दिल्ली का 'आधार' बना बड़ी मुसीबत, फिंगर प्रिंट मैच नहीं होने की वजह 26000 लोग परेशान

नई दिल्ली। आधार नंबर लोगों की मदद की बजाए अब मुश्किल का सबब पहले से ही बन हुआ था, ऐसे में दिल्ली सरकार आधार की तर्ज पर तमाम राशन की दुकानों पर लोगों की उंगलियों के निशान की पहचान करने के बाद राशन देने की व्यवस्था शुरू की जोकि अब लोगों की मदद की बजाए मुश्किल का सबब बन गई है। एक के बाद एक लगातार इस तरह की शिकायतें सामने आ रही है जिसमे लोगों की उंगलियों के निशान मैच नहीं होने की वजह से काफी दिक्कतें हो रही हैं। दिल्ली में 40 वर्षीय माया देवी के परिवार के सभी चारों सदस्यों के् फिंगरप्रिंट नही की पहचान नहीं होने की वजह से उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। दरअसल नई योजना के तहत सभी सरकारी राशन की दुकानें अब आधार कार्ड बेस्ड इलेक्ट्रोनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ई-पोस) की शुरुआत की गई है जिसके बाद बिना आधार नंबर के लोगों को राशन नहीं मुहैया कराया जाता है, जिसकी वजह से लोगों का काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक इस मशीन में होने वाली दिक्कत की वजह से 26000 लोगों को राशन नहीं मिल सका है।

 2255 दुकानों में लगी मशीन

2255 दुकानों में लगी मशीन

आधार नंबर होने के बाद भी फिंगरप्रिंट मैच नहीं करने की समस्या ना सिर्फ मायादेवी के परिवार बल्कि कई लोगों को हो रही है। दिल्ली की 2255 राशन की दुकानों पर 1 जनवरी से आधार नंबर की पहचान के लिए मशीन लगाई गई है, जिससे की राशन की दुकानों पर होने वाली धांधली से बचा सके। लेकिन इन मशीनों के कनेक्ट नहीं होने और फिंगर प्रिंट मैच नहीं करने की वजह से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

 लोगों को हो रही दिक्कत

लोगों को हो रही दिक्कत

15 जनवरी तक कई ऐसे लोग हैं जिनको राशन नहीं मुहैया कराया गया, जिसके बाद सरकार की ओर से यह फैसला लिया गया है कि इन लोगों की आंख की पुतली की पहचान की जाएगी और उन्हें राशन मुहैया कराया जाएगा। इस मशीन के जरिए आंख की पुतली की पहचान होने के बाद ओटीपी जेनरेट होगा जिससे की फिंगर प्रिंट मैच नहीं होने की समस्या से निजात मिल जाएगी, लेकिन अभी तक इन राशन की दुकानों पर यह मशीन नहीं लगी है जिसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

चार गुना दाम देने को मजबूर

चार गुना दाम देने को मजबूर

गौरतलब है कि सभी राशन कार्ड धारकों को हर महीने 5 किलो राशन मिलता है। मायादेवी के परिवार में कुल चार सदस्य हैं, लेकिन किसी भी सदस्य को राशन नहीं दिया गया है, जिसकी वजह से उन्हें 16 किलोग्राम गेहूं का नकुसाना उठाना पड़ा है। सरकारी राशन की दुकान से मिलने वाला यह अनाज परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है, घर में काम करने वाला सिर्फ एक ही सदस्य है जोकि हर महीने मुश्किल से 5000 रुपए कमाते हैं। मायादेवी कहती हैं कि मैं शाहपुर की राशन की दुकान पर गई थी, लेकिन मेरा फिंगरप्रिंट मैच नहीं किया जिसकी वजह से मुझे राशन नहीं मिला, जिसके बाद मेरे पति को नौकरी छोड़नी पड़ी और मेरे दोनों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, राशन की दुकान पर जो अनाज 45 रुपए का मिलता था वह बाहर दुकान पर 200 रुपए का मिलता है।

पहले की व्यवस्था थी बेहतर

पहले की व्यवस्था थी बेहतर

एक किलो चावल की कीमत राशन की दुकान पर 3 रुपए है, जबकि यही चावल बाहर 35 रुपए किलो मिलता है, वहीं एक किलो गेंहू की कीमत राशन की दुकान पर 2 रुपए है, जबकि बाहर यही गेंहूं 20 रुपए किलो मिलता है। आपको बता दें कि आधार लिंक्ड फिंगर प्रिंट मशीन को दिल्ली की राशन की दुकानों में 1 जनवरी से लागू किया गया है। दिल्ली के कृष्णा नगर राशन की दुकान में लोगों को घंटो राशन के लिए इंतजार करना पड़ता है क्योंकि यहां मशीन में कनेक्टिविटी की समस्या थी। 50 वर्षीय भगवती का कहा है कि इससे पहले यह व्यवस्था थी कि लोगों का हस्ताक्षर लेने के बाद अनाज दिया जाता था, लेकिन मौजूदा व्यवस्था बिल्कुल बेकार है।

नहीं हो रही है सुनवाई
दिल्ली सरकार ने 97 राशन की दुकानों में पीओएस मशीनें लगवाई हैं, दिसंबर माह में दिल्ली की सरकारी राशन डिलर ने सरकार को एक पत्र लिखा था जिसमे मशीन की कनेक्टिविटी मशीन को लेकर शिकायत की गई थी, साथ ही इसमे कहा गया था कि बड़ी संख्या में लोगों की फिंगर प्रिंट मैच नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमने सरकार से इस बाबत कई शिकायतें की हैं लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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