PICs: रेपिस्ट राम रहीम का डेरा देखने के बाद जान लीजिए राधे मां का शिमला वाला ठिकाना
उसके बाद वो कभी यहां तो कभी गुरू के साथ मुकेरियां वाले डेरे पर चली जातीं। श्याम सुंदर का कहना है कि उसी दौरान कुछ ही समय में ही गुरू ने राधे मां कहलाने वाली सुखविंदर की सारी शक्तियां वापस भी ले ली थी
शिमला। रेपिस्ट बाबा राम रहीम की ही तरह विवादों में घिरी राधे मां, जिसका असली नाम सुखविंदर कौर है हिमाचल प्रदेश से भी कनेक्शन रहा है। चूंकि उसने राधे मां ने अपनी धार्मिक यात्रा हिमाचल से ही शुरू की थी। प्रदेश के जिला कांगड़ा और चंबा की सीमा पर हटली नाम की जगह पर राधे मां के गुरू का आश्रम आज भी है। इन दिनों परमहंस डेरा हटली के गुरू रामधीन के शिष्य श्याम सुंदर बताते हैं कि सुखविंदर कौर यानी राधे मां कोई दिव्य शक्ति नहीं हैं, उसके पास जो शक्तियां थी उसे परमहंस डेरा के गुरू रामधीन ने ही वापस ले लिया था। राधे मां जो लाल लिबास पहनती हैं वो भी डेरे का लिवास नहीं है।


श्याम सुंदर का दावा है कि वो गुरू परमहंस रामधीन के साथ उस वक्त भी थे जब सुखविंदर कौर पहली बार रामधीन के पास आई थीं। गुरू रामधीन के दो ही डेरे रहे हैं एक डेरा कांगडा-चंबा की सीमा से सटे हटली में है तो दूसरा डेरा पंजाब के मुकेरियां में है। उन्होंने बताया कि पहली बार सुखविंदर कौर हिमाचल स्थित हटली वाले डेरे में ही आई थीं। यहीं से उन्होंने गुरू से शिक्षा लेनी शुरू की।

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उसके बाद वो कभी यहां तो कभी गुरू के साथ मुकेरियां वाले डेरे पर चली जातीं। श्याम सुंदर का कहना है कि उसी दौरान कुछ ही समय में ही गुरू ने राधे मां कहलाने वाली सुखविंदर की सारी शक्तियां वापस भी ले ली थीं। उनका कहना है कि जो लिबास वो आज पहन रही हैं वो भी डेरे का नहीं है। आज गुरू रामधीन तो नहीं हैं पर उनके शिष्य श्याम सुंदर ही हटली वाले डेरे की देखभाल करते हैं। यानी राधे मां का हिमाचल कनेक्शन हटली से जुड़ा हुआ है।


गौरतलब है कि राधे मां का असली नाम सुखविंदर कौर है, उनका जन्म 4 अप्रैल 1965 को पंजाब के गुरदास जिला के दोरांगला में हुआ था। परमहंस डेरा के गुरू रामधीन के शिष्य श्याम सुंदर ज्यादा न बताते हुए इतना ही बताते हैं कि जब वो यहां आई थीं तो उस वक्त उसके साथ तीन से चार महिलाएं भी थीं। उनका ये भी कहना है कि जो आज राधे मां बनकर ये कहती हैं कि उसने डेरे के रखरखाव के लिए पैसे दिए, मदद की सब बात झूठ है। उनका कहना है कि अगर कोई मदद डेरे के लिए की होती तो आज डेरे की क्या ये हालत होती। हटली स्थित डेरे की स्थिति वास्तव में ज्यादा अच्छी नहीं दिखती है।

राधे मां की 17 साल की उम्र में मुकेरियां के मोहन सिंह से शादी हुई थी। पति के काम की तलाश में दोहा चले जाने के बाद वो अध्यात्म की ओर आकर्षित हुईं। 23 साल की उम्र में वो परमहंस डेरा के गुरू रामधीन की शिष्या बन गई। रामधीन ने ही दीक्षा दी और सुखविंदर कौर को राधे मां का नाम दिया। इसके बाद राधे मां ने सत्संग करना शुरू कर दिए। बाद में वो मुंबई आईं जहां मिठाई की दुकानों वाली श्रृंखला के अध्यक्ष मनमोहन गुप्ता राधे मां के शिष्य बन गए। गुप्ता परिवार के संजीव गुप्ता, ममता माई राधे गुरु मां चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी बन गए। उसी परिवार की एक सदस्य ने राधे मां पर आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, उसके बाद ही वो इन दिनों सुर्खियों में हैं। अब दो साल पहले राधे मां के खिलाफ दर्ज शिकायत के मामले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ कदम उठाया है।











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