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हरियाणा सरकार के विज्ञापन 'घूंघट की आन-बान...' पर मचा बवाल

साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत का दौरा किया था, उस समय उन्होंने यहां से बेटी पढ़ाओ कैंपेन की शुरुआत की थी।

नई दिल्ली। हरियाणा सरकार के एक विज्ञापन को लेकर बवाल मच गया है। ये विज्ञापन प्रदेश सरकार की एक पत्रिका में छपा है, इसमें महिलाओं के 'घूंघट' को 'राज्य की पहचान' बताया गया है। इसी को लेकर विपक्ष ने प्रदेश की मनोहर लाल खट्टर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष ने कहा कि ये विज्ञापन प्रदेश भाजपा सरकार की 'प्रतिगामी और संकीर्ण मानसिकता' को दर्शाता है। इस मुद्दे पर महिला रेसलर गीता फोगट ने भी टिप्पणी की है।

हरियाणा सरकार का विज्ञापन

हरियाणा सरकार का विज्ञापन

साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत का दौरा किया था, उस समय उन्होंने यहां से बेटी पढ़ाओ कैंपेन की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कैंपेन के जरिए प्रदेश में लड़कियों को शिक्षित करने की अपील लोगों से की थी। इसके जरिए कोशिश ये भी थी कि प्रदेश में लड़कों और लड़कियों की संख्या में बड़े अंतर को कम किया जा सके। हालांकि प्रदेश सरकार की कृषि संवाद नामक पत्रिका के हालिया अंक में महिला की घूंघट वाली तस्वीर छपने और इससे जुड़े कैप्शन को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गई है। इस मुद्दे पर महिला रेसलर गीता फोगाट ने भी टिप्पणी की है।

कृषि संवाद पत्रिका में छपा है विज्ञापन

कृषि संवाद पत्रिका में छपा है विज्ञापन

इस विज्ञापन में एक महिला घूंघट में है और अपने सिर पर चारा लेकर जा रही है। इसके कैप्शन में लिखा है कि घूंघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान। इस पत्रिका के मेन पेज पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तस्वीर छपी है।

कांग्रेस ने साधा प्रदेश सरकार पर निशाना

कांग्रेस ने साधा प्रदेश सरकार पर निशाना

इस विज्ञापन को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इसके जरिए प्रदेश की खट्टर सरकार की पिछड़ी मानसिकता का पता चलता है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिगामी और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस नेता की ओर से कहा गया कि प्रदेश की महिलाएं केवल राज्य के लिए ख्याति हासिल नहीं की, बल्कि देश का भी मान बढ़ाया है।

गीता फोगाट ने भी की टिप्पणी

गीता फोगाट ने भी की टिप्पणी

इस संदर्भ में 28 वर्षीय महिला रेसलर गीता फोगाट ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हम वहां से आते हैं जहां लड़कियों को घूंघट के पीछे रखा जाता है, उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता है...स्कूल भी नहीं भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने हमें इससे आगे बढ़ने में मदद की, जिसकी वजह से हम वहां आज यहां पहुंचे हैं। बता दें कि फ्री-स्टाइल महिला रेसलर ने भारत के लिए 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था।

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