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Haryana chunav: चरखी-दादरी में BJP ने क्‍यों काटा विनेश फोगाट की बहन बबीता का टिकट? सांगवान पर लगाया दांव

Haryana Vidhan sabha Election 2024: हरियाणा विधानसभा में चुनावी दंगल शुरू हो चुका है। 2019 की तरह इस बार भी कई पार्टियां खिलाड़ियों पर भी दांव लगा रही है। कांग्रेस ने हाल में पेरिस ओलंपिक में सुर्खियां बटोरने वाली पहलवान विनेश फोगाट के पार्टी में शामिल होते ही जुलाना सीट से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं उनकी पहलवान बहन बबीता फोगाट को भाजपा ने चरखी-दादरी से टिकट ना देकर उन्‍हें साइड लाइन कर दिया हैं

बता दें भाजपा ने तीन दिन पहले जो 67 उम्मीदवारों की पहली लिस्‍ट जारी की है, उसमें पहलान बबीता फोगाट का चरखी-दादरी से टिकट काट कर सुनील सांगवान को दे दिया है। जबकि लंबे समय से बबिता फोगाट चरखी दादरी सीट के लिए सक्रिय रूप से प्रचार कर रही थीं और टिकट के लिए बहुत इच्छुक थीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भाजपा ने बबिता फोगाट का टिकट क्‍यों काटा और बबिता फोगाट के बजाय सुनील सांगवान पर क्‍यों अधिक भरोसा जताया है?

Babita Phogat

भाजपा का इस मुश्किल घड़ी में बबिता ने दिया था साथ

बता दें जब भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण सिंह पर महिला खिलाडि़यों ने जब यौन शोषण का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया था तब पहलवान बबिता फोगाट ही थीं जिन्‍होंने खुलकर बीजेपी और सरकार का समर्थन किया था। इतना ही नहीं बबीता फोगाट 2019 में अपनी हार के बावजूद भाजपा के सक्रिय नेता के तौर पर पांच साल तक जनता के बीच रहीं। इसके बावजूद भाजपा ने उनका टिकट काट दिया।

चरखी-दादरी से भाजपा ने क्‍यों काटा बबिता का टिकट

बबीता फोगाट के बजाय भाजपा ने सुनील सांगवान को चरखी-दादरी सीट के लिए इसलिए चुना क्‍योंकि पार्टी को सुनील सांगवान के जीतने की संभावना अधिक है। पार्टी को लगता है कि सुनील की राजनीतिक विरासत और उनकी उपलब्धियां उन्‍हें जीत दिलाएंगी।

कौन हैं सुनील सांगवान? भाजपा ने क्‍यों जताया भरोसा

बता दें सुनील सांगवान पूर्व जेलर हैं और भाजपा के उम्मीदवारों की सूची जारी होने से ठीक तीन दिन पहले जेल अधीक्षक के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा (वीआरएस) ली थी और भाजपा में शामिल हुए थे। उनके पिता सतपाल सांगवान का हरियाणा में लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है, उन्होंने छह चुनाव लड़े हैं और कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।

सुनील सांगवान का राजनीति में एक अहम बदलाव है। उन्होंने जेल अधीक्षक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान डेरा प्रमुख राम रहीम को पैरोल और फरलो दी थी।

2019 में बबीता फोगाट हार गई थी चुनाव

साल 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली रेसलर बबीता फोगाट पर 2019 ने दांव खेला था।इसी चुनाव में बबिता ने राजनीति में एंट्री ले‍ते ही भापा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन चरखी दादरी में निर्दलीय उम्मीदवार सोमबीर सांगवान से हार गईं। बबीता को 24,786 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि जेजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सतपाल सांगवान 29,577 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

टिकट ना मिलने के बाद बबीता फोगाट ने लिखी थी ये पोस्‍ट

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