Himachal Elections 2022: शिमला सीट पर तिकोने मुकाबले के आसार, भाजपा-कांग्रेस पर कामरेड पड रहे भारी
Himachal Elections 2022: शिमला सीट पर तिकोने मुकाबले के आसार, भाजपा-कांग्रेस पर कामरेड पड रहे भारी
Himachal Elections 2022: शिमला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र यूं तो वामपंथी गतिविधियों का केंद्र रहा है। लेकिन यहां भाजपा ही चुनाव जीतती रही है। इस बार तिकोने मुकाबले में भाजपा के लिए यहां चुनाव जीतना किसी करिश्मे से कम नहीं होगा। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हरीश जनारथा और माकपा प्रत्याशी टिकेंद्र सिंह पंवर के मुकाबले भाजपा प्रत्याशी संजय सूद चर्चित चेहरे नहीं हैं। हालांकि, पीएम मोदी से पहचान और अपने चाय बेचने के धंधे की वजह से संजय सूद ने पिछले दिनों खासी सुर्खियां बटोरी हैं।

शिमला सदर सीट हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 63 है। शिमला जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2017 के विधानसभा चुनाव में सुरेश भारद्वाज इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। लेकिन, भाजपा ने उन्हें इस बार कुसमटी चुनाव क्षेत्र में भेजा, तो पार्टी के पुराने कार्यकर्ता चाय बेचने वाले संजय सूद को मैदान में उतारा गया। सुरेश भारद्धाज को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही थी। जिसके चलते भाजपा ने उनका चुनाव क्षेत्र बदला है। भाजपा ने संजय सूद को मैदान में उतारा है।
सन् 1864 में इस जगह को ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था। स्वतंत्रता के बाद यह जगह कुछ समय तक पंजाब की राजधानी भी रही। बाद में शिमला को हिमाचल प्रदेश की राजधानी बना दिया गया। रिज से लेकर स्कैंडल पॉइंट और माल रोड शिमला की शान हैं। जाखू मंदिर भगवान 'हनुमान' को समर्पित है। कर्नल जे.टी. बोइल्यू द्वारा डिज़ाइन की गई खूबसूरत क्राइस्ट चर्च यहां की पहचान है। शिमला प्राचीन विरासत इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, जो ब्रिटिश वास्तुकला शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं।
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राजनीतिक नजरिए से देखा जाये, तो शिमला में अधिकतर मतदाता बाहरी हैं। जो दो गुटों में बंटे रहते हैं। एक अप्पर शिमला का तो दूसरा लोअर हिमाचल के लोगों का। लोअर हिमाचल के यहां रहने वाले अधिकतर मतदाता भाजपा को समर्थन देते आए हैं। यहां दिलचस्प तथ्य यह है कि जब भी यहां वामपंथी अंदोलन हुए, उस दौरान हमेशा ही कांग्रेस पार्टी को नुक्सान होता रहा है। वामपंथियों के संघर्ष का अंत में भाजपा को फायदा मिला है। पिछली बार कोटखाई प्रकरण के चलते वामपंथियों का उग्र अंदोलन के चलते अप्पर शिमला में कांग्रेस को खासा नुकसान हुआ था।
इस बार वामपंथी अंदोलन तो शिमला में नहीं हुआ, लेकिन माकपा के टिकेंद्र पंवर ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। टिकेंद्र पंवर शिमला नगर निगम के डिप्टी मेयर रह चुके हैं। वर्ष 2012 में नगर निगम में मेयर व डिप्टी मेयर के लिए हुए सीधे मुकाबलों में यह दोनों पद माकपा की झोली में गए थे। शिमला शहरी सीट पर माकपा वर्ष 1993 में परचम लहरा चुकी है। यहां भाजपा ने चाय बेचने वाले अपने पुराने कार्यकर्ता संजय सूद पर भरोसा जताते हुए उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व डिप्टी मेयर हरीश जनारथा को मौका दिया है। हरीश जनारथा पिछले दो विधानसभा चुनाव करीबी मतों से हार गए थे।
शिमला से अभी तक चुने गए विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2017 सुरेश भारद्धाज भाजपा
2012 सुरेश भारद्वाज भाजपा
2007 सुरेश भारद्वाज भाजपा
2003 हरभजन सिंह भज्जी कांग्रेस
1998 नरेंदर बरागटा भाजपा
1993 राकेश सिंघा भाकपा
1990 सुरेश भारद्वाज भाजपा
1985 हरभजन सिंह कांग्रेस
1982 दौलत राम चौहान भाजपा
1977 दौलत राम चौहान जनता पार्टी












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