चुनाव को लेकर हिमाचल कांग्रेस के गुटों में मारामारी का माहौल, गुटबाजी नहीं खत्म पा रहीं अध्यक्ष प्रतिभा सिंह

शिमला, 6 जून। कांग्रेस आलाकमान की ओर से हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने के प्रयास नाकाम साबित हुये हैं। प्रदेश कांग्रेस अब कई गुटों में बंट गई है। आलम यह है कि आने वाले चुनावों में नेताओं की ओर से अपने समर्थकों को संगठन में तरजीह देने से गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। कई नेताओं ने प्रतिभा सिंह से मुंह फुला कर पार्टी बैठकों से किनारा कर लिया है। अपनी डफली अपना राग के इस माहौल में चुनावों से पहले ही पंजाब की तरह हिमाचल में भी कांग्रेस में टूट का खतरा पैदा होने लगा है। दरअसल, हिमाचल कांग्रेस इन दिनों इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से मुकाबला करने के लिये रणनीति बनाने में जुटी है। लेकिन जिस तरीके से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने संगठन में अपने समर्थकों को ओहदेदारियां बांटी हैं। उससे पार्टी में विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

Himachal congress divided in groups before Himachal election

यही वजह रही कि शनिवार को खुद सांसद प्रतिभा सिंह को किन्नौर में पार्टी बैठक में विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जब स्थानीय विधायक जगत सिंह नेगी व युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निगम भंडारी की आपस में तू-तू मैं-मैं हो गई। मामला इस कदर भड़का कि हाथापाई तक की नौबत आ गई। लेकिन मामला शांत कराया गया। बताया जा रहा है कि बैठक में विधायक जगत सिंह नेगी ने युवा कांग्रेस को भाजपा की बी टीम तक कह डाला। कहा कि भंडारी भाजपा के एजेंट बनकर कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। बैठक में इस मामले पर हंगामा देखने को मिला। किन्नौर में अगले चुनावों में टिकट की लड़ाई अभी से शुरू हो गई है जिससे पार्टी में गुटबाजी उभर कर सामने आने लगी है।

Himachal congress divided in groups before Himachal election

आरोप लगाया जा रहा है कि पार्टी में अरसे से जुड़े लोगों को नजरअंदाज कर अपने चंद चहेतों को ही तरजीह दी जा रही है। इससे पहले शिमला में दो दिनों तक चली बैठक जिसकी अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने की, उसमें भी विरोध के स्वर देखने को मिले। पार्टी में इन दिनों हाल ही में उदयपुर में संपन्न नव चिंतन शिविर के प्रस्तावों को अमली जामा पहनाने की कसरत चल रही है। लेकिन इससे पहले कि इस मामले में कोई ठोस निर्णय सामने आता, उससे पहले ही प्रतिभा सिंह ने अपने चहेतों की नियुक्तियां कर दीं। जिनमें ज्यादातर वही लोग हैं, जो पिछला चुनाव बुरी तरह हार चुके हैं और सालों से संगठन पर कब्जा जमाये बैठे हैं। पार्टी नेता मानते हैं कि इस तरीके से आप बार-बार हारने वालों को एक बार दोबारा टिकट भले ही दे सकते हैं, लेकिन चुनावी जीत कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर आसान नहीं होगी।

Himachal congress divided in groups before Himachal election

प्रतिभा सिंह की शिमला बैठक में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उनकी बैठक में पार्टी के दस विधायक शामिल ही नहीं हुये जिसमें पार्टी के चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू, आशा कुमारी, पवन काजल, जगत सिंह नेगी, रोहित ठाकुर, अनिरुद्ध ठाकुर, लखविन्दर सिंह राणा, संजय अवस्थी, सुंदर ठाकुर, संजय रायजादा शामिल रहे। बताया जा रहा है कि यह विधायक इन दिनों प्रतिभा सिंह से इस बात को लेकर नाराज हैं , कि संगठन में उनके समर्थकों को तरजीह नहीं दी जा रही है।

Himachal congress divided in groups before Himachal election

इस बैठक में चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू की गैरमौजूदगी स्पष्ट तौर पर बता रही है कि पार्टी में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी आलाकमान की ओर से हाल ही में किये गये बदलाव से गुटबाजी कम नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि सुक्खू और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बीच हमेशा ही रिशतों में खटास रही । जिससे अब उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के साथ चुनावी साल में सौहार्दपूर्ण रिश्ते नहीं बन पा रहे हैं। चुनावी साल में प्रतिभा सिंह व सुक्खू के बीच चल रही तनातनी का नुक्सान पार्टी को उठाना पड़ सकता है। पार्टी नेताओं में टिकट को लेकर अभी से मारामारी का महौल तैयार होने लगा है। कई नेताओं का मानना है कि इस बार प्रतिभा सिंह उदयपुर संकल्प के बहाने अपने विरोधियों को निशाना बनाकर उनके टिकट कटवा सकती हैं। इसी के चलते शिमला बैठक में भी कई नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

पार्टी के नेता हैरान है कि पार्टी के अंदर किये गये बदलाव में नई बनी प्रतिभा सिंह की टीम में पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर अपने चहेतों को ही तरजीह दी गई है। और अरसे से पार्टी को सर्वस्व देने वाले कार्यकर्ता की घोर अनदेखी की गई है। हैरानी जताई जा रही है कि प्रतिभा सिंह की टीम में शिमला जिला को ही तरजीह मिली है। और ज्यादातर ओहदेदार शिमला से ही बनाये गये है। जबकि प्रदेश में 12 जिला है। अकेले जुब्बल कोटखाई चुनाव क्षेत्र से 17 पदाधिकारी नये संगठन में बनाये गये हैं। जबकि रोहडू से सात पदाधिकारी बनाये गये हैं। प्रतिभा सिंह की नियुक्तियों को लेकर पार्टी के ही लोग सवाल उठा रहे हैं। व कहा जा रहा है कि पार्टी अब भी अपने अतीत से कोई सबक नहीं ले पा रही है। जिससे आम आदमी पार्टी और भाजपा से मुकाबला करने के लिये महौल नहीं बन पा रहा है। पार्टी के एक नेता ने बताया ि क इस तरीके से कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर सकती। पार्टी को जातिगत व क्षेत्रीय संतुलन कायम करने के साथ युवा चेहरों को आगे लाना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो पंजाब की तरह हिमाचल में भी कांग्रेस नेता पार्टी को छोड़ दूसरे दलों में चले जायेंगे।

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