पीएम मोदी बोले- आतंक से लड़ना सिखाता है औरंगजेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का संघर्ष

पीएम मोदी बोले-

नई दिल्ली, 25 दिसंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का पराक्रम और उनका बलिदान हमें आतंक से लड़ना सिखाता है। इसी तरह गुरुगोबिन्द सिंह साहिब का जीवन भी बलिदान का उदाहरण है। गुजरात के कच्छ स्थित गुरुद्वारा लखपत साहिब के गुरुपर्व समारोह में नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ये बातें कहीं। पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

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    पीएम मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, गुरुद्वारा लखपत साहिब समय की हर गति का साक्षी रहा है। मुझे याद आ रहा है कि लखपत साहिब ने कैसे-कैसे झंझावातों को देखा है। एक समय यह स्थान दूसरे देशों में जाने और व्यापार के लिए प्रमुख स्थान होता था। 1998 के समुद्री तूफान से गुरुद्वारा लखपत साहिब को काफी नुकसान हुआ और 2001 के भूकंप को गुरुद्वारा साहिब की 200 साल पुरानी इमारत को बड़ी क्षति पहुंचाई थी लेकिन गुरुद्वारा लखपत साहिब उसी गौरव के साथ खड़ा है। 2001 के भूकंप के बाद मुझे गुरु कृपा से इस पवित्र स्थान की सेवा करने का मौका मिला था। उस समय देश के हर हिस्सों से आए शिल्पियों ने इस स्थान के गौरव को संरक्षित किया। प्राचीन लेखन शैली से यहां की दीवारों पर गुरूवाणी अंकित की गई। इस प्रोजेक्ट को तब UNESCO ने सम्मानित भी किया था।

    अफगानिस्तान से गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को लाए

    पीएम ने आगे कहा, हाल ही में हम अफगानिस्तान से स-सम्मान गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को भारत लाने में सफल रहे हैं। कुछ महीने पहले जब मैं अमेरिका गया था, तो वहां अमेरिका ने भारत को 150 से ज्यादा ऐतिहासिक वस्तुएं लौटाईं।

    औरंगजेब का किया जिक्र

    पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, औरंगजेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का पराक्रम और उनका बलिदान हमें सिखाता है कि आतंक और मजहबी कट्टरता से देश कैसे लड़ता है। इसी तरह दशम गुरु, गुरुगोबिन्द सिंह साहिब का जीवन भी पग-पग पर तप और बलिदान का एक जीता जागता उदाहरण है। अंग्रेजों के शासन में भी हमारे सिख भाइयों बहनों ने जिस वीरता के साथ देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। हमारा आजादी का संग्राम और जलियांवाला बाग की धरती आज भी उन बलिदानों की साक्षी है। कोरोना के कठिन समय में हमारे गुरुद्वारों ने जिस तरह सेवा की जिम्मेदारी उठाई, वो गुरु साहब की कृपा और उनके आदर्शों का ही प्रतीक है।

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