India-China: पूर्वी लद्दाख में टकराव खत्म करने के लिए आज कोर कमांडर मीटिंग का 8वां राउंड
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच आज आंठवें दौर की कोर कमांडर वार्ता होने वाली है। दोनों देशों के बीच पिछले छह माह से पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर टकराव जारी है। इस वार्ता के जरिए एक बार फिर टकराव को खत्म करने की कोशिशें की जाएंगी। 12 अक्टूबर को दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडर चुशुल में मिले थे। लेकिन हर बार की तरह वह बातचीत भी बेनतीजा खत्म हो गई थी। वह मीटिंग करीब 12 घंटे तक चली थी।

फिंगर 4 से हटने के लिए रखी शर्त
इंडियन आर्मी की तरफ से 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन वार्ता का नेतृत्व करेंगे। ले. जनरल मेनन ने अक्टूबर में इस कमान की जिम्मेदारी संभाली है। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की तरफ से मेजर जनरल लियू लिन एक बार फिर समझौते का प्रस्ताव लेकर हाजिर होंगे। चुशुल-मोल्डो में होने वाली इस मीटिंग में भारत ऐसी कोई भी शर्त नहीं मानेगा जो एकतरफा होगी। वहीं इस बात की भी पूरी आशंका है कि एक बार फिर यह मीटिंग आज बेनतीजा ही खत्म होने वाली है। पांच मई से भारत और चीन के बीच टकराव शुरू हुआ था। तनाव को खत्म करने के लिए वार्ता से पहले चीन की तरफ से एक शर्त रखी गई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो भारत ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है। पीएलए की तरफ से पैंगोंग त्सो के फिंगर 4 से जवानों को हटाने के लिए यह शर्त रखी गई थी।फिंगर 4 वह हिस्सा जहां तक भारत की सेना पेट्रोलिंग करती थी लेकिन मई माह से ही पीएलए की तरफ से इसमें बाधा डाली गई।अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि पीएलए ने भारत की सेना के सामने शर्त रखी थी कि इंडियन आर्मी सिर्फ फिंगर 3 तक पेट्रोलिंग करेगी। वहीं चीन के जवानों के लिए फिंगर 5 तक पेट्रोलिंग की बात इस शर्त के तहत कही गई।
भारत ने ठुकराई चीन की मांग
भारत, फिंगर 8 तक एलएसी को मान्यता देता है लेकिन चीन इसका विरोध करता आया है। अगर भारत इस शर्त को मान लेता तो इसका सीधा मतलब यही होता कि फिंगर 4 अक्साई चिन की सीमा में आ जाता और इंडियन आर्मी को यह हरगिज मंजूर नहीं था। इस पूरे मसले को पीएलए ने और मुश्किल कर दिया है। पीएलए ने फिंगर 8 से फिंगर 4 तक एक सड़क तैयार कर डाली है जबकि इंडियन आर्मी अभी यहां पर सड़क निर्माण कैसे हो, इस पर विचार ही कर रही है। फिंगर 4 पर 5800 मीटर की ऊंचाई पर भारत और चीन के सैनिक अभी तक आमने-सामने है। भारत की तरफ से पैंगोंग त्सो के दक्षिण में स्थित रेजांग ला और राकिन ला पास को खाली करने का प्रस्ताव पहले ही खारिज कर दिया गया है।












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