रिश्वतखोरी केस में विवादों में घिरे हिमाचल सीएम वीरभद्र व उनके मंत्री
रिश्वतखोरी में गिरफ्तार हुए उद्योग विभाग में तैनात ज्वाइंट डायरेक्टर के ऑडियो रिकॉर्डिंग से बड़े खुलासे हुए हैं। सीबीआई मामले की जांच में जुटी है।
शिमला। सीबीआई की ओर से हिमाचल के बद्दी स्थित उद्योग विभाग के कार्यालय में तैनात ज्वाइंट डायरेक्टर तिलकाराज को 5 लाख रुपए रिश्वत लेते पकड़ा गया। उनकी गिरफ्तारी के मामले ने प्रदेश सरकार की खूब किरकिरी की है। यही वजह है कि सरकार इस मामले पर कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। आरोपी ने प्रदेश के अधिकारीयों व नेताओं और पत्रकारों तक के नाम उगले हैं, जिन तक सीबीआई जल्द ही पहुंचेगी।

विवादों में सीएम और कैबिनेट मंत्री
विवादों में घिरे अधिकारी ने सीबीआई के सामने पूछताछ में जो कुछ उगला है उससे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनके कबीना के उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी विवादों में फंस गये हैं। उद्योग मंत्री के खासमखास इस अधिकारी पर सरकार पूरी तरह मेहरबान थी। उसकी अपने विभाग में इतनी तूती बोलती थी कि उसके बड़े अधिकारी भी उससे डरते थे। कैपिटल सब्सिडी दिलाने के नाम पर वह खुलेआम उद्योगपतियों से पैसा लेता रहा। लेकिन इस बार पकड़ा गया तो उसे संरक्षण देने वाले भी अब खामोश हैं। बताया जा रहा है कि तिलकराज ने रिश्वत में जो पैसा लिया वह पैसा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निजी सचिव को जाना था।

ऑडियो रिकॉर्डिंग से बड़ा खुलासा
पांच लाख रिश्वत लेने में फंसे ज्वाइंट डायरेक्टर की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग से बड़ा खुलासा हुआ है। रिश्वत की डील के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी की बातचीत की रिकॉर्डिंग से खुलासा हुआ है कि संयुक्त निदेशक को दिल्ली के एक वकील तक बतौर फीस 35 लाख रुपये पहुंचाने थे जो हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का केस लड़ रहा है। आरोपी ने इसके लिए उस नेता के पीएस का फोन आने की बात भी कही थी और कहा कि वह चाहे तो उनकी बात भी उससे करा सकते हैं।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच में बद्दी के एक उद्योगपति से दस लाख की रिश्वत मामले के तार नई दिल्ली स्थित हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कार्यालय से जुड़ते दिख रहे हैं। रिकार्डिंग में यह तथ्य सामने आया है कि तिलकराज ने शिकायतकर्ता से कहा था कि पहली किश्त के पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दिल्ली कार्यालय में तैनात निजी सचिव पीएस रघुवंशी को जाएंगे। बता दें कि सीबीआई ने पूरी प्लानिंग के तहत तिलकराज को रंगे हाथ पकड़ा है। एजेंसी ने ट्रैप से पहले शिकायतकर्ता को डील फाइनल करने के बहाने अधिकारी और बिचौलिए का काम कर रहे उद्योगपति अशोक राणा के पास भेजा।

सीबीआई की जांच के दायरे में सीएम ऑफिस
27 मई को जांच एजेंसी ने डिजिटल वाइस रिकॉर्डर और स्पाई वीडियो कैमरे के साथ शिकायतकर्ता को चंडीगढ़ स्थित एक हेयर सैलून में दोनों से मिलने भेजा। तीनों के बीच हुई रिकार्डिगिं को जांचने के बाद 29 मई को तिलकराज और 30 मई को अशोक राणा को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में रिकार्डिगिं का उल्लेख किया गया है, जिसमें साफ तौर पर तिलकराज ने शिकायतकर्ता से घूस के दस लाख रुपयों को दो किश्तों में देने को कहा था। पहली किश्त सोमवार तक देनी थी जबकि दूसरी किश्त बाद में दी जानी थी। खास बात यह है कि आरोपी संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा ने पीडि़त चंद्रशेखर से कहा था कि पहली किश्त के पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री के दिल्ली कार्यालय में तैनात निजी सचिव पीएस रघुवंशी को जाएंगे।
हालांकि, चंद्रशेखर ने जब रकम ज्यादा होने की बात कहते हुए टालमटोल करने का प्रयास किया तो तिलक राज ने घूस न देने पर चंद्रशेखर को फैक्टरी गिरवाने और बिजली कटवाने तक की धमकी दी थी। साथ ही यह भी कहा था कि अगर वह अभी नहीं माना तो बाद में उसे पचास लाख रुपये तक चुकाने पड़ जाएंगे। मुख्यमंत्री के दिल्ली स्थित कार्यालय में तैनात कर्मचारी का जांच में नाम सामने आने के बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री कार्यालय चर्चा में आ गया है। सूत्रों के अनुसार मामले की जांच में दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय भी सीबीआई की जांच के दायरे में आ सकता है।

धूमल ने सीएम से मांगा इस्तीफा
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम धूमल और सतपाल सिंह सत्ती ने सीबीआई के प्रदेश उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक रिश्वत कांड में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता के आरोपों को बेहद गंभीर करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का मुखिया भ्रष्टाचार के आरोपों पर जमानत पर चल रहा हो, वहां के कर्मचारियों का भ्रष्टाचार में संलिप्त होने साथ मामले के तार सीएम कार्यालय से जुडऩे का मसला अतिगंभीर है। ऐसे स्थिति में सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।












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