हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 43 हरोली (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिए
शिमला। हरोली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 43 है। ऊना जिला में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। यह क्षेत्र साल 2008 में, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के अनुसरण में अस्तित्व में आया। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 72,225 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में मुकेश अग्निहोत्री इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। डिलिमिटेशन से पहले हरोली को संतोषगढ़ विधानसभा चुनाव क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता था। हरोली विधानसभा क्षेत्र में शुरू से ही ब्राह्मणों में जंग होती रही। भाजपा और कांग्रेस से हर बार ब्राह्मण प्रत्याशी ही मैदान में उतारे गए। इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतार कर जंग जीत ली थी।

हरोली विस क्षेत्र का प्रदेश की राजनीति में भी अहम रोल रहा है। पुनर्सीमांकन के बाद इस हलके का नाम हरोली रखा गया है। इससे पूर्व यह हलका संतोषगढ़ विधानसभा क्षेत्र से जाना जाता था। पुनर्सीमांकन के बाद अब संतोषगढ़ इलाका ऊना हलके में शामिल हो गया है। इस हलके से 1966 से लेकर विद्यासागर जोशी, कश्मीरी लाल जोशी, विजय जोशी विधायक रहे। 1998 में जय कृष्ण शर्मा भाजपा से चुनाव जीते तथा विधायक बने। जयकृष्ण शर्मा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। इनके बाद 2003 और 2007 में कांग्रेस से मुकेश अग्निहोत्री दो बार लगातार चुनाव जीते। अगिनहोत्री के खिलाफ पिछली बार भाजपा से हालांकि जाट नेता जगरूप सिंह मैदान में थे, लेकिन वे अग्निहोत्री को कड़ी टक्कर देने में कामयाब रहे थे। विजय जोशी इस हलके से चार बार विधायक बने तथा प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। हलके में हर बार ब्राह्मणों में ही जंग होती रही और ब्राह्मणों का ही कब्जा रहा।
हरोली (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र एक नजर में
जिला: ऊना
लोकसभा चुनाव क्षेत्र : हमीरपुर
मतदाता: 76,907
जनसंख्या (2011) : 1,08,279
साक्षरता : 70 प्रतिशत
अजिविका: खेती बाड़ी,परंपरागत काम धंधा
शहरीकरण: ग्रामीण

वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 मुकेश अग्निहोत्री कांग्रेस

मुकेश अग्निहोत्री किस्मत के धनी हैं। पेशेवर पत्रकारिता को छोड़ उन्होंने राजनिति को अपनाया तो कामयाब होते गये। पंजाब के जिला संगरूर में जन्में 55 वर्षीय मुकेश पोस्ट ग्रेजूयेट हैं। उनकी एक बेटी है। शिमला में जनसत्ता के संवाददाता के तौर पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई । बाद में दिल्ली में तैनाती मिली तो सपंर्कों को फायदा भी मिला और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें टिकट दिया। और 2003 में पहली बार संतोखगढ़ से विधायक चुने गये। उसके बाद 2007 में दोबारा चुने गये। 2008 में डिलिमिटेशन में संतोखगढ़ हरोली चुनाव क्षेत्र बन गया व मुकेश 2012 में हरोली से चुनाव जीते। वीरभद्र सरकार में उद्योग , सूचना एवं जन संपर्क और संसदीय कार्य मंत्री बने। मुकेश प्रदेश के नेता के तौर पर उभर नहीं पाये। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ज्यादातर समय अपने हल्के में ही बिताया। व हरोली के दायरे से बाहर नहीं निकल पाये।












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