पूर्व मुख्यंत्री ओपी चौटाला, उनके बेटे समेत 4 बड़े नेताओं की पेंशन हो सकती है बंद, कोर्ट हुआ सख्त
हरियाणा में चार बड़े नेताओं को लेकर हाई कोर्ट ने काफी तल्ख सवाल किया है। इन चार बड़े नेताओं को पेंशन दिए जाने पर हाई कोर्ट ने सवाल खड़ा किया है। दरअसल इन सभी चार बड़े नेताओं को अलग-अलग अपराध में दोषी करार दिया गया और उन्हे जेल तक जाना पड़ा लेकिन बावजूद इसके इन नेताओं को पेंशन मिल रही है, जिसपर हाई कोर्ट ने आपत्ति जाहिर की है। जिस तरह से इन बड़े नेताओं को आपराधिक मामलों में जेल हुई उसके बाद पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने पूछा आखिर क्यों नहीं इनकी पेंशन को रोक दिया जाए।

सजा होने के बाद भी पेंशन क्यों?
बता दें कि ओम प्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला, पूर्व विधायक शेर सिंह बड़शामी को अलग-अलग भ्रष्टाचार के मामलों में 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सतबीर सिंह कादियान को 7 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि सतबीर कादियान का निधन हो गया है। लेकिन उनके परिवार को अभी भी यह पेंशन मिल रही है। कोर्ट ने कहा कि सजा होने के बाद विधायक को पेंशन का नियम नहीं है लिहाजा यह गैरकानूनी है।

कितनी पेंशन मिल रही
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला को फिलहाल 2.15 लाख रुपए की पेंशन मिल रही है। वहीं उनके बेटे को हर महीने 50 हजार रुपए की पेंशन मिल रही है। पूर्व विधायक सतबीर सिंह और शेर सिंह को 50 हजार रुपए से अधिक की पेंशन मिल रही है। इन सभी लोगों को अलग-अलग मामले में सजा हो चुकी है, ऐसे में कोर्ट ने इनको दी जा रही पेंशन को लेकर सवाल खड़ा किया है।

288 पूर्व विधायकों को मिल रही पेंशन
बता दें कि हरियाणा सचिवालय के एक कर्मचारी ने एचसी अरोडा ने एक याचिका दायर की थी, जिसमे उन्होंने पूर्व विधायकों को मिल रही पेंशन को लेकर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने इस बात की जानकारी दी है कि कुल 288 पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है। इसमे चार विधायक ऐसे हैं जिन्हें आपराधिक मामलों में सजा हो चुकी है फिर भी उन्हें पेंशन दी जा रही है।

सचिवाल ने बताया सही
याचिका पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने हरियाणा विधानसभा की धारा 7ए का हवाला दिया। कोर्ट ने इस याचिका का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी भी विधायक को सजा हो जाती है तो वह पेंशन के योग्य नहीं रह जाता है। एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने कहा किहमने हरियाणा विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखककर इस पेंशन को रोका जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सचिवालय की ओर से कहा गया है कि यह वेतन-भत्ते व पेंशन एक्ट के तहत सही है।












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