Himachal: कांग्रेस मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं आशा कुमारी, चुनावी नतीजों पर टिका है उनका राजनीतिक भविष्य
Himachal: कांग्रेस मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं आशा कुमारी, चुनावी नतीजों पर टिका है उनका राजनीतिक भविष्य
Himachal Pradesh Assembly Elections में इस बार चंबा जिला की डलहौजी सीट पर कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से मौजूदा विधायक आशा कुमारी को मैदान में उतारा है। प्रदेश में 2008 में हुए विधानसभा परिसीमन के दौरान बनीखेत चुनाव क्षेत्र को डलहौजी नाम मिला। इस दौरान बनीखेत की नौ पंचायतें भटियात में गई, तो दो चुराह में शामिल की गईं। उसके बाद इसे डल्हौजी के नाम से ही पुकारा और पहचाना जाता है। धौलाधार और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के बीच बसा डलहौजी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र एक बहुत की खूबसूरत पर्यटक स्थल है। पांच पहाड़ों पर स्थित यह हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत पर्यटक स्थल है।

विधानसभा परिसीमन के बाद बनीखेत के सलूणी तहसील, भलेई सब तहसील, शेरपुर, मनोला भटोली, रूल्याणी, बाथरी, डलहौजी नगर व बनीखेत और डलहौजी कैंट व तहसील डलहौजी को मिलाकर डलहौजी विधानसभा चुनाव क्षेत्र बना। हालांकि, यह सीट अनारक्षित है, लेकिन यहां के गद्दी व गुज्जर मतदाता जब जब एक हुए हैं। तब तक उम्मीदवारों का भविष्य बदला है। अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भी यहां अछी खासी तादाद है। खासकर इलाके का सलूणी, किहार व भांदल इलाके के गुज्जर मतदाता ने यहां के नेताओं की हमेशा ही तकदीर लिखी है। यह हिस्सा जम्मू कश्मीर की सीमा से सटा है।
प्रदेश विधानसभा की सीट नंबर चार अनारक्षित है। कांग्रेस पार्टी के आशा कुमारी के मुकाबले यहां से पिछला चुनाव हारे डी.एस. ठाकुर उम्मीदवार हैं और आम आदमी पार्टी ने मनीष सरीन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पिछली बार यहां से आशा कुमारी को बेहद कम अंतर से जीत मिली थी। यही वजह है कि इस बार कांग्रेस पार्टी की राहें यहां आसान नहीं हैं। छत्त्तीसगढ़ की बेटी और चंबा राज परिवार की बहू, डल्हौजी की विधायक आशा कुमारी का स्थानीय राजनिति में खासा दबदबा रहा है। जो आज भी बरकरार है। मध्य प्रदेश के पूर्व चीफ सेक्रेटरी मादनेशवर सिंह की बेटी 67 वर्षीय आशा कुमारी 19 अप्रैल 1979 को चंबा के राजा विजेंद्र सिंह से परिणय सूत्र में बंधी उनकी एक बेटी है।
कांग्रेस पार्टी के विभिन्न पदों पर काम कर चुकी हैं। आशा पहली बार हिमाचल विधानसभा के लिए 1985 में विधायक चुनी गईं। उसके बाद 1993,1998 और 2003 में भी बनीखेत से विधायक बनीं। हालांकि, 2007 में वह चुनाव हारीं भी। उसके बाद बनीखेत का नाम डल्हौजी हो गया तो डलहौजी से पांचवीं बार विधायक चुनी गईं। छठी बार 2017 में चुनी गईं। इस बीच आशा कुमारी 1995 से 1998 और 2003 व 2005 के बीच के बीच हिमाचल सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहीं। आज आशा कुमारी का रूतबा प्रदेश की राजनिति में बढ़ा है। उन्हें कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में समझा जाता है, लेकिन अब आशा कुमारी पर स्थानीय राजनिति में पूरा समय न देने का आरोप भी लगता रहा है। जिससे इस बार उन्हें अपने ही चुनाव क्षेत्र में ही रहना पड रहा है।
डलहौजी निर्वाचन क्षेत्र से अब तक चुने गये विधायक
01- 1967 देश राज कांग्रेस
02- 1972 देश राज कांग्रेस
03- 1977 ज्ञान चंद जनता पार्टी
04- 1982 देश राज महाजन कांग्रेस
05- 1990 गंधर्व सिंह जनता पार्टी
06- 1993 आशा कुमारी कांग्रेस
07- 1998 आशा कुमारी कांग्रेस
08- 2003 आशा कुमारी कांग्रेस
09- 2007 रेणू चड्डा भाजपा
10- 2012 आशा कुमारी कांग्रेस
11- 2017 आशा कुमारी कांग्रेस
कैसे बना डलहौजी
अंग्रेजों ने 1854 में इसे बसाया और विकसित किया तथा तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डलहौजी के नाम पर इस जगह का नाम डलहौजी रखा गया। अंग्रेज सैनिक और नौकरशाह यहां अपनी गर्मी की छुट्टियां बिताने आते थे। लॉर्ड डलहौजी भारत में ब्रिटिश राज का गवर्नर जनरल था 1848 ई. में लॉर्ड डलहौज़ी, जिसे 'अर्ल ऑफ़ डलहौज़ी' भी कहा जाता था, गवर्नर-जनरल बनकर भारत आया। उसका शासन काल आधुनिक भारतीय इतिहास में एक स्मरणीय काल रहा क्योंकि उसने युद्ध व व्यपगत सिद्धान्त के आधार पर अंग्रेज़ साम्राज्य का विस्तार करते हुए अनेक महत्त्वपूर्ण सुधारात्मक कार्यों को सम्पन्न किया।












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