हिमाचल की सत्ता में वापसी के लिए भाजपा का ऑपरेशन लोटस, गृह मंत्री अमित शाह कर रहे मॉनिटरिंग
शिमला, 2 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ता की वापसी के लिये अपना ऑपरेशन लोटस शुरू कर दिया है। जिसमें न केवल पार्टी से रूठे नेताओं की पार्टी में वापसी कराई जा रही है। बल्कि विपक्षी दल कांग्रेसी खेमे से तोड़कर कुछ विधायकों व नेताओं को भाजपा में लाने की मुहिम शुरू कर दी गई है। हालांकि इससे पहले भाजपा में कांग्रेस की ओर से सेंधमारी की कोशिश जारी थी लेकिन अब भाजपा ने अपनी रणनीति बदल ली है।

दरअसल, इस सारी कवायद के पीछे गृहमंत्री अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच हुई मुलाकात है। इस मुलाकात के दौरान अमित शाह ने प्रदेश की जमीनी राजनीतिक हालात का जायजा लिया बताया जा रहा है। हालांकि इससे पहले भाजपा दो दौर का सर्वेक्षण कराकर अपने मंत्रियों और विधायकों की लोकप्रियता का आंकलन करवा चुकी है। निस्संदेह भाजपा सत्ता विरोधी लहर से डरी हुई है। लेकिन अब अमित शाह ने एकमात्र एजेंडा सत्ता में वापसी को लागू करते हुये भाजपा को आक्रामक बनाने पर जोर दिया है। यही वजह है कि एकाएक अचानक पार्टी में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
भाजपा ने अब अपने संगठन को चुनावी मोड में पूरी ताकत के साथ उतार दिया है। खास रणनीति के तहत प्रदेश के सीएम रैलियों के जरिये पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों के प्रचार प्रसार में लगे हैं। तो दूसरी और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह , पार्टी प्रभारी अविनाश राय खन्ना और सह प्रभारी संजय टंडन को मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं से बैठक कर नब्ज टटोलने की जिम्मेवारी दी गई है। इससे साथ ही पार्टी के रूठे नेताओं से भी संपर्क साधा जा रहा है। इस सबकी मॉनिटरिंग खुद गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। उनके ऑफिस को लगातार फीडबैक दिया जा रहा हैं और प्रदेश संगठन में भी बदलाव लाया जा रहा है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों जिस तरीके से इंदु वर्मा और खीमी राम की कांग्रेस में एंट्री हुई है। उसको लेकर पार्टी आलाकमान खासा नाराज है और इस बगावत को रोकने के लिये ही ऑपरेशन लोटस शुरू किया गया है। पार्टी की नजर अब कांग्रेस पार्टी की ओर है।
सत्ता के गलियारों से यह खबर छनकर आ रही है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस के कुछ विधायक बगावत कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। पिछले चुनावों के दौरान भाजपा छोड कांग्रेस में शामिल होने वाले सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा और कांगड़ा के विधायक पवन काजल पर पार्टी आलाकमान की नजर है। इसके साथ कुछ और कांग्रेस विधायक भी रडार पर हैं। वहीं पार्टी में तय हो गया है कि संगठन में काम करने वाले नेताओं से चुनाव न लड़ाया जाए। पार्टी के कोर ग्रुप ने वैकल्पिक प्रत्याशियों पर भी मंत्रणा की है। हाल ही में संपन्न कोर ग्रुप की बैठक में रूठे हुए नेताओं को मनाने की रणनीति पर काम करने के लिये चारों संसदीय क्षेत्रों में करीब 10 सीटें ऐसी आंकी गईं हैं, जिनमें बगावत रोकने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत जताई गई है।
भाजपा की इसी रणनीति के तहत हमीरपुर सदर से पूर्व भाजपा विधायक उर्मिला ठाकुर की फिर से भाजपा में वापसी हुई है और जुब्बल कोटखाई के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री दिवंगत नरेन्दर बरागटा के बेटे चेतन बरागटा, धर्मशाला से आप नेता राकेश चौधरी और जोगिन्दर पंकू ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। ये सभी नेता पहले भारतीय जनता पार्टी के सदस्य थे। उर्मिला ठाकुर हमीरपुर से 1998 और 2007 में भाजपा के टिकट पर विधायक रह चुकी हैं। बाद में भाजपा से टिकट ना मिलने पर ठाकुर ने कांग्रेस जॉइन कर लिया था। भाजपा आईटी सेल संयोजक चेतन बरागटा अपने पिता के निधन के बाद खाली हुई जुब्बल-कोठखाई विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन भाजपा ने यहां से जिला परिषद सदस्य नीलम सरैक को मैदान में उतारा। इसी तरह राकेश चौधरी धर्मशाला से 2019 का उपचुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन टिकट ना मिलने के कारण निर्दलीय चुनाव लड़े। बाद में आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था। इसी तरह शाहपुर जिला परिषद के सदस्य जोगिंदर पंकू ने भी भाजपा छोड़कर कुछ महीने पहले आम आदमी पार्टी जॉइन कर लिया।
इसके साथ ही केन्द्र सरकार जल्द ही हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने जा रही है। यह एक बडा मुद्दा है। सत्तारूढ़ दल भाजपा का प्रयास है कि इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाये ताकि सिरमौर जिला की राजनीति को प्रभावित करने वाले इस समुदाय के मतदाताओं को रिझाया जा सके। भाजपा के यह प्रयास अगर सिरे चढते हैं तो इससे सिरमौर के ट्रांस गिरी क्षेत्र की 154 पंचायतों की करीब तीन लाख की आबादी लाभान्वित होगी। हाटी समुदाय प्रदेश के सिरमौर जिला के चार विधानसभा क्षेत्रों में रहता है, जिसमें शिलाई, पांवटा साहिब, रेणुका और पच्छाद शामिल हैं। इसके साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के भी बदले जाने की चर्चा शुरू हो गई हैं। सुरेश कश्यप की जगह चुनावों से पहले सांसद इंदु गोस्वामी को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की चर्चा हैं।
राजनीतिक जानकार पत्रकार रविन्दर सूद मानते हैं कि भाजपा के खिलाफ भले ही प्रदेश में नाराजगी का माहौल हो। लेकिन उसके मुकाबले कांग्रेस पार्टी के पास संसाधनों का अभाव हैं। पार्टी अभी तक नेतृत्व के मामले को सुलझा नहीं पाई है। जिससे पार्टी में और बिखराव होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हिमाचल की सत्ता में वापसी उतनी आसान नहीं है। जितनी समझी जा रही है। पार्टी अब तक सत्तारूढ दल के खिलाफ कोई बड़ा आन्दोलन खडा करने में नाकाम रही है। हालांकि भ्रष्टाचार , बेरोजगारी और खनन जैसे मुद्दों पर भाजपा को घेरा जा सकता था। वहीं , दूसरी ओर भाजपा हर दिन अपनी रणनीति बदल रही हैं और भाजपा की ओर से कराये जा रहे पंच परमेशन सम्मेलन पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूती दे रहे हैं। वहीं हाटी समुदाय को लेकर निर्णय ले लिया जाता है तो यह मास्टर स्ट्रोक साबित होगा। और भाजपा को इसका पूरा लाभ मिलेगा।












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