हिमाचल उपचुनाव में मिली हार के बाद क्या मुख्यमंत्री बदलेगी भाजपा, गुजरात-उत्तराखंड की तरह हो सकता है परिवर्तन
हिमाचल उपचुनाव में मिली हार के बाद क्या मुख्यमंत्री बदलेगी भाजपा, गुजरात-उत्तराखंड की तरह हो सकता है परिवर्तन
शिमला, 03 नवंबर: हिमाचल प्रदेश में हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिसमें सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। यहां की एक संसदीय सीट और तीन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सभी पर कांग्रेस ने बाजी मारी, जबकि बीजेपी जीत के लिए तरसती रही। उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश में भी एक चर्चा ने काफी जोर पकड़ लिया है। दरअसल, उपचुनाव से पहले गुजरात, कर्नाटक और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बदले गए थे, तो वहीं अब हिमाचल में भी पुनरावृति न हो जाए।

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उपचुनाव के बाद हिमाचल में नेतृत्व परिवर्तन की एक नई चर्चा छिड़ गई है। कुछ नेता तो यह अनुमान लगा रहे हैं कि आलाकमान जल्द ही प्रदेश के नेतृत्व को दिल्ली तलब कर सकता है। खास तौर पर मंडी संसदीय सीट पर हार के बाद यह कयासबाजी तेज हो गई है। बता दें, मंडी संसदीय सीट पर भाजपा के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि 2019 में इसी सीट पर पार्टी के रामस्वरूप शर्मा ने चार लाख से ज्यादा वोट से जीत दर्ज की थी। डेढ़ साल के बाद ही भाजपा की यह विजयी लीड हार में बदल गई।
बता दें कि मंडी सीट प्रदेश की सबसे बड़ी संसदीय सीट है और सीएम जयराम ठाकुर का गृह क्षेत्र हैं। सीएम जयराम ठाकुर अपने गृह क्षेत्र में बढ़त के बावजूद हार गए हैं। 40 हजार 800 वोटों की लीड सीएम भाजपा प्रत्याशी बिग्रेडियर कुशाल ठाकुर को मंडी जिले से दिलवाने में कायमाब रहे, लेकिन यह रामपुर, किनौर, आनी, मनाली, कुल्लू और भरमौर की बढ़त को काटने में काफी साबित नहीं हुई। नतीजतन मंडी उप चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर कांग्रेस की प्रतिभा सिंह से 7490 मतों से पराजित हो गए।
बीजेपी की हार पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इशारों ही इशारों में उपचुनाव में हार का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ दिया। जयराम ठाकुर ने कहा, 'पार्टी के भीतर जिन लोगों ने काम नहीं किया है, भीतरघात की जो खबरें हम सुन रहे थे उनमें से कुछ की पुष्टि हुई है और कुछ की होनी बाकी है। इस पर पार्टी आगे क्या फैसला लेती है, ये सोचने का विषय है।' जयराम ठाकुर ने उपचुनाव में हार के लिए देश में बढ़ी महंगाई को भी मुख्य वजह बताया है।
तो वहीं, अब ऐसी चर्चा है कि भाजपा मुख्यालय हिमाचल पर निर्णय ले सकता है, ताकि सरकार विरोधी लहर को काबू में लाया जा सके। उत्तराखंड और गुजरात में भाजपा नेतृत्व परिवर्तन कर चुका है। ऐसे में आशंका है कि प्रदेश भाजपा के मौजूदा मंत्रियों में से किसी साफ सुथरी छवि वाले को मुख्यमंत्री पद का दायित्व सौंपा जा सकता है। उपचुनाव में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह विधानसभा क्षेत्र भी भाजपा को अपेक्षाकृत बढ़त नहीं दिला पाया।












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