हिमाचल में अब आसान नहीं होगा धर्म परिवर्तन, जबरन सामूहिक धर्मांतरण को अपराध की श्रेणी में रखा गया
शिमला: हिमाचल प्रदेश में अब धर्म परिवर्तन करने वालों से सरकार सख्ती से निपटेगी। हिमाचल सरकार धार्मिक स्वतंत्रता कानून-2019 को और अधिक कठोर बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक-2022 सदन में पेश किया है और इसके बाद अब प्रदेश में धर्म परिवर्तन करना आसान नहीं होगा। जबरन सामूहिक धर्मांतरण को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

प्रदेश के अक्सर धर्म परिवर्तन करने के मामले सामने आते रहे हैं। खासकर शिमला जिले में ऐसे मामले आते रहे हैं। जिसमें कई लोगों ने धर्म परिवर्तन किया। इस मसले को भाजपा के सहयोगी संगठन विहिप और आरएसएस लंबे समय से उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने इसी दवाब के चलते इसमें व्यापक बदलाव करने का निर्णय लिया है।
संशोधित कानूनी के प्रावधानों के तहत प्रदेश में जबरन, कपटपूर्ण तरीके और विवाह के समय जाति छिपाने का खुलासा होने पर सजा का प्रावधान किया है। सामूहिक धर्म परिवर्तन जिसमें दो व इससे अधिक लोगों का एक साथ कपटपूर्ण अथवा बलपूर्वक धर्म परिवर्तन करवाने की स्थिति में 7 से 10 साल तक कारावास का प्रावधान किया गया है। किसी व्यक्ति द्वारा अन्य धर्म में विवाह करने व ऐसे विवाह के समय अपने मूल धर्म को छिपाने की स्थिति में भी तीन से 10 साल तक के कारावास का प्रावधान होगा। कानून में एक से डेढ़ लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया है। धर्म की स्वतंत्रता कानून के प्रावधानों के तहत मिली किसी भी शिकायत की जांच पुलिस उप निरीक्षक से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा। सत्र न्यायालय में इसकी सुनवाई होगी।
यही नहीं अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको किसी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। इसके अलावा अगर वे धर्म परिवर्तन की बात छिपाकर आरक्षण की सुविधाएं लेते हैं तो ऐसे में उन्हें तीन से पांच साल तक सजा और 50,000 से एक लाख रुपए तक का जुर्माना होगा।












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