बुजुर्ग वीरभद्र नहीं, युवा हर्षवर्धन को मिलेगी कांग्रेस विधायक दल की कमान
शिमला। भाजपा की तरह हिमाचल कांग्रेस भी बड़े बदलाव के साथ नये कलेवर में नये साल में सामने आने की तैयारी में है। कांग्रेस विधायक दल के नेता के लिये भाजपा की तरह कांग्रेस भी नये युवा चेहरे को जिम्मेवारी देने जा रही है। इसके लिये शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान का नाम लगभग तय हो गया है। इसी शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता के तौर सदन के अंदर चौहान ही नये जोश के साथ सत्तारूढ़ दल को घेरने का प्रयास करते दिखेंगे।

राहुल गांधी को नए नेता की थी तलाश
दरअसल भाजपा ने जब शांता कुमार व प्रेम कुमार धूमल की छाया से निकल कर ताजगी भरे चेहरों को सरकार सौंप कर प्रदेश में नई शुरुआत कर दी व 52 वर्षीय जय राम ठाकुर को सीएम पद सौंपा तो कांग्रेस भी इस दवाब में आई कि पार्टी को भी अब बदलाव लाना होगा अगर वीरभद्र सिंह के प्रभाव से आगे निकलना चाह रही है। यह संकेत खुद राहुल गांधी ने दो दिन पहले अपने शिमला दौरे के दौरान दे दिये थे। उम्र के लिहाज से देखा जाये तो वीरभद्र सिंह जय राम ठाकुर से करीब 31 साल बड़े हैं। इस लिहाज से उन्हें सीएलपी लीडर बनाना पार्टी के लिये अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने जैसा हो सकता था। इसके चलते पार्टी में नये चेहरे की तालाश राहुल गांधी की ओर से शुरु कराई गई तो हर्षवर्धन चौहान जैसे बेदाग छवि के नेता का नाम ही उभर कर सामने आया।

भाजपा में भी युवा नेता पर जोर, कांग्रेस में भी
दरअसल साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले अपेक्षाकृत युवा नेता जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री पद की कुर्सी सौंपकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। साथ ही मंत्रिमंडल गठन में युवा चेहरों को कमान सौंप कर भाजपा ने ये साफ कर दिया है कि पार्टी युवाओं को आगे लाना चाहती है। इस तरह भाजपा ने रणनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस को दबाव में ला दिया है। यही वजह है कि कांग्रेस में संगठन के भीतर भी बदलाव के पक्ष में माहौल बनने लगा। कांग्रेस में संगठन अब बड़े बदलाव को तैयार है ,इसी क्रम में अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान जैसे युवा नेता को सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है। भले ही कांग्रेस के कुल 21 विधायकों में से 16 वीरभद्र सिंह के पक्ष में हैं, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अब बदलाव के मूड में हैं। शिमला में मंथन बैठक में भी राहुल गांधी ने वीरभद्र सिंह व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू को खूब खरी-खोटी सुनाई थी।

वीरभद्र युग से निकलने की कोशिश
राहुल गांधी इससे पहले भी कई बार युवा चेहरों को सामने लाने के लिए पार्टी के भीतर जोरदार पैरवी करते आए हैं। वहीं, हिमाचल कांग्रेस पांच दशक से वीरभद्र सिंह के आभामंडल के भीतर ही विचरण करती रही है। वीरभद्र सिंह को विद्या स्टोक्स व कौल सिंह ठाकुर से चुनौती तो मिलती रही, लेकिन वे भी वीरभद्र सिंह के कद के सामने घुटने टेकते रहे। मौजूदा चुनाव ने हिमाचल कांग्रेस को ये मौका दिया है कि वो बदलाव के साथ चले। लिहाजा अब कांग्रेस पार्टी ने वीरभद्र सिंह जैसे बुजुर्ग नेता के आभा मंडल से पार्टी को बाहर लाने की कसरत शुरू कर दी है।
भले ही अधिकांश विधायक वीरभद्र सिंह के साथ हैं, लेकिन पार्टी हाईकमान यानी राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष को लेकर चौंकाने वाले फैसले के तहत शिलाई के युवा विधायक हर्षवर्धन चौहान नेता प्रतिपक्ष बनने जा रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार विधानसभा की 21 सीटों पर जीत हासिल की है। वीरभद्र सिंह के साथ कद्दावर नेताओं में मुकेश अग्निहोत्री के अलावा विश्वासपात्र समर्थक रामपुर के विधायक नंदलाल व अन्य जरूर हैं, लेकिन चुनाव में करारी पराजय के बाद वीरभद्र सिंह विरोधी खेमा उन्हें साइड लाइन करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और नादौन से विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जिस भावपूर्ण तरीके से गांधी परिवार को उन्हें यहां तक लाने का श्रेय दिया, उससे भी पता चलता है कि हिमाचल कांग्रेस में खिचड़ी पक रही है।

हिमाचल में राहुल ने किए ऑब्जर्वर तय
पार्टी अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू व वीरभद्र सिंह के बीच की तनातनी जगजाहिर है। अब सुक्खू खेमे को मौका मिला है कि हाईकमान के समक्ष अपना पक्ष रखे। वहीं, हाईकमान भी यह अहसास कर रहा है कि भाजपा को टक्कर देने के लिए युवा चेहरों को आगे लाने की जरूरत है। हलांकि आशा कुमारी इस पद के लिए अग्रिम पंक्ति में थीं, लेकिन पुलिस कांस्टेबल से थप्पड़बाजी के बाद आशा कुमारी की छवि धूमिल हुई है। खुद राहुल गांधी ने उन्हें फटकार लगाई है। उसके बाद आशा कुमारी ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी ।
काबिलेगौर है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिमाचल व गुजरात में सीएलपी मीटिंग के लिए आब्जर्वर तय कर दिए हैं। इस संदर्भ में कांग्रेस ने बाकायदा बयान जारी कर बताया है कि हिमाचल के लिए सुशील कुमार शिंदे व बाला साहब थोराट केंद्रीय आब्जर्वर होंगे। ये आब्जर्वर सीएलपी लीडर तय करेंगे। कांग्रेस विधायक दल की बैठक आठ जनवरी को धर्मशाला में हो सकती है। उसी बैठक में हर्षवर्धन चौहान को यह जिम्मेवारी सौंपने का ऐलान हो सकता है।

कौन हैं हर्षवर्धन चौहान
कांग्रेस ने सिरमौर जिला के शिलाई विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनावों में हर्षवर्धन चौहान को मैदान में उतारा था। शिलाई से कांग्रसे के उम्मीदवार हर्षवर्धन चौहान ने भाजपा के बलदेव सिंह तोमर को 4125 मतों के अंतर से हराया। 2012 के विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस के प्रत्याशी बलदेव सिंह तोमर से 1918 मतों से हार गए थे। हर्षवर्धन चौहान 2012 से पहले इस सीट पर 1993, 1998, 2003, 2007 तक जीतते आए थे। शिलाई विधानसभा क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। 53 वर्षीय हर्षवर्धन चौहान सिरमौर जिले की कामरू तहसील के निवासी हैं। वह स्नातक हैं। उन्होंने शिमला में एचपी विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी डिग्री ली है। उनकी कुल संपत्ति 11 करोड़ रुपये है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।












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