ऐलनाबाद उपचुनाव: किसान नेता की उम्मीदवारी से बदल गए राजनीतिक समीकरण, चढ़ा सियासी पारा
हरियाणा के सिरसा में उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। ऐलनाबाद में 30 अक्टुबर को उपचुनाव होने वाले हैं। इस बार उपचुनाव में तीन कृषि कानून मुख्य मुद्दा है।
चंडीगढ़, अक्टुबर 9, 2021। हरियाणा के सिरसा में उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। ऐलनाबाद में 30 अक्टुबर को उपचुनाव होने वाले हैं। इस बार उपचुनाव में तीन कृषि कानून मुख्य मुद्दा है। ग़ौरतलब है कि इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में इस्तीफ़ा दिया था। अब दोबारा से वह उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी के तौर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। विकल पचार को हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के ने अपने उम्मीदवार के तौर सियासी मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने विकल पचार की उम्मीदवारी पर विरोध जताया है। उनका कहना है विकल पचार से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इस बाबत वन इंडिया हिंदी ने विकल पचार से बात की उन्होंने कहा सर्वसम्मति उन्हें हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पढ़िए सवालों का उन्होंने क्या जवाव दिया ?

किसान आंदोलन से जुड़े हुए थे फिर आप ने चुनावी रण में क़दम क्यों रखा ?
इस सवाल के जवाब में विकल पचार ने कहा कि जब तक किसान कानून बनाने वाली क़लम तक नहीं जाएगा उन्हें उनका हक़ नहीं मिलेगा। एक छोटा सा उदाहरण है कि रहबरे आज़म छोटुराम कांग्रेस के सामने विपक्ष के नेता हुआ करते थे। इस तरह के कानून उस वक़्त भी लागू किए गय़े थे। उस वक़्त रहबरे आज़म उस वक़्त पंजाब के विधानसभा में विपक्ष के नेता थे उन्होंने उस वक़्त खुल कर किसानों का समर्थन में आवाज़ उठाई और किसानो के हक में कानून बनाए। राजनीतिक पार्टियां बदल जाती हैं आंदोलन चलते रहता है। इसलिए किसानों की आवाज़ उठाने के लिए भी विधानसभा में उनका प्रतिनिधि भी होना चाहिए।

किसान संगठन ही किसान नेता का उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं ?
इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इस तरह का कोइ मामला नहीं है कुछ राजनीतिक पार्टी के लोग किसानों का लाबादा ओढ़े हुए हैं। उसमें एक अकाली दल का ज़िला अध्यक्ष था और एक इनेलो किसान सेल का पदाधिकारी था वो लोग किसानों की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने के लिए ये हथकंडा अपनाया। सभी की ज़मीने हिली हुई हैं। उन्हें पता है कि देश में किसान आंदोलन चल रहा है अगर किसान चुनावी मैदान में उतरेगा तो यह लोग सत्ता से बाहर होंगे, इसलिए इन लोगों ने किसानों के बैनर तले विरोध करने की कोशिश की। मेरे क्षेत्र के किसानों ने उन्हें बड़ा जवाब दिया । सभी लोगों ने मेरे किसान के प्रतिनिधित्व करने के फ़ैसले पर सहमती जताई।

अभय चौटाला चुनावी मैदान में हैं क्या ये आपके लिए चुनौती है ?
विकल पचार ने कहा कि मैं इसे चुनौती नहीं मानता हुं, वैसे मेरा चुनाव लड़ने का इरादा भी नहीं था। अभय सिंह चौटाला ने जब इस्तीफ़ा दिया था तो उन्होंने कहा था जब तक ये कृषि कानून रहेंगे, एमएसपी गारंटी कानून नहीं बनेगा जब तक वह जनप्रतिनिधि के तौर पर ज्वॉइन नहीं करूंगा। विकल पचार ने अभय चौटाला से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या जिन मुद्दों पर उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था उसका हल निकल गया। जब हल नहीं निकला है तो फिर वह चुनावी मैदान में क्यों उतर रहे हैं। नाखून कटा कर कोई शहीद नहीं कहलाता, शहीद होने के लिए गला कटाना पड़ता है। ये राजनीतिक महत्वकांक्षा के लोग हैं झूठे वादे कर के किसान आंदोलन का फ़ायदा उठाना चाह रहे थे। कृषि कानून रहेंगे, एमएसपी गारंटी कानून पास नहीं हुए उनको चाहिए था कि किसान संगठन के उम्मीदवार को समर्थन करते तो किसान भी उनके साथ लगते। लेकिन किसान अब उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को समझ चुका है। उन्होंने राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस्तीफ़ा का ड्रामा किया था जिसकी पोल उनके पर्चा दाखिल करने से खुल गई है।

क्या आपकी उम्मीदवारी से किसानों का मुद्दा हल हो सकता है ?
विकल पचार ने कहा कि ये चुनाव ना तो मेरे लिए और ना हि संगठन के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन ये चुनाव देश को एक नई दिशा ज़रूर देगा। क्योंकि जब हम लोगों ने मिशन पंजाब की बात की तो पंजाब के जत्थेबंदियों ने कहा कि हम चुनाव नहीं लड़ेंगे । अगर ऐलनाबाद उप चुनाव में किसान का प्रतिनिधि जीत दर्ज करता है तो आगामी विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में किसानों की सरकार बनेगी। इसके बावजूद सरकार नहीं मानेगी तो किसानों में जागृती इतनी आ जाएगी कि 2024 के चुनाव में संसद में ज़्यादातर राज्यों से किसान प्रतिनिधि पहुंचेंगे। जो किसानों के हित में कानून बनाएंगे किसान विरोधी कानूनो को ख़त्म करेंगे। नई ईबारत का आग़ाज़ ऐलनाबाद से किया गया है।

किसान मोर्चा की आगे की रणनीति क्या होगी ?
किसान मोर्चा की रणनीति पर बात करते हुए विकल पचार ने योगेंद्र यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि योगेंद्र यादव ने स्वाराज इंडिया पार्टी बनाई थी लगातार तीन बार चुनाव भी लड़े थे । इनके अंदर 17 किसान संगठन सीपीआई और सीपीआईएम कॉमरेड है तो फिर वह अराजनैतिक होने की कैसे बात कर सकते हैं। अराजनैतिक होके आप कहते हैं कि जेजेपी और बीजेपी का विरोध करना है, तो फिर समरथ्न कर जिताना किसे है वह भी तो लोगों को बताएं। कांग्रेस का समर्थन करें या इनेलो का, किसान प्रतिनिधि एक नया विकल्प है लेकिन उस पर योगेंद्र यादव कहते हैं कि किसान उम्मीदवार खड़ा नहीं करेंगे। विकल पचार ने कहा कि हरियाणा की एक विधानसभा सीट पर अगर किसान प्रतिनिधि जीत दर्ज कर लेते हैं तो निश्चित तौर पर किसी दूसरी पार्टियों के झंडे नहीं उठाने पड़ेंगे।
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