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क्या हरियाणा में किसान आंदोलन की दाल नहीं गल रही ? ऐलनाबाद में बीजेपी के वोट तो बहुत बढ़ गए

चंडीगढ़, 3 नवंबर: तीन कृषि कानूनों के विरोध में एक साल से ज्यादा वक्त से चल रहे किसान आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र शुरू से हरियाणा और पंजाब ही रहा है। बाद में राकेश टिकैत की सक्रियता के चलते इसमें पश्चिमी यूपी के लोगों का भी प्रभाव जरूर बढ़ गया। पंजाब में तो इस मसले पर भाजपा की पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल पहले ही उसका साथ छोड़ गई थी। कहा जा रहा था कि इस आंदोलन की वजह से चुनावों में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली बीजेपी-जेजेपी की सरकार के भी बुरे दिन आने वाले हैं। लेकिन, राज्य की एकमात्र ऐलनाबाद सीट के लिए हुए उपचुनाव के जो परिणाम आए हैं, वह कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। खास बात यह है कि ये सीट कृषि कानूनों के विरोध की वजह से ही खाली हुई थी।

अभय चौटाला को ज्यादा वोट मिले, लेकिन......

अभय चौटाला को ज्यादा वोट मिले, लेकिन......

हरियाणा की ऐलनाबाद सीट से आईएनएलडी विधायक अभय चौटाला ने इसी साल जनवरी में कृषि कानूनों के विरोध में ही अपना इस्तीफा दिया था। मंगलवार को आए उपचुनाव के परिणाम में वह एक बार फिर से इस सीट पर जीते हैं और उनका वोट भी बढ़ा है। 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें यहां से 57,055 या 37.86% वोट मिले थे। जबकि, अभी के उपचुनाव में उन्हें करीब 9 हजार ज्यादा यानी 65,992 वोट मिले हैं और उनका वोट शेयर 43.49% है। मतलब उनका वोट शेयर भी करीब 6% बढ़ गया है। अगर उनके पक्ष में इस बढ़े हुए वोट को हम हरियाणा के वोटरों की ओर से किसान आंदोलन का समर्थन समझें तो भाजपा को मिले वोट को क्या मानें, यह बड़ा सवाल है।

आईएनएलडी से ज्यादा बढ़ा बीजेपी का वोट शेयर

आईएनएलडी से ज्यादा बढ़ा बीजेपी का वोट शेयर

इस उप चुनाव में बीजेपी की ओर से गोबिंद कांडा प्रत्याशी थे और उन्होंने 59,253 वोट प्राप्त किए हैं, जो कि इस सीट पर हुई कुल वोटिंग का 39.05% है। अब जरा ढाई साल पहले के विधानसभा चुनावों के आंकड़े देख लेते हैं। तब यहां बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर पवन बेनिवाल प्रत्याशी थे और उन्हें कुल 45,133 वोट ही मिले थे, जो कि कुल पड़े वोट का सिर्फ 29.95% था। मतलब, पिछले चुनाव में अभय चौटाला ने इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को करीब 12 हजार वोटों से हराया था। लेकिन,इस बार यह अंतर घटकर 7 हजार वोट से भी कम हो गया है। जबकि, आईएनएलडी के 6% की तुलना में यहां भाजपा का वोट शेयर लगभग 9% बढ़ गया है। यह स्थिति तब है जब हरियाणा में कई मौकों पर सरकार और किसान प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिल चुकी है।

हरियाणा में कांग्रेस का वोट शेयर करीब 10% घटा

हरियाणा में कांग्रेस का वोट शेयर करीब 10% घटा

अगर ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव के नतीजों को पूरे हरियाणा के चश्मे से देखें तो किसान आंदोलन के समर्थन में उछलने वाली कांग्रेस का तो हाल बहुत ही बुरा हो चुका है। जबकि, कांग्रेस अभी भी वहां मुख्य विपक्षी दल है। 2019 के विधानसभा चुनावों में पार्टी प्रत्याशी भरत सिंह बेनिवाल ने यहां कुल 35,383 वोट पाए थे, जो कि कुल पड़े वोट का 23.48% था। इस बार उसने पवन बेनिवाल पर दांव लगाया और उसे सिर्फ 20,904 वोट ही मिल पाए। यह कुल वोट का सिर्फ 13.78% हिस्सा है। जबकि, किसान आंदोलन को लेकर पंजाब के बाद कांग्रेस सबसे ज्यादा हरियाणा में ही ऐक्टिव रही है। पिछले साल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृषि कानूनों के विरोध में खुद ट्रैक्टर पर सवार होकर भी प्रदर्शन किया था।

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