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छह वजहें आखिर क्‍यों जम्‍मू कश्‍मीर में सरकार बनने में हो रही देर

श्रीनगर। सात जनवरी को जम्‍मू कश्‍मीर के मुख्‍यमंत्री मुफ्ती मोहम्‍मद सईद का निधन हो गया था। उनके निधन के 23 दिन बीत जाने के बाद आज तक राज्‍य में सरकार नहीं सकी है और राष्‍ट्रपति शासन लगा हुआ है।

पीडीपी अध्‍यक्षा महबूबा मुफ्ती पर इसकी जिम्‍मेदारी डाल दी गई है कि वह बीजेपी के साथ मिलकर वापस सत्‍ता में वापसी करें या फिर कोई और विकल्‍प तलाशें।

दिसंबर 2014 में जिस जनता ने राज्‍य में हुए चुनावों में बढ़ चढ़कर हिस्‍सा लिया था वह अब खुद को शायद ठगा सा महसूस कर रही है।

थोड़े दिनों पहले राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्‍यक्ष उमर अब्‍दुल्‍ला ने कहा था कि अगर महबूबा मुफ्ती कन्‍फ्यूज हैं तो फिर राज्‍य में फिर से चुनाव कराए जाने चाहिए।

लेकिन आखिर ऐसी क्‍या वजहें हो सकती हैं कि महबूबा को सरकार बनाने में फैसला लेने में असमर्थता महसूस हो रही है।

विशेषज्ञ इसके पीछे कई वजहों का हवाला देते हैं। एक नजर डालिए उन वजहों पर जिनकी वजह से महबूबा मुफ्ती सरकार बनाने के फैसले पर असमंजस की स्थिति में महसूस कर रही हैं।

 फेल हुआ मुफ्ती का एक आइडिया

फेल हुआ मुफ्ती का एक आइडिया

पूर्व सीएम मुफ्ती मोहम्‍मद सईद ने वर्ष 2002 से लेकर 2005 तक राज्‍य में कभी भी किसी के स्‍वतंत्र विचारों पर रोक नहीं लगाई और लोगों को विरोध प्रदर्शन करने के लिए आजादी मिल गई। विशेषज्ञों के मुताबिक दूसरे कार्यकाल के दौरान वह बुरी तरह असफल साबित हुए। अब महबूबा मोदी सरकार से यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि अलगाववादी नेताओं के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो।

महबूबा बिजी सलाह लेने में

महबूबा बिजी सलाह लेने में

जम्‍मू कश्‍मीर में बीजेपी और पीडीपी सरकार के 10 माह काफी विवादित रहे और दोनों पार्टियों के बीच किसी न किसी मुद्दे को लेकर कोई न कोई विवाद रहा। गौमांस, धारा 370, राज्‍य का झंडा, पश्चिमी पाकिस्‍तान से आए शरणार्थियों का मुद्दा हो या फिर गांवों की रक्षा समिति को खत्‍म करने का मुद्दा हो। महबूबा नई सरकार के मुद्दे पर लोगों से सलाह लेने में बिजी हैं।

कमजोर होती पार्टी

कमजोर होती पार्टी

बीजेपी के साथ पीडीपी के गठबंधन की सबसे बड़ी वजह जम्‍मू, कश्‍मीर और लद्दाख में पीडीपी के संगठन को मजबूत करना था। पीडीपी जिसे सिर्फ कश्‍मीर केंद्रित पार्टी माना जाता है, उसकी उम्‍मीदें इस गठबंधन से काफी थीं। लेकिन पार्टी अपने मकसद में सफल नहीं हो सकी और यहां तक कि कश्‍मीर में पार्टी का आधार कमजोर होने लगा है।

 पीडीपी ने खोया लोगों का विश्‍वास

पीडीपी ने खोया लोगों का विश्‍वास

बीजेपी के साथ मिलकर राज्‍य में सरकार बनाने के साथ ही पार्टी की इमेज जनता के बीच कमजोर हुई। कश्‍मीर में जनता का नजरिया बदल गया और उन्‍होंने दबी जुबान से इस पार्टी को ,'कश्‍मीर विरोधी पार्टी' कहना शुरू कर दिया। ऐसे में शायद महबूबा इस मौके का फायदा अपनी इमेज मेकओवर के लिए उठाना चाहती हैं।

पीडीपी ने पूरा नहीं किया वादा

पीडीपी ने पूरा नहीं किया वादा

वर्ष 2014 में आई बाढ़ के बाद राज्‍य को राहत कोष के नाम पर 80,000 करोड़ रुपए हासिल हुए लेकिन जनता को इसका 10 प्रतिशत भी नहीं मिला है। केंद्र सरकार के साथ गठबंधन होने के बावजूद पीडीपी और महबूबा असफल साबित हुए।

बीजेपी के खिलाफ उठतीं आवाजें

बीजेपी के खिलाफ उठतीं आवाजें

पीडीपी के दो सदस्‍य मुजफ्फर हुसैन बेग और तारीक हमीद कारा हमेशा से ही बीजेपी के साथ होने वाले गठबंधन के खिलाफ अपनी आवाज उठाते आए हैं। सिर्फ ये दो नहीं बल्कि पार्टी के अंदर ही कई ऐसे लोग मौजूद हैं तो बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं चाहते हैं। ऐसे में राज्‍य में सरकार बनाने में शायद महबूबा को अभी और समय लग सकता है।

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