हिमाचल चुनाव 2017: सीट नंबर 61 ठियोग (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
शिमला। ठियोग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 61 है। शिमला जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 74,060 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में विद्या इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। ठियोग कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस में खासे विवाद के केन्द्र में रहा। स्थानीय लोगों में विधायक विद्या स्टोक्स के खिलाफ खासा गुस्सा देखा गया। चूंकि उन्होंने शुरू में लोगों के गुस्से को भांपा ही नहीं। यही वजह है कि इस बार उन्होंने शुरू से ही चुनाव लडऩे के लिये मनाही कर दी।

ठियोग चुनाव क्षेत्र इसलिये सुर्खियों में है कि यहां की मौजूदा विधायक चुनाव नहीं लडऩा चाहतीं। हालांकि उनका टिकट कटा भी। लेकिन बाद में अब फिर उन्हें टिकट दे दिया गया है। ठियोग विद्या स्टोक्स की कर्मभूमि रही है। लेकिन इस बार यहां बढ़ती उम्र के चलते उनमें वह करिशमा नहीं रहा। एक ओर भाजपा के राकेश वर्मा तो दूसरी ओर माकपा नेता राकेश सिंघा ने उन्हें घेरा है। यहां के लोग साधन संपन्न हैं। करोड़ों में उनकी सालाना आमदन होती है। जिनके लिये जातिवाद कोई मायने नहीं रखता। यह लोग व्यक्तिव पर ही मतदान करते आये हैं। इस बार देखना होगा कि विद्या स्टोक्स के प्रति सेब लाबी कोई सहानुभूति दिखाती भी है कि नहीं।
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ठियोग से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 विद्या स्टोक्स कांग्रेस
2007 राकेश वर्मा निर्दलीय
2003 राकेश वर्मा निर्दलीय
1998 विद्या स्टोक्स कांग्रेस
1993 राकेश वर्मा भाजपा
1990 विद्या स्टोक्स कांग्रेस
1985 विद्या स्टोक्स कांग्रेस
1982 विद्या स्टोक्स कांग्रेस
1977 मेहर सिंह चौहान जनता पार्टी

विद्या स्टोक्स की राजनिति में अलग पहचान रही है
मशहूर अमेरिकी नागरिक सत्यानंद स्टोक्स की बहू विद्या स्टोक्स को ठियोग ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की राजनिति में सम्मान की नजर से देखा जाता रहा है। शिमला जिला में अगर आज सेब की पैदावार होती है, तो यह स्टोक्स परिवार की ही देन है। राजनेता से ज्यादा उनकी पहचान समाज सेवी के रूप में अधिक रही है। विद्या स्टोक्स का जन्म (8 दिसंबर 1927) को शिमला जिले के कोटगढ़ में हुआ। वह हिमाचल प्रदेश विधान सभा में 1982, 1985, 1990, 1998, 2003, 2007 और 2012 में निर्वाचित सदस्य रही है। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्य है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक है। लेकिन अपनी बढ़ती उम्र के चलते इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लडऩे का फैसला लिया । लेकिन बात नहीं बनी।












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