OPINION: अन्नदाताओं के लिए समर्पित हरियाणा सरकार
हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने कृषि और किसानों की समस्याओं के समाधान को हमेशा प्राथमिकता दी है। इसी के तहत राज्य सरकार ने सोमवार यानी 1 अक्टूबर से ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने का निर्देश दिया था, जहां कपास उगाने वाले किसान अपनी फसल को हुए नुकसान की जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
हरियाणा के कई क्षेत्रों में इस बार गुलाबी सूंडी के प्रकोप से कपास की फसल को काफी नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने तय किया है कि कपास की फसल को हुए नुकसान और सरकार की ओर से उसका आकलन किए जाने के बाद प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जानी है।

सावधानी से होगा कपास की फसल को हुए नुकसान का आकलन
सरकारी सहायता मिलने में किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो या कोई भेदभाव का सामना न करना पड़े, इसके लिए फसल कटाई के दौरान वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की जा रही है और कटाई से जुड़े प्रयोग भी होने हैं। यह प्रक्रिया प्रत्येक गांव में अपनाई जानी है।

क्लस्टर-2 वाले जिलों के किसानों को मिलेगी राहत
कपास की फसल के लिए हरियाणा फसल सुरक्षा योजना के तहत यह व्यवस्था क्लस्टर-2 वाले जिलों के लिए है। हरियाणा सरकार की ओर से दी जा रही इस तरह की मदद से उन किसानों को बहुत बड़ी सहायता मिलेगी, जिन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा नहीं मिल सका है।

खट्टर सरकार ने किसानों की दिक्कतों को समझते हुए ही उन्हें कृषि विभाग की वेबसाइट पर अपनी कपास की फसल के रजिस्ट्रेशन के लिए कहा था, जिसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर रखी गई थी। इसके लिए किसानों को मामूली फीस का भुगतान करना था।
एक मौका चूके तो हरियाणा सरकार ने दिया दूसरा अवसर
खट्टर सरकार के इस फैसले से गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, जींद, अंबाला, करनाल सोनीपत और हिसार जिलों के उन किसानों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी फसल किसी वजह से प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत सुरक्षित नहीं हो पाई थी।

30,000 रुपए प्रति एकड़ तक की वित्तीय सहायता
इस तरह से मात्र 1,500 रुपए की फीस जमा करके जिन किसानों ने फिलहाल कपास की फसल के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, उन्हें क्रॉप-कटिंग एक्सपेरिमेंट के तहत सरकार 30,000 रुपए प्रतति एकड़ तक की वित्तीय मदद उपलब्ध करवा रही है।

महंगाई के समय में खेती की लागत भी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में एक अन्नदाता जो अपनी जमा-पूंजी खेती में लगा देते हैं, वह फसल चौपट हो जाने के बाद कहां जाएंगे। ऐसे ही समय में एक कल्याणकारी सरकार उनके साथ खड़ी होती है। हरियाणा सरकार ने इस तरह से फिर एक बार अपने कल्याणकारी सरकार होने का प्रमाण दिया है।












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