Haryana Chunav: 6 दशकों में सबसे ज्यादा महिला वोटर, फिर क्यों कम हो रही इनकी उम्मीदवारी?
Haryana Chunav 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार 1978 के बाद पहली बार प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। लेकिन, हकीकत ये है कि फिर भी बीते दो चुनावों से इन्हें चुनाव लड़ने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है। बल्कि, यह लगातार दूसरा चुनाव है, जब प्रदेश में महिला उम्मीदवारों की संख्या कम हो गई है।
जबकि, वनइंडिया पहले एक रिपोर्ट दे चुका है कि बीते एक दशक में हरियाणा में महिलाओं और युवतियों की दशा काफी बेहतर हुई है। वो पुरुषों से अलग अपना स्वतंत्र निर्णय लेने को लेकर वोकल हो रही हैं। ऐसे में उनका इस तरह से चुनावी प्रतिस्पर्धा से दूर होना बड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।

2014 में हरियाणा में सबसे अधिक महिला प्रत्याशी
हरियाणा विधानसभा का यह 14वां चुनाव है। अबतक सबसे ज्यादा 116 महिला उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का मौका 2014 में मिला था। उस साल सबसे अधिक 13 महिला एमएलए चुनकर विधानसभा भी पहुंचीं थीं।
हरियाणा में 47 दलों ने एक भी महिला को नहीं दिया टिकट
लेकिन, 2019 में मात्र 108 महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ीं, जिनमें से केवल 9 ही चुनाव जीत सकीं। 2024 के चुनाव में उम्मीदवारों की यह संख्या घटकर 101 रह गई है। राज्य में इस बार 60 पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं, जिनमें से 47 ने एक भी महिला प्रत्याशी पर भरोसा नहीं जताया है। इस बार बीजेपी ने 12 और कांग्रेस ने 10 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है।
1978 के बाद 2024 में प्रति हजार पुरुष सबसे अधिक महिला वोटर
जबकि, चुनाव आयोग के ताजा आंकड़े के मुताबिक हरियाणा में इस बार के चुनाव में प्रति 1,000 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या 881 हो चुकी है। यह संख्या 1978 के 884 के बाद सबसे ज्यादा है।
हरियाणा में महिलाओं को टिकट देने से क्यों परहेज करती हैं पार्टियां?
अगर 1967 से लेकर पिछले चुनावों तक हरियाणा में महिला उम्मीदवारों की संख्या और चुनावों में उनकी सफलता के आंकड़ों को देखें तो शायद कुछ अंदाजा मिल सकता है कि राजनीतिक दल उन्हें टिकट देने से कन्नी क्यों काटती हैं।
जैसे 1967 में 8 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 4 जीतीं। इसी तरह से 1968 में 12 में से 7, 1972 में 13 में से 4, 1978 में 20 में से 4, 1982 में 27 में से 7, 1987 में 35, 1991 में 41 में 6, 1996 में 93 में 4, 2000 में 49 में 4, 2005 में 60 में 11, 2009 में 69 में 9, 2014 में 116 में 13 और 2019 में 108 महिला उम्मीदवारों में 9 जीतकर विधानसभा पहुंच सकीं।
हरियाणा में आगे आ सकता है बड़ा बदलाव
हरियाणा एक ऐसा प्रदेश रहा है, जहां शुरू से महिलाओं के फैसलों पर पुरुषों का प्रभाव देखा जाता है। लेकिन, धीरे-धीरे और खासकर पिछले एक दशक में इस स्थिति में काफी बदलाव आया है। अब प्रदेश में महिलाओं और युवतियों का एक ऐसा वर्ग तैयार हुआ है, जो अपने पैरों पर खड़ा हुआ है और स्वतंत्र फैसले लेने के लिए तैयार है।
ऐसे में उम्मीद है कि जैसे ही महिलाएं राज्य के चुनावों पर स्वतंत्र रूप से प्रभाव डालना शुरू कर देंगी, उम्मीदवार के तौर पर उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी और विधानसभा और संसद में उनका प्रतिनिधित्व भी बढ़ सकेगा। हरियाणा की 90 सीटों पर 5 अक्टूबर को चुनाव होने हैं और वोटों की गिनती 8 अक्टूबर को होगी।












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