हिमाचल चुनाव में बेटी का धर्मसंकट: दामाद-ससुर मैदान में आमने-सामने, कार्यकर्ता हुए कनफ्यूज
शिमला। हिमाचल प्रदेश में चुनावी मैदान में एक बेटी इस समय धर्मसंकट में है कि वह चुनाव लड़ रहे अपने पिता के लिये प्रचार करे या फिर अपने पति का झंडा लेकर घर से बाहर निकले। यहां बात हो रही है सोलन विधानसभा चुनाव क्षेत्र की, जहां से कांग्रेस प्रत्याशी धनी राम शांडिल के मुकाबले भाजपा के राजेश कश्यप मैदान में हैं। दिलचस्प यह है कि डॉक्टरी पेशा छोडक़र सोलन से चुनावी मैदान में कूदे भाजपा प्रत्याशी डॉ. राजेश कश्यप का मुकाबला अपने ही ससुर कांग्रेस प्रत्याशी कर्नल धनीराम शांडिल से मुकाबला है। यही वजह है कि यह चुनाव क्षेत्र खास बन गया है। हर किसी की नजर इस मुकाबले पर है। वहीं भाजपा प्रत्याशी कशयप की पत्नी अभी तक चुनाव प्रचार के लिये घर से बाहर नहीं निकल पाई है। उनके सामने बड़ा धर्मसंकट है कि वह नौ नंवबर तक कहां जायें। संवेदनशील पारिवारिक रिश्ते के कारण दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बच रहे हैं।

यही वजह है कि सोलन का मुकाबला फ्रैंडली होता जा रहा है। एक-दूसरे को घेरने की बजाय दोनों प्रत्याशी अपनी-अपनी प्राथमिकताएं गिना रहे हैं। अंदर की बात है कि दोनों दलों के कार्यकर्ता परेशान नजर आ रहे है और असमंजस में है कि विरोधी पार्टी के प्रत्याशी पर कोई वैचारिक हमला करना भी है या नहीं। अगर कोई गलती से कुछ कह देता है तो पार्टी की बैठक में कुछ देर तक सन्नाटा पसर जाता है। अब कार्यकर्ता महज डोर टू डोर चुनाव प्रचार पर तो जा रहे है लेकिन दोनों दलों के पास महज वोट मांगने के सिवाए कुछ कहने को नहीं। यहां तक की मतदाता भी प्रत्याशियों के साथ खुल कर अपनी बात नहीं रख पा रहा है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी एक ही परिवार से है और दामाद ससुर है अब वह भला बुरा बोलें तो किसे बोलें।

इस फ्रेंडली मैच को लेकर आम जनता का मानना है कि सोलन में महाभारत की तरह एक ही परिवार में धर्मयुद्ध लड़ा जा रहा है जो राजेश कश्यप पिछले चुनावों में अपने ससुर के लिए वोट मांग रहे थे आज उन्ही के खिलाफ वोट मांगते नजर आ रहे है। मतदाता और परिवार के लोग धर्म संकट में है कि आखिर वह ससुर को वोट दे या दामाद को जिताए। मतदाता भी इसके चलते साइलेंट मोड पर चला गया है क्योंकि दोनों ही दल आज मुद्दा वहीन नजर आ रहे है। पेट्रोल के दाम बढ़ चुके है महंगाई की मार लोगों पर पड़ रही है लेकिन दोनों बड़े राजनैतिक दल खामोश है।

कांग्रेस प्रत्याशी कर्नल धनी राम शांडिल कांग्रेस के कद्दावर दलित नेताओं में हैं। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनिति ज्वाईन की। 77 वर्षीय शांडिल ने भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में बखूबी अपनी सेवायें दीं। व कर्नल रैंक से रिटायर हुये। उनका एक बेटा व दो बेटियां हैं। वह 13 वीं संसद में शिमला संसदीय सीट से हिमाचल विकास कांग्रेस के सदस्य के नाते लोकसभा के सदस्य रहे। व बाद में 14 वीं संसद में भी दोबारा कांग्रेस के लोकसभा के लिये चुने गये। उन्होंने 2012 में सोलन से चुनाव जीता। उन्होंने 2012 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कुमारी शीला को 4472 मतों से पराजित किया था। इस बार फिर मैदान में हैं।












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