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हिमालय की सुनामी को हुए एक साल अब भी मिल रहे नर-कंकाल

Kedarnath flood
देहरादून। ठीक एक साल पहले 16-17 जून की रात को उत्तराखंड में केदारनाथ घाटी में जब भोलेनाथ के जयकारे लग रहे थे, तब एक पहाड़ी सुनामी आयी। इस सुनामी में सिर्फ पानी की लहरें नहीं, ग्लेश‍ियर्स और पत्थर भी पानी के साथ बह कर पहाड़ों से नीचे आये। यही नहीं रेत ने पानी को इतना गाढ़ा कर दिया था कि पानी की चपेट में जो भी आया वह अस्तव्यस्त हो गया।

अगर सरकारी आंकड़ों पर विश्वास रें तो इस तबाही में करीब 3800 लोग मारे गये, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है इस त्रासदी में कम से कम 10 हजार लोग मारे गये। हजारों लोगों के शव पानी के तेज बहाव में सैंकड़ों किलोमीटर दूर तक बह गये। कई शाव तो इलाहाबाद और वाराणसी तक में भी बरामद हुए।

मौत के आगोश में सो गये लोगों से भयावह समय उन लोगों के लिये था, जो जिंदा बच गये, लेकिन उनके लिये मदद नहीं पहुंची। भयावह मंजर देखने के बाद लोग जब मदद के लिये पुकार लगाते रहे और पहाड़ों के सन्नाटे में उनकी आवाज दफन हो गई, तब वो वहीं पेड़पत्ती पर जिंदा रहे, लेकिन भूख ने उनकी जिंदगी ले ली। असल में ये वो लोग थे, जिनके शव आज भी पहाड़ों के बीच मिल रहे हैं।

केदार घाटी में मिले 17 कंकाल

रुद्रप्रयाग के एसपी बरिंद्रजीत सिंह ने बताया है कि कल ही घाटी में 17 नरकंकाल मिले हैं। ये कंकाल जंगलचट्टी से बरामद हुए हैं। डीएनए सैम्पल लिये जाने के बाद इन सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इन शवों के बरामद होने के बाद सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। अब तक कुल 35 नरकंकाल मिल चुके हैं। इस सर्च ऑपरेशन की बागडोर आईजीपी संजय गुजयाल को सौंपी गई है।

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