शिमला ग्रामीण सीट पर हैं सबकी नजरें, पिता वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे विक्रमादित्य
शिमला ग्रामीण सीट पर हैं सबकी नजरें, पिता वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे विक्रमादित्य
Himachal Election 2022: 33 वर्षीय विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। पिछले बार विक्रमादित्य सिंह ने शिमला ग्रामीण से चुनाव जीता था। कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह को आम तौर पर लोग टिका यानी 'राजकुमार' कह कर बुलाते हैं। बता दें, विक्रमादित्य सिंह प्रदेश में छह बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह के बेटे हैं और रामपुर बुशहर रियासत के वारिस है। विक्रमादित्य सिंह पर अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढाने की जिम्मेवारी है और उनके चुनाव पर हर किसी की नजर बनी हुई है। लेकिन, अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने से पहले उन्होंने 17 अक्टूबर को अपने शक्ति प्रदर्शन किया।
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हिमाचल कांग्रेस के युवा चेहरों में शुमार विक्रमादित्य सिंह का जन्म 17 अक्टूबर 1989 को हुआ था। विक्रमादित्य ने शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से शिक्षा ली, 2007 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से हिस्ट्री ऑनर्स में बीए किया। उन्होंने अपनी डिग्री हासिल करने के बाद 2013 में युवा कांग्रेस संगठन ज्वाइन किया और बाद में प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 2017 के चुनावों में उनके पिता वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण सीट के बजाये अर्की से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। तो शिमला ग्रामीण से विक्रमादित्य सिंह चुनाव मैदान में उतरे। परिणाम आते ही उस समय नया इतिहास बन गया, जब विधानसभा में पिता पुत्र ने एक साथ विधायक की शपथ ली। लेकिन 2021 में वीरभद्र सिंह के निधन के बाद विक्रमादित्य सिंह इस बार अपने पिता की गैरमौजूदगी में चुनाव मैदान में उतरे हैं।
पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह रहे बलबीर टेगटा बताते हैं कि रानी प्रतिभा सिंह हों या टिका विक्रमादित्य सिंह, उनके प्रति लोगों में सम्मान देखा जाता रहा है। लोगों का मानना है कि वीरभद्र सिंह के वंशज प्रदेश को नई दिशा देने की ताकत रखते हैं। वह बताते हैं कि शिमला ग्रामीण से विक्रमादित्य सिंह को काई चुनौती किसी से नहीं मिल रही है। उनका आराम से चुनाव जीतना तय है, लेकिन वह कितनी लीड के साथ जीतते हैं, उसका एक महत्व है। बलबीर टेगटा कहते हैं कि बुशहर रियासत के वारिस विक्रमादित्य सिंह से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। वह हर हिमाचल वासी के हितों की लड़ाई लड़ते रहे हैं और अपने पिता राजा वीरभद्र सिंह के सपनों के हिमाचल को नई बुलंदियों पर पहुंचाने में प्रयासरत हैं। विक्रमादित्य सिंह इस समय प्रदेश कांग्रेस के महासचिव हैं और युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। वो युवाओं के हक में आवाज बुलंद करते रहे हैं। अपने भाषणों में शिक्षा, रोजगार की बात करते हैं और स्थानीय स्तर पर काम धंधे को बढ़ावा देने की बात भी करते हैं।
17 अक्टूबर को अपने जन्मदिन पर जारी किए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि मेरे पिता के निधन के बाद हिमाचल के लोग ही मेरा परिवार है। हम प्रदेश के लोगों के सुख दुख के साथ खड़े हैं और खडे रहेंगे। खुद विक्रमादित्य सिंह बताते हैं कि प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। यह बड़ी समस्या है। हिमाचल की बडी आबादी युवा है। यह आबादी बेरोजगार है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने पिछले पांच सालों में युवाओं की ओर सोचा तक नहीं। लाखों लोग परेशान हैं। मजबूरी में बडी तादाद में युवा प्रदेश से बाहर नौकरी की तलाश में पलायन कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी अब ऐसा नहीं होने देगी। हम पलायन को राकेंगे। सरकार बनते ही रोजगार के अवसर पैदा किए जायेंगे। यह हमारा चुनावी वादा भी है।
खेलों और समाज सेवा में खास रुचि रखने वाले, विक्रमादित्य सिंह हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स, कल्चर ऐंड एनवायरमेंट एसोसिएशन के नाम से एक एनजीओ चलाते हैं। यह संगठन क्रिकेट और वॉलीबॉल टूर्नामेंट कराने के अलावा पर्यावरण जागरूकता का काम करता है। वह शूटिंग में हिमाचल का नेशनल लेवल पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने 2007 के ट्रैप शूटिंग कॉम्पिटीशन में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था।












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