अपने इस आर्टिकल में लिखा है कि नरेंद्र मोदी ने भले ही चुनाव प्रचार के दौरान सरकार की उन परियोजनाओं और योजनाओं पर हमला बोला हो जिन्हें कांग्रेस पार्टी ने नेहरु-गांधी परिवार के नाम पर रखा हो, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने मंत्रियों को इन परियोजनाओं का नाम बदलने ने मना कर दिया। मोदी ने अपने मंत्रियों को साफ कर दिया कि वह इस बात का ध्यान रखें कि यह योजना प्रभावशाली ढंग से काम कर रही हैं कि नहीं।

पुराने नेताओं को किया बाहर
थरूर के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में पार्टी के चतुर और युवा प्रोफेशनलों को जगह दी है। इसके साथ ही उन्होंने उन पुराने वेटरेन और उन नेताओं को किनारे कर दिया जिनकी हिंदुवादी सोच ने बीजेपी के बारे में लोगों की चिंताएं बढ़ा दी थीं।

अमेरिकी स्टाइल का शपथ ग्रहण
थरूर के इस आर्टिकल में नरेंद्र मोदी की ओर से सार्क देशों को भेजे गए शपथ ग्रहण के निमंत्रण का भी जिक्र हैं। थरूर के मुताबिक भारत ने इस तरह का शपथ ग्रहण समारोह पहले कभी नहीं देखा था। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में 4,000 मेहमान शामिल हुए। मोदी का शपथ ग्रहण समारोह बिल्कुल अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह की तरह नजर आ रहा था।

शपथ ग्रहण में दिया पाक को न्यौता
थरूर के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान पाक समर्थित आतंकवाद और बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को लेकर काफी कुछ कहा लेकिन जब उन्होंने शपथ ग्रहण में पाकिस्तान और बांग्लादेश को भी न्यौता भेजा तो सीमा पार भी एक अच्छा संदेश गया।
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