ऐसे ही झटका देकर कभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने गए थे NCP चीफ शरद पवार!
बेंगलुरू। कहते इतिहास खुद को दोहराता है और लगता है कि इतिहास एक बार फिर उसी कदम पर है। एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे अजीत पवार, जिन्होंने शनिवार को महाराष्ट्र में डिप्टी मुख्यमंत्री शपथ ली है, उन्होंने कुछ ऐसा नहीं किया है, जो महाराष्ट्र की राजनीति में पहले नहीं हो चुका है। एनसीपी चीफ शरद गोविंदराव पवार वर्ष 1978 में कांग्रेस (यू) की बंसत दादा पाटिल की सरकार में उद्योग मंत्री थे।

तत्कालीन मुख्यमंत्री बसंत दादा पाटिल मंत्रिमंडल में शामिल 38 वर्षीय युवा उद्योग मंत्री शरद पवार ने बंसत दादा पाटिल के साथ विश्वासघात किया और कांग्रेस यू के 17 विधायकों तोड़ लिया था, जिससे उनकी सरकार अल्पमत में आ गई। शरद पवार ने गुरू यशवंत राव चाह्वाण उन दिनों विपक्ष में थे और उस दौर की केंद्र में सत्तासीन जनता पार्टी के समर्थन से शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे।

उल्लेखनीय है वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी जनता पार्टी गठबंधन के हाथों हारकर केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई थी। तब महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में सीटों के नुकसान की जिम्मेदारी लेते हुए, तत्कालीन महाराष्ट्र मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद वसंत दादा पाटिल को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
हालांकि कुछ अंतराल बाद कांग्रेस पार्टी दो धड़े में बंट गई। कांग्रेस पार्टी से टूटे एक धड़े के संरक्षक यशवंतराव चव्हाण के कांग्रेस यू में शरद पवार भी शामिल हो गए। जबकि कांग्रेस के दूसरे धड़े का नाम पड़ा कांग्रेस (आई)। रखा गया, जिसका नेतृत्व इंदिरा गांधी कर रही थी।

वर्ष 1978 के प्रारंभ में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में दोनों कांग्रेस दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन चुनाव में नंबर पार्टी बनकर उभरी जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस यू और कांग्रेस ने चुनाव बाद गठबंधन कर लिया, क्योंकि जनता पार्टी अकेले बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी।
कांग्रेस यू और कांग्रेस आई गठबंधन ने वसंत दादा पाटिल के नेतृत्व में महाराष्ट्र में सरकार बनी और वंसत दादा पाटिल सरकार में शरद पवार को उद्योग और श्रम मंत्रालय का कार्यभार मिला था। कहा जाता है कि शरद पवार और मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटिल के बीच अच्छी बांडिंग थी।

वर्ष 1978 की एक दोपहर महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री बसंत दादा पाटिल ने तत्कालीन युवा उद्योग मंत्री शरद पवार को घर पर भोजन पर बुलाया। तब भोजन के बाद चलते वक्त शरद पवार ने बसंत दादा पाटिल से कहा, 'तो दादा, अब मैं चलता हूं, मुझसे कोई भूल-चूक हुई तो माफ कर देना' मुख्यमंत्री बसंत दादा तब शरद पवार के उन शब्दों के अर्थ नहीं समझ पाए।
मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटिल को लगा कि उनका युवा उद्योग मंत्री बस यूं ही उन शब्दों का इस्तेमाल कर गया, लेकिन शाम होते ही जब उन्हें पता चला कि कांग्रेस यू के 17 विधायक शरद पवार समेत टूट गए हैं तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कांग्रेस यू और कांग्रेस आई गठबंधन सरकार गिर चुकी थी।

मौजूदा एनसीपी चीफ शरद पवार ने जुलाई, 1978 में मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटिल के साथ विश्वासघात कर कांग्रेस यू के 17 विधायकों तोड़कर उनकी सरकार गिराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी और फिर केंद्र में सत्तासीन पूर्व पीएम चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली तत्कालीन जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन बैठे थे।
यह अलग बात है कि वर्ष फरवरी, 1980 में लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी होने के बाद शरद पवार के नेतृत्व में गठित प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार को खारिज कर दिया गया। वर्ष 1980 में दोबारा महाराष्ट्र में चुनाव कराया गया और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (आई) ने राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया।

शरद पवार ने 1983 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (सोशलिस्ट) यानी कांग्रेस (एस)) पार्टी की अध्यक्षता संभाली। दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार के नेतृत्व में कांग्रेस (एस) ने महाराष्ट्र विधानसभा में 288 में से 54 सीटें जीतीं थी और एनसीपी को विपक्ष में बैठना पड़ा था। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में भी एनसीपी को 54 सीटें ही मिली है और एनसीपी में टूट के बाद कमोबेश एनसीपी के लिए एक बार विपक्ष में बैठना पड़ सकता है।
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार भतीजे अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी विधायकों संभावित टूट के बाद अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि शरद पवार एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके महाराष्ट्र के पॉवरगेम में एक बार फिर वापसी करना चाहते थे, लेकिन उनका सपना अब लगभग टूट चुका है।

समय का चक्र देखिए कि करीब 41 साल बाद भतीजे अजीत पवार ने शरद पवार को ठीक वैसा ही झटका दिया है, जैसा उन्होंने बसंत दादा पाटिल को कभी दिया था। कुछ साल पहले तक शरद पवार के उत्तराधिकारी समझे जाते रहे भतीजे अजित पवार अब फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम की शपथ ले चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि एनसीपी नेता अजीत पवार एनसीपी के 10-11 विधायकों को तोड़कर बीजेपी सरकार में शामिल हुए हैं। बीजेपी और एनसीपी के टूटे हुए विधायकों के सहयोग से रातों-रात वजूद में आई महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार को अभी 30 नवंबर को विधानसभा में बहुमत साबित करना है, जिसके लिए उन्हें कम से कम 145 के आकंड़े को छूना है।

गौरतलब है बीजेपी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में 105 सीट जीतकर नंबर वन पार्टी रही थी जबकि शिवसेना 56, एनसीपी 54 और कांग्रेस 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी को 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत के लिए कम से कम 145 विधायकों की दरकार है। बीजेपी के 105 और एनसीसी से टूटे 11 विधायकों का जोड़ 116 होता है।

अभी बीजेपी को अभी बहुमत के लिए 29-30 विधायकों की जरूरत है। विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी तैयार है। सूत्र बताते है कि बीजेपी के पास जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए विधायक जुटा चुकी हैं और 30 नवंबर को होने वाले शक्ति प्रदर्शन के दिन वह विधानसभा में बहुमत साबित कर देगी।
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