Haryana Chunav: SC की रिजर्व सीटें तय करेंगे चुनाव परिणाम! क्या कहता है बीजेपी, कांग्रेस का वोटिंग पैटर्न?

Haryana Chunav 2024: हरियाणा विधानसभा के लिए 5 अक्टूबर को मतदान होना है। अगर वहां बीते 10 वर्षों के वोटिंग पैटर्न पर नजर डालें तो अगले चुनाव परिणामों को लेकर काफी कुछ संकेत मिल सकता है। राज्य में 2014 से बीजेपी की सरकार है और बीते पांच चुनावों से वहां के मतदाताओं ने बहुत ही सूझबूझ के साथ वोटिंग की है और इसका फर्क लोकसभा और विधानसभा चुनावों में स्पष्ट नजर आया है।

हरियाणा में बीते पांच चुनावों (तीन लोकसभा और दो विधानसभा) का विश्लेषण करें तो एक बात स्पष्ट है कि आम चुनावों में मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के बीच मुकाबला होता है। लेकिन, जैसे ही विधानसभा चुनाव आता है, क्षेत्रीय पार्टियों का भी रोल अहम हो जाता है।

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हरियाणा में भाजपा के लिए वोटिंग पैटर्न
पहले सत्ताधारी बीजेपी की बात कर लेते हैं। 2014 के आम चुनावों में पार्टी को (वोट शेयर- 34.8%) 90 में से करीब 58% असेंबली सीटों पर बढ़त मिली थी।

उसी साल विधानसभा चुनावों में वह (वोट शेयर-33.2%) 52% सीटों पर आगे रही। 2019 के आम चुनावों में पार्टी (वोट शेयर- 58.2%) ने 88% सीटों (79 सीट) पर बढ़त बना ली और फिर विधानसभा चुनावों में (वोट शेयर-36.5%) 44.4% सीटों पर आगे रही। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को (वोट शेयर-46.1%) 49% सीटों पर बढ़त मिली है।

हरियाणा में कांग्रेस के लिए वोटिंग पैटर्न
वहीं कांग्रेस को 2014 के लोकसभा (वोट शेयर-23%) और विधानसभा (वोट शेयर-20.6%) दोनों चुनावों में सिर्फ 17% असंबेली सीटों पर बढ़ती मिली थी। 2019 में (वोट शेयर-28.5%) यह बढ़त घटकर 11% सीटों तक सिमट गई।

लेकिन, 2019 के विधानसभा चुनावों में पार्टी (वोट शेयर-28.1%) 34.4% विधानसभा सीटों पर आगे हो गई। इस बार के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस(वोट शेयर-43.7%) को हरियाणा की 45.6% असंबेली सीटो पर बढ़त मिली है।

हरियाणा में अन्य दलों के लिए वोटिंग पैटर्न
हरियाणा में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव का ट्रेंड अन्य दलों के प्रदर्शन में देखा जा सकता है। जैसे 2014 के आम चुनावों में इन्हें(वोट शेयर-42.2%) 26% सीटों पर बढ़त मिली तो उसी साल विधानसभा चुनावों (वोट शेयर-46.2%)में यह बढ़त 31% हो गई। फिर 2019 के आम चुनावों में ये(वोट शेयर-13.3%) सिर्फ 1% सीट पर आगे रहे, लेकिन विधानसभा चुनावों(वोट शेयर-35.4%) में यह बढ़त 21% की हो गई।

इस साल के लोकसभा चुनाव में इन अन्य दलों(वोट शेयर-10.2%) को 5.6% सीटों पर बढ़त मिली है।

कांग्रेस और बीजेपी के लिए सामान्य और सुरक्षित सीटों पर वोटिंग पैटर्न
अब मुख्य प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और बीजेपी को बीते पांच चुनावों में सामान्य और अनुसूचित जाति (SC) के लिए रिजर्व सीटों पर पड़े वोट के पैटर्न को देखें तो यह स्थिति और साफ हो सकती है। क्योंकि, यह इस बार के विधानसभा चुनावों में निर्याणक फैक्टर के रूप में काम कर सकता है।

रिजर्व सीटों पर दिखा कांग्रेस के आरक्षण वाले नैरेटिव का असर
बता दें के 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने आरक्षण को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और चुनाव अभियान में यह जोर-शोर से दावा किया था कि बीजेपी सरकार में आएगी तो आरक्षण खत्म कर देगी। भाजपा, कांग्रेस के इस नैरेटिव को समय रहते तोड़ नहीं पायी और इसका असर रिजर्व सीटों पर हुए मतदान में साफ तौर पर नजर आ सकता है।

2014 के आम चुनावों में बीजेपी को हरियाणा के सामान्य विधानसभा क्षेत्रों में 37.6% वोट मिले थे और उसी साल विधानसभा चुनावों में यह आंकड़ा 33.1% रहा था। 2019 के लोगसभा चुनावों में सामान्य सीटों पर बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 59% हो गया तो उसी साल विधानसभा चुनावों में यह 37.2% रहा। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को इन सीटों पर 47.7% वोट मिले हैं।

वहीं कांग्रेस को इन सामान्य सीटों पर 2014 के आम चुनावों में 21.9%, विधानसभा चुनाव में 22.6%, 2019 के लोकसभा चुनाव में 28%, उसी साल विधानसभा चुनाव में 28.7% और 2024 के लोकसभा चुनावों में 41.6% वोट मिले हैं।

2024 के आम चुनावों में सुरक्षित सीटों पर क्या रहा वोटिंग पैटर्न
अब अनुसूचित जातियों (SC) के लिए रिजर्व सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच हुए वोटों के बंटवारे का विश्लेषण करें तो साफ हो जाता है कि इस बार के चुनाव परिणामों पर इन सीटों की अहमियत क्यों बढ़ गई है।

2024 में SC की सुरक्षित सीटों पर कांग्रेस को मिले 51.7% वोट
2014 के आम चुनावों में एससी की रिजर्व सीटों पर बीजेपी को 24.5% और कांग्रेस को 32.8%, उसी साल विधानसभा चुनावों में बीजेपी को इन्हीं सीटों पर 33.6% और कांग्रेस को 24.5%, 2019 के आम चुनावों में बीजेपी को एससी सीटों पर 54.4%, कांग्रेस को 30.1%, उसी साल असेंबली चुनावों में इन सीटों पर बीजेपी को 33.4% और कांग्रेस को 27.3% वोट मिले थे।

इस साल हुए लोकसभा चुनावों में एससी के लिए सुरक्षित सीटों पर जहां भाजपा को 40% वोट मिले, वहीं कांग्रेस 51.7% वोट जुटाने में सफल हो गई।

लोकसभा चुनावों के बाद बदल चुका है माहौल
इस बार के हरियाणा विधानसभा चुनाव में जननायक जनता पार्टी (JJP) ने यूपी की नगीना सीट से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने बसपा (BSP) के साथ चुनावी गठबंधन करके दलित वोटों में सेंधमारी के लिए बड़ी रणनीति तैयार की है।

ऊपर से लोकसभा चुनावों वाला माहौल बदला है और कांग्रेस में दलित नेता सांसद कुमारी शैलजा को जाट चेहरे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के मुकाबले उपेक्षित रखने का भी मुद्दा उठा है। ऐसे में इन सुरक्षित सीटों पर पड़ने वाला हरेक वोट काफी मायने रख सकता है। (आंकड़ों के स्रोत: चुनाव आयोग, अशोका यूनिवर्सिटी)

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