NCRB की रिपोर्ट में दावा- गुजरात में क्राइम रेट तेजी से हुआ कम, नए कानूनों का पड़ा असर
गांधीनगर। गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 से पहले गुजरात की मौजूदा सरकार को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट से राहत मिली। एनसीआरबी (NCRB) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि, गुजरात में विभिन्न प्रकार के अपराधों में कमी आई है। गुजरात में दर्ज हुए अपराधों का औसत राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहद कम रहा। यहां महिलाओं में सुरक्षा की भावना भी बढ़ी है।'

'गुजरात में क्राइम रेट हुआ तेजी से कम'
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में गुजरात का क्राइम रेट 22.1 रहा, जो राष्ट्रीय औसत 64.5 से काफ़ी कम है। इसी प्रकार, हिंसक अपराधों में भी गुजरात का क्राइम रेट 11.9 रहा, जो देश के क्राइम रेट 30.2 की तुलना में काफ़ी कम रहा। बता दें कि, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) हर साल सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में अपराध से संबंधित जानकारी एकत्रित कर 'क्राइम इन इंडिया' नामक पुस्तिका जारी करता है। इसमें प्रति 1 लाख आबादी के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (क्राइम रेट) कहा जाता है।

गंभीर श्रेणी के अपराधों में आई कमी
'क्राइम इन इंडिया 2021' के आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में विभिन्न प्रकार के अपराधों में राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कमी नज़र आई है। भाजपाइयों का कहना है कि, यह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार द्वारा किए गए उल्लेखनीय क़ानूनी संशोधन और मज़बूत नेतृत्व के कारण संभव हुआ है। हत्या का प्रयास, हत्या, बलात्कार, अपहरण और लूट जैसे हिंसक अपराधों के मामलों में गुजरात का क्राइम रेट 11.9 है, जो देश के क्राइम रेट 30.2 की तुलना में बहुत कम है। इसके अलावा वर्ष 2021 में गुजरात में हत्या का क्राइम रेट 1.4 है, जो राष्ट्रीय औसत 2.1 की तुलना में कम है। अपहरण के अपराधों के मामलों में गुजरात का क्राइम रेट 2.3 है, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 से कम है।

ऑल इंडिया क्राइम रेट से गुजरात की तुलना
NCRB आँकड़ों को देखते हुए, यदि गुजरात में अपहरण के अपराधों के क्राइम ट्रेंड को देखें, तो पिछले वर्षों की तुलना में इसमें लगातार कमी दर्ज़ की गई है। वर्ष 2018 में यह आँकड़ा 3.0 था, 2019 में 2.7 और वर्ष 2021 में 2.3 रहा है। महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले में गुजरात का क्राइम रेट 22.1 है, जो ऑल इंडिया क्राइम रेट 64.5 की तुलना में बहुत कम है। असम (168.3), दिल्ली (147.6), तेलंगाना (119.7), राजस्थान (105.4), पश्चिम बंगाल (74.6) और केरल (73.3) जैसे अन्य राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों की तुलना में गुजरात में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की दर काफ़ी कम है।

कई राज्यों से बेहतर रिकॉर्ड
NCRB की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मानव शरीर के ख़िलाफ़ अपराध (हत्या, हत्या का प्रयास, गंभीर रूप से घायल और बलात्कार आदि) के मामलों में राष्ट्रीय औसत क्राइम रेट 80.5 की तुलना में गुजरात का क्राइम रेट 28.6 रहा। वहीं, इस तरह के अपराध के क्राइम रेट में कुल 36 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में गुजरात का नंबर 31वाँ रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी के अपराध में गुजरात का क्राइम रेट 15.2 है, जो राष्ट्रीय क्राइम रेट 42.9 के मुक़ाबले काफ़ी कम है और इस सूची में गुजरात 27वें नंबर पर है।
गुजरात सरकार कहती है कि, अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उनके राज्य में नए क़ानून बनाए गए हैं और पुराने क़ानूनों में संशोधन किया गया है। गुजकोट, यानी कि ज़मीन हड़पने के विरुद्ध क़ानून, क्रिमिनल एमेंडमेंट एक्ट में फाँसी की सज़ा तक का प्रावधान, चेन झपटमारी और मानव तस्करी जैसे अपराधों के क़ानूनों में सज़ा के मानदंडों में वृद्धि आदि के कारण अपराधियों में भय बढ़ गया है। और यही बड़ी वजह है कि यहां अपराधों में कमी दर्ज़ की गई है।












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