हरियाणा चुनाव: केजरीवाल के AAP 'किंगमेकर' वाले बयान पर खट्टर बोले-हमें उनकी जरूरत ही नहीं, जानिए सियासी मायने
जेल से बाहर आते ही अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में रोड करने शुरू कर दिए हैं। हरियाणा की जगाधरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव प्रचार का आगाज किया है। साथ ही यहां तक कह दिया कि हरियाणा में आम आदमी पार्टी किंगमेकर बनेगी। इस बयान पर हरियाणा के पूर्व सीएम व भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पलटवार किया है।
मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि उनके (आम आदमी पार्टी) सपोर्ट का धोखा कोई भी नहीं लेने वाला। हमें जरूरत नहीं पड़ेगी तो हम क्यों ही बात करेंगे। कुमारी शैलजा के भाजपा में आने के सवाल पर खट्टर ने कहा कि कुछ बातें रणनीति की होती है। उन्हें बताया नहीं जाता।

शुक्रवार को जगाधरी में जनता को सम्बोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा में कोई भी सरकार आम आदमी पार्टी के बिना नहीं बनेगी। हरियाणा में अबकी बार किंगमेकर आप बनेगी।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में सभी 90 सीटों पर एक साथ 5 अक्टूबर को मतदान होगा। मतों की गिनती 8 अक्टूबर को होगी। इस बार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन की चर्चा चली थी, मगर बात नहीं बनी।
केजरीवाल के बयान के मायने
1. अरविंद केजरीवाल हरियाणा में खुद को जितना किंगमेकर कहेंगे, उतना ही कांग्रेस को नुकसान होने वाला है। हालांकि पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी के वोट परसेंटेज बेहद निराशाजनक रहा था। आम आदमी पार्टी के निशाने पर भाजपा हमेशा से रही है। इस बार अगर आम आदमी वोट लेती है तो भाजपा विरोधी होंगे, जो एक मुश्त कांग्रेस को मिल सकते थे। ऐसे में अब कांग्रेस को आप से नुकसान ज्यादा होगा।
2. आम आदमी पार्टी के बिना सरकार नहीं बनेगी के बयाने के मायने यह भी निकाले जा रहे हैं कि आप हरियाणा चुनाव 2024 में कुछ सीटों पर अपनी पूरी ताकत से लड़ेगी। इसका एक अर्थ यह भी निकलता है कि वो बहुमत लायक आंकड़ा भले ही न ले आ सकें पर इतनी सीट जरूर आएगी कि हंग विधानसभा में उनके समर्थन की जरूरत आ जाए। इस दशा में अगर आम आदमी पार्टी 4 से 5 सीटें भी जीत लेती है तो वो किंगमेकर की भूमिका में आ सकती है।
3. बीजेपी का विरोध, कांग्रेस के नाम पर चुप्पी क्यों जिस दिन से अरविंद केजरीवाल तिहाड़ से बाहर आए हैं , वो कांग्रेस का नाम लेने से बचते हैं। उनका सारा विरोध बीजेपी और मोदी सरकार को ही लेकर रहता है. जबकि शराब घोटाले को कोर्ट में ले जाने वाली कांग्रेस ही थी। पर राजनीति में बहुत कुछ न चाहते हुए भी करना पड़ता है।












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