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#2GVerdict: कविता लिखकर बने नेता, 2G केस में गए जेल, पढ़िए ए राजा का राजनीतिक सफर

नई दिल्ली। सीबीआई की विशेष कोर्ट ने गुरुवार को 2G केस में आरोपी बनाए गए पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को घोटाले के सभी आरोपों से बरी कर दिया। तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में कभी वकालत करने से लेकर भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री बनने तक 47 साल के ए राजा ने लंबा राजनीतिक सफर तय किया है। 2जी केस ने ए राजा के राजनीतिक कैरियर पर अल्पविराम जरूर लगा दिया था लेकिन आज के फैसले के बाद ए राजा एक बार फिर से राजनीति से वापसी करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

तमिलनाडु के प्रमुख दलित नेता हैं ए राजा

तमिलनाडु के प्रमुख दलित नेता हैं ए राजा

ए राजा की पार्टी डीएमके भी इस मामले में उनके साख खड़ी हुई है। डीएमके ने स्पष्ट कर दिया है कि वो ए राजा को इस मामले में फंसाया गया था और वो उनको समर्थन देना जारी रखेगी। डीएमके प्रमुख करुणानिधि ने भी उनका बचाव करते हुए कहा कि 'ए राजा को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह दलित हैं।' ए राजा डीएमके के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि वे तमिलनाडु में प्रमुख दलित नेता के तौर पर देखे जाते हैं। तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में डीएमके ए राजा को नाराज कर दलित वोटरों का नुकसान उठाने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में बनाया मंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में बनाया मंत्री

ए राजा ने तमिलनाडु में दलित नेता के रुप में अपने राजनीति की शुरुआत की थी। जल्द ही वे राज्य में प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। ए राजा राष्ट्रीय फलक पर तब आए जब महज 35 साल की उम्र में 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें एनडीए रकार में केंद्रीय मंत्री बनाया। ए राजा इसके बाद से लगातार आगे बढ़ते गए। एनडीए और यूपीए दोनों सरकारों में ए राजा ने केंद्रीय मंत्री का पदभार संभाला। यूपीए सरकार ने मई 2007 में उन्हें दूरसंचार मंत्रालय सौंपा था। 2009 में यूपीए सरकार की दोबारा वापसी के बाद ए राजा को एक बार फिर से दूरसंचार मंत्री बनाया गया।

कविता के जरिए करुणानिधि के पहुंचे करीब

कविता के जरिए करुणानिधि के पहुंचे करीब

तमिलनाडु के पेरांबुलर में 1963 में जन्मे ए राजा ने साइंस में स्नातक के बाद कानून की डिग्री ली थी। ए राजा तमिल में कविताएं भी लिखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि ए राजा की करुणानिधि से नजदीकी कविताओं के जरिए ही बढ़ी क्योंकि करुणानिधि भी एक जमाने में कविताएं लिखते थे। ए राजा ने डीएमके की छात्र ईकाई में शामिल हो कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। ए राजा ने तेजी से राजनीतिक सीढ़ियां चढ़ी। 1996 में डीएमके ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया और वे पहली ही बार में चुनाव जीतकर संसद में पहुंच गए। 2009 में ए राजा चौथी बार लोकसभा के लिए चुने गए थे।

मैंने क्रांति लाई- ए राजा

मैंने क्रांति लाई- ए राजा

2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान ए राजा ने अपने संसदीय क्षेत्र में प्रचार करते हुए उन्होंने कहा था कि 'एक किलो चावल, एक रुपये में और एक फोन कॉल 50 पैसे में।' 2G घोटाले में नाम आने के बाद इस्तीफा देते वक्त भी ए राजा ने कहा था, 'आज सभी लोग 50 पैसे में फोन कॉल करते हैं। मैंने टेलीकॉम सेक्टर में क्रांति लेकर आई।'

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