Ram Rahim Parole: जेल से फिर बाहर आएगा राम रहीम, कोर्ट ने मंजूर की 40 दिन की पैरोल, इस बार कहां कटेगी रातें?
Ram Rahim Parole: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर चर्चा में है। साध्वियों के यौन शोषण और हत्या के मामलों में रोहतक की सुनारिया जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम को फिर से 40 दिन की पैरोल मिली है। अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 15वां अवसर है जब वह जेल की सलाखों से बाहर आ रहा है।
इस बार वह सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में अपना समय व्यतीत करेगा, जबकि इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के बागपत आश्रम में भी रह चुका है।

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15 वीं बार मिला पैरोल
गुरमीत राम रहीम को सजा मिलने के बाद से अब तक 15 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। इसकी शुरुआत 2020 में एक दिन की पैरोल से हुई थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई। साल 2024 और 2025 में ही उसे कई बार 20 से 50 दिनों तक की राहत मिली है। बार-बार मिलने वाली इस छूट ने कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि जेल नियमों के तहत पैरोल का इतनी बार मिलना काफी असामान्य माना जाता है।
डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहने की अनुमति
इस बार प्रशासन ने राम रहीम को सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहने की अनुमति दी है। जेल से रविवार दोपहर 12 बजे रिहाई के बाद वह सीधे सिरसा पहुंचेगा। सुरक्षा कारणों से इलाके में कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। हालांकि उसे अपने अनुयायियों की भीड़ जुटाने की इजाजत नहीं है, लेकिन वह तकनीक का सहारा लेकर वर्चुअल माध्यम से उनसे संवाद कर सकेगा। पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
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संगीन अपराध में मिली है सजा
राम रहीम को अगस्त 2017 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दो साध्वियों के साथ बलात्कार के जुर्म में 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा दी गई है। दोषी करार दिए जाने के वक्त पंचकूला और सिरसा में भारी हिंसा हुई थी, जिसमें 40 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने पीड़ितों को आर्थिक मुआवजा देने का भी सख्त आदेश दिया था।
पैरोल के दौरान कड़ी पाबंदियों होंगी
पैरोल के दौरान राम रहीम पर कई कड़ी शर्तें लागू रहेंगी। सिरसा पहुंचने के तुरंत बाद उसने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और डेरा प्रबंधन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। जेल मैनुअल के अनुसार, पैरोल के दौरान वह न तो राजनीतिक रैलियां कर सकता है और न ही भड़काऊ भाषण दे सकता है। उसे स्थानीय पुलिस की निगरानी में रहना होगा और किसी भी नियम के उल्लंघन पर उसकी पैरोल रद्द की जा सकती है।












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