2017 में आर्कटिक में सर्दियों में अधिकतम और गर्मियों में न्यूनतम तापमान में रिकार्ड गिरावट
इस वर्ष आर्कटिक में बर्फ के फैलाव में रिकार्ड गिरावट दर्ज की गयी है। साथ ही गर्मी में भी वहां के तापमान ने रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की है। यह जानकारी आज क्लाइमेट रिपोर्ट की आर्कटिक से लौटी टीम ने दी है।
नई दिल्ली। आर्कटिक में वसंत ऋतु शुरू होने के साथ अंटार्कटिक में सर्दियां उतार पर आ जाती हैं। आर्कटिक सागर की बर्फ का फैलाव सर्दियों में अपने चरम पर पहुंच जाता है। वहीं अंटार्कटिका में यह विस्तार गर्मियों के अपने न्यूनतम स्तर तक सिकुड़ जाता है। दुनिया के दोनां धु्रव यूं तो वार्षिक चक्र के लिहाज से एक-दूसरे के ठीक विपरीत हैं लेकिन मार्च 2017 में इन दोनों में एक चीज बिल्कुल समान रही वह है समुद्री बर्फ के फैलाव में आयी रिकार्ड गिरावट।

दायीं तरफ दिये गये चित्र में सामुद्रिक बर्फ सैटेलाइट रिकार्ड (1979-2017) के तहत आर्कटिक (शीर्ष) तथा अंटार्कटिक (नीचे) में हर साल 1 जनवरी से 5 मई के बीच समुद्री बर्फ के फैलाव की रेखाओं को दर्शाया गया है। वार्षिक विस्तार की सीमाओं को प्रति दशक के हिसाब से अलग-अलग रंग में दिखाया गया है। जैसे कि 1979-1989 (हरा), 1990 का दशक (नीला-बैंगनी), 2000 का दशक (नीला) तथा 2010 का दशक (मैजंटा)। इस चित्र को एनएसआईडीसी के आइस ग्राफ से लिया गया है। ध्यान देने योग्य बात है कि आर्कटिक तथा अंटार्कटिक के पैमानों में भिन्नता है।

22 मार्च को घोषित किया है डाटा
नेशनल स्नो एण्ड आइस डेटा सेंटर (एनएसआईडीसी) ने 22 मार्च को घोषित किया कि पृथ्वी के दोनों ही ध्रुवों पर समुद्री बर्फ के मौसमी फैलाव में रिकार्ड गिरावट आयी है। आर्कटिक सागर में बर्फ का फैलाव गत सात मार्च को अपने शीतकालीन अधिकतम स्तर यानी 55 लाख 70 हजार वर्ग मील (एक करोड़ 44 लाख 20 हजार वर्ग किलोमीटर) तक पहुंच गया। वहीं, अंटार्कटिक सागर में पिछली तीन मार्च को बर्फ का फैलाव अपने ग्रीष्मकालीन न्यूनतम स्तर यानी 813000 वर्ग मील (21 लाख 10 हजार वर्ग किलोमीटर) पर रहा।
दोनों ही धु्रवों पर समुद्री बर्फ के अधिकतम मौसमी फैलाव में पिछले 38 वर्ष के सैटेलाइट रिकार्ड के दौरान आयी यह सर्वाधिक गिरावट है। आर्कटिक सागर में हिम के अधिकतम विस्तार में वर्ष 2015 और 2016 की न्यूनतम सीमा के मुकाबले और गिरावट आयी है। वर्ष 2015 में आर्कटिक सागर में यह सीमा अधिकतम 56 लाख 5 हजार वर्ग मील (एक करोड़ 45 लाख 17 हजार वर्ग किलोमीटर) और साल 2016 में यह 56 लाख 6 हजार वर्ग मील (एक करोड़ 45 लाख 20 हजार वर्ग किलोमीटर) थी।
2016 के अंत में दिखना शुरू हुआ असर
यह सिकुड़न एक प्रक्षेपवक्र में हो रही है, जो वर्ष 2016 के अंत में तब दिखना शुरू हुआ है, जब पृथ्वी के दोनों धु्रवों पर विचलन की अनुमानित सीमा से कहीं ज्यादा कमी पायी गयी। लेकिन जरूरी नहीं है कि इन दोनों ही धु्रवों पर दिखे बर्फ के विस्तार में गिरावट का एक ही अर्थ हो। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है कि अंटार्कटिक सागर में सर्दियों के दिनों में बर्फ के विस्तार की रेखा हर साल नीचे झुक रही है, जबकि आर्कटिक सागर में बर्फ के विस्तार की रेखा 21वीं सदी के शुरू से ही लगातार नीचे गिरती दिख रही है। ठीक इसी समय वैश्विक तापमान नयी कीर्तिमान ऊंचाइंयों तक पहुंचा है। ग्रीष्मकालीन न्यूनतम हिम फैलाव का निरन्तर रिकार्ड बनाने के बावजूद आर्कटिक सागर में सर्दियों के दौरान इस हिम आच्छादन की खराब प्रतिपूर्ति का दौर दिखना शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत 2004 के करीब हुई थी।
हालांकि अंटार्कटिक में स्थिति बदली हुई है, मगर मौसमी रुख बहुत स्पष्ट नहीं है। रिकार्ड गिरावट के स्तर पर पहुंचने से करीब ढाई साल पहले अंटार्कटिक सागर में बर्फ के फैलाव में काफी बढ़ोत्तरी देखी गयी थी। एनएसआईडीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक टेड स्कमबाॅस का अनुमान है कि वैश्विक जलवायु के रुख का अंटार्कटिक सागर की बर्फ पर कम प्रभाव हो सकता है, और यह दक्षिणी महासागर में होने वाले क्षेत्रीय तथा अल्पकालिक जलवायु बदलावों से अधिक गहराई से जुड़ा है।
मार्च 2017 में उत्तरी तथा दक्षिणी धु्रवों पर समुद्री बर्फ के फैलाव में आयी संयुक्त गिरावट इस साल इस समय रिकार्ड किये गये न्यूनतम फैलाव के स्तर तक या उसके नजदीक तक पहुंच चुकी है। लेकिन अंटार्कटिक के हिम विस्तार में रिकार्ड गिरावट के कारणों को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से निम्न वैश्विक विस्तार का महत्व स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।












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