IAS-IRS समेत 9 भारतीय अफसर जापान में करेंगे पढ़ाई, जानिए क्या है JDS कार्यक्रम?

भारत की विभिन्न शीर्ष सेवाओं से जुड़े नौ सिविल सेवकों का चयन जापान सरकार की प्रतिष्ठित जेडीएस (JDS) स्कॉलरशिप योजना के तहत किया गया है। ये अधिकारी जापान के प्रमुख विश्वविद्यालयों में दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

हाल ही नई दिल्ली स्थित जापान दूतावास में विशेष विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें जापान जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए चयनित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS), भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा (IRSE) और भारतीय दूरसंचार सेवा (ITS) से जुड़े इन अधिकारियों का सम्मान किया गया। हालांकि इन अधिकारियों के नाम और वर्तमान पदस्थापन की जानकारी आधिकारिक रूप से साझा नहीं की गई है।

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भारतीय अधिकारियों पर क्या बोले जापानी राजदूत?

भारत में जापान के राजदूत ओनो केईची ने कहा, "ये अधिकारी जापान और भारत के बीच सेतु का कार्य करेंगे। भारत को जापान की ज़रूरत है और जापान को भारत की। जापान एक वृद्ध होती आबादी वाला देश है, जहां युवा भारतीयों की भूमिका भविष्य में और भी महत्वपूर्ण होगी।" उन्होंने यह भी कहा कि जापान वर्षों से भारत का सहयोगी रहा है, और अब यह रिश्ता एक नई दिशा में बढ़ रहा है जहां प्रशासनिक सहयोग और मानव संसाधन विकास केंद्र में हैं।

जापान के किन विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करेंगे ये अधिकारी?

जापान के जिन विश्वविद्यालयों में ये अधिकारी अध्ययन करेंगे, उनमें यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, वासेदा यूनिवर्सिटी, हितोत्सुबाशी यूनिवर्सिटी और कोबे यूनिवर्सिटी शामिल हैं। चयनित अधिकारियों की औसत आयु 38.2 वर्ष है और ये सभी भारत के विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों में महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं।

जेडीएस कार्यक्रम क्या है?

Project for Human Resource Development Scholarship (JDS) जापान सरकार द्वारा 1999 में शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसके अंतर्गत विकासशील देशों के प्रतिभाशाली सरकारी अधिकारियों को जापान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और नीति निर्माण में नवाचार को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है।

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जापान में रहते हैं भारत के 51 हजार नागरिक

बता दें कि वर्तमान में जापान में लगभग 51 हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जो नेपाली और बर्मी समुदाय के बाद तीसरा सबसे बड़ा दक्षिण एशियाई प्रवासी समूह है। इनमें पढ़ाई करने गए छात्रों की संख्या भी काफी है। भारत और जापान के बीच हाल के वर्षों में न केवल रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ी है, बल्कि 'जन-जन' के बीच भी संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2021 में दोनों देशों ने विशेष कौशलयुक्त श्रमिकों (SSW) पर समझौता किया, जिससे भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों के लिए जापान में रोजगार के अवसर भी खुले हैं।

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