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Haryana News: पेरिस ओलिंपिक में हरियाणा के अमन सहरावत का धमाल, देश को आज रात सेमिफाइनल का इंतजार

Haryana News: हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बिरोहड़ के रहने वाले रेसलर में अमन सहरावत पेरिस ओलिंपिक के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में 57 किलोग्राम वर्ग में अल्बानिया के पहलवान को 12-0 से पटखनी दी है। इससे पहले उन्होंने मैक्डोनिया के व्लादिमीर ईगोरोव को 10-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।

सेमीफाइनल मुकाबला आज रात को करीब साढ़े 9 बजे होगा। पेरिस ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले 21 वर्षीय अमन सहरावत एकमात्र पुरुष पहलवान हैं। पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के बाद अब अमन सहरावत पर देश की नजर टिकी हुई है।

aman sahrawat

मां को हार्ट अटैक और पिता का बीमारी से देहांत

अमन का जन्म साल 2003 में झज्जर जिले में हुआ था। अमन एक फ्रीस्टाइल पहलवान हैं। उन्होंने अपना पहला खिताब साल 2021 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में जीता था। अमन के माता-पिता का साया बहुत पहले उनके ऊपर से उठ चुका है। 2013 में उनकी माता कमलेश और 2014 में उनके पिता सोमवर सहरावत का स्वर्गवास हो गया था। लेकिन छोटी उम्र में माता-पिता का साया उठ जाने के बावजूद अमन का हौसला कम नहीं हुआ। अमन के ताऊ सुधीर की माने तो अमन ओलंपिक में जरूर पदक जीत कर लाएगा। उन्होंने बताया कि अमन ओलंपिक के पदक के जरिए अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि देना चाहता हैं।

आठ वर्ष की उम्र में शुरू किया प्रशिक्षण

अमन के परिजनों ने आठ वर्ष की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में भेजने की योजना बनाई। तब दिल्ली जाने से छह महीने पूर्व उनकी माता का निधन हो गया था। दिल्ली जाने के छह महीने बाद उनके पिता का निधन हो गया। अमन साधारण किसान परिवार से हैं। उनके हिस्से में केवल ढाई एकड़ जमीन आती है। माता-पिता के निधन के बाद अमन की परवरिश उनके चाचा-ताऊ और दादा ने मिलकर की। अमन की बहन पूजा फिलहाल बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही है। वर्तमान में अमन के दादा मांगेराम, उनके ताऊ सुधीर, जयवीर और चाचा रणवीर, कर्मवीर, वेद प्रकाश आदि परिजन गांव से दो किलोमीटर दूर नौगांव की तरफ जाने वाले कच्चे रास्ते पर बनी छोटी सी ढाणी में रहते हैं।

कोच ने अपने बगल वाले कमरे में रखा

अमन सहरावत छत्रसाल स्टेडियम में रहते हैं। बगल में कोच ललित का कमरा भी है। ललित कहते हैं मैंने उसे अपने बगल वाले कमरे में ठहराया। ताकि उसका ध्यान रखा जा सके। वे बताते हैं कि हम लोग उसे घर में कम ही बात करने देते हैं। घरवालों को भी कहा है कि वे यहां कम आएं और कम ही बात करें। इससे उसे घर और माता-पिता की याद आएगी और वह खेल पर फोकस नहीं कर सकेगा। ललित कहते हैं कि एशियन गेम्स में मेडल जीतने के बाद उसे स्टाफ रूम दिया है। उसमें किचन भी है। ताकि अगर वह अलग से कुछ बनाना चाहें तो अपना बना सकते हैं।

लक्ष्य हांसिल करने के लिए कमरे में लगाए पोस्टर

अमन ने अपने कमरे में ओलिंपिक मेडल और खुद के ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले पोस्टर लगा रखे हैं। ताकि वे लक्ष्य से भटकें नहीं और ओलिंपिक गोल्ड को फोकस कर ही तैयारी करें। जब भी गांव जाते हैं। पिता के बनवाए मंदिर में माथा टेकते हैं। उनकी मौसी बताती हैं कि जब भी कोई प्रतियोगिता होती है तो वह घर जरूर आता है और मंदिर में माथा टेकता है। यह मंदिर उसके पिता ने बनवाया था। परिवार ने अमन के सारे मेडल घर की अलमारी में संभाल कर रखे हैं। उनकी मौसी सुमन मेडल दिखाते हुए कहती हैं कि यह अमन की मेहनत है। उसने बहुत मेडल जीते हैं। अभी इसे अलमारी में ही संभाल कर रखा है।

अमन सहरावत की उपलब्धियां

अमन सहरावत ने अपने छोटे से कैरियर में कई उपलब्धियां हांसिल की है. साल 2022 में अंडर-17 फ्री स्टाइल किर्गिस्तान में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद रैंकिंग सीरीज अल्माटी में स्वर्ण पदक जीता। बाद में खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2019 में स्वर्ण पदक जीता। 2018 चैंपियनशिप मनामा 2022 में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद एशियन चैंपियनशिप 2019 में स्वर्ण पदक जीता। साथ ही अमन सहरावत तीन बार भारत कुमार रह चुके है। साल 2023 में अमन ने कजाकिस्तान में हुए एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक को अपने नाम किया था। जनवरी 2024 में ओपन कुश्ती टूर्नामेंट में पुरुषों की 57 किलोग्राम स्पर्धा में गोल्ड जीता। अब अमन सहरावत पेरिस ओलिंपिक के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। आज पूरा देश उनसे उम्मीद लगाए बैठा है।

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