कारगिल में 15 गोली लगने के बावजूद दुश्मन को धूल चटाने वाले मेजर योगेंद्र यादव को मिलेगा मानद कैप्टन पद
परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार मेजर (मानद लेफ्टिनेंट) योगेंद्र सिंह यादव को उनकी अनुकरणीय सेवा और भारतीय सेना में योगदान के लिए 75 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मानद कैप्टन रैंक से सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली, 14 अगस्त। परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार मेजर (मानद लेफ्टिनेंट) योगेंद्र सिंह यादव को उनकी अनुकरणीय सेवा और भारतीय सेना में योगदान के लिए 75 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मानद कैप्टन रैंक से सम्मानित किया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे करने वाले योगेंद्र सिंह को उनकी बहादुरी के लिए परमवीर चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है।

वह मात्र 19 साल के थे जब उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 4 जुलाई 1999 को सूबेदार मेजर यादव ने जो बहादुरी दिखाई, वह भारतीय सेना की परंपराओं के समृद्ध इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित है। कारगिल युद्ध में योगेंद्र सिंह यादव को 15 गोली लगी थीं, इसके अलावा उनके शरीर पर दो हैंड ग्रेनेड के घाव थे, इसके अलावा उनका एक हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था।
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युद्ध जीतने के तकरीबन 1 साल तक योगेंद्र अस्पताल में भर्ती रहे। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना में कुल 337 सेवारत गैर-कमीशन अधिकारियों को मानद कैप्टन रैंक से सम्मानित किया गया है, जबकि 1358 को मानद लेफ्टिनेंट रैंक से सम्मानित किया गया है। 1984 के बाद से, मानद लेफ्टिनेंट के लिए मानद आयोग के अनुदान और मानद कप्तानों के लिए आनुपातिक रिक्तियों का अनुपात 12:1000 रहा है। जूनियर कमीशंड अधिकारियों के योगदान को ध्यान में रखते हुए, मानद लेफ्टिनेंट के लिए अब यह अनुपात 15:1000 कर दिया गया है।












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