हिमाचल सरकार को कर्मचारी महासंघ की चेतावनी, स्टाफ की अनदेखी की तो परिणाम भुगतने को तैयार रहे
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ ने वर्तमान में विरोध प्रदर्शन कर रहे सचिवालय कर्मचारियों के प्रति अपना समर्थन जताया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने लंबित महंगाई भत्ते और एरियर जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि सचिवालय कर्मचारियों की मांगें जायज हैं और सरकार को उनकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
चौहान ने कहा, 'सरकार और कर्मचारियों के बीच समन्वय होना चाहिए। सरकार को सचिवालय कर्मचारियों से बात करनी चाहिए। वह उनकी मांगों को अनदेखा नहीं कर सकती।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछली सरकारों ने कर्मचारियों की चिंताओं की अनदेखी नहीं की।

राज्य सरकार ने हाल ही में सचिवालय कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ये नोटिस सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के जवाब में दिए गए हैं। इसके बावजूद सचिवालय कर्मचारियों ने धमकी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे अपना विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे।
सचिवालय कर्मचारियों ने विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद 9 सितंबर तक सामूहिक अवकाश पर रहने का फैसला किया है। वे बकाया वेतन और महंगाई भत्ते की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि इसका भुगतान काफी समय से नहीं हुआ है।
पेंशन योजनाओं पर चिंताएं
चौहान ने एकीकृत पेंशन योजना (UPS) की भी आलोचना की और कहा कि यह राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से कम लाभकारी है। उन्होंने तर्क दिया कि कर्मचारी दान नहीं, बल्कि अपने काम के लिए उचित पारिश्रमिक चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 4.85 लाख कर्मचारी और पेंशनभोगी हैं, जो सरकार से उचित व्यवहार के हकदार हैं। उनकी मांगों की अनदेखी करने से राज्य की सत्ताधारी सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
भाजपा नेता जय राम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत पर चिंता जताई है। ठाकुर ने दावा किया है कि राज्य ने 20 महीनों में 24,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह उधारी जारी रही तो वित्त वर्ष के अंत तक राज्य का कर्ज 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को बढ़ते कर्ज के कारण जल्द ही अपने कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत हो सकती है। इस वित्तीय संकट के कारण सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
चौहान ने मौजूदा प्रशासन से कर्मचारियों की शिकायतों को प्रभावी ढंग से दूर करने के लिए उनके साथ बातचीत करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा मुद्दों को सुलझाने के लिए सरकार और कर्मचारियों के बीच सहयोग जरूरी है।












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