कुरुक्षेत्र में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस समारोह में बोले सीएम सैनी, कहा-'भयानक त्रासदी का बंटवारा'
Haryana News: मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कुरुक्षेत्र में अनाज मंडी में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने विभाजन के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा बताई। जिसमें अनगिनत लोगों की जान चली गई और परिवार बिखर गए। इन कठिनाइयों के बावजूद, लोगों ने समाज और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विभाजन के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम सैनी ने कहा कि विभाजन ने लोगों को अपने घर और आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर किया।जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ। मुख्यमंत्री ने इस आपदा का जिम्मेदार रेड क्लिफ नामक एक अंग्रेज अधिकारी बताया।जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा खींची थी।

अपने भाषण के दौरान सीएम सैनी ने कुरुक्षेत्र के मसाना गांव में पंचनद स्मारक के लिए 51 लाख रुपए देने की घोषणा की है। यह स्मारक विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के सम्मान में बनाया जा रहा है। इस घोषणा की कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों और अधिकारियों सहित उपस्थित लोगों ने सराहना की।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि साहित्य में इस भयावहता को बहुत कुछ दर्शाया गया है। लेकिन विभाजन भयावह स्मृति दिवस आपसी भाईचारे की याद दिलाता है। उन्होंने सभी से इतिहास से सीख लेने और एकता और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।
समारोह में विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। पंचनद स्मारक ट्रस्ट के राष्ट्रीय संयोजक महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने इतिहास के इस काले अध्याय को याद रखने के महत्व पर बात की। इस अवसर पर राज्य मंत्री सुभाष सुधा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा, रतिया विधायक लक्ष्मण नापा, महंत तरुण दास, महंत महेश गिरी और ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। उनकी उपस्थिति में विभाजन के दौरान कष्ट सहने वालों को याद किया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के अंत में बताया कि आज की पीढ़ी इन ऐतिहासिक घटनाओं से कैसे सबक ले सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत की भयावह घटनाओं को समझने से एकता की भावना को बढ़ावा मिलेगा और सभी नागरिकों के लिए एक मजबूत भविष्य बनाने में मदद मिलेगी।
इस कार्यक्रम में न केवल उन लोगों को सम्मानित किया गया। जिन्होंने इस घटना को झेला। बल्कि इसका उद्देश्य वर्तमान पीढ़ियों में सामूहिक स्मृति और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी था। इन त्रासदियों को याद करके समाज यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर सकता है कि ऐसी घटनाएँ फिर कभी न हों।
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