Morbi Bridge collapse: समय से पहले ही ब्रिज को खोल दिया गया, जिसने ले ली 130 से अधिक लोगों की जान
Morbi Bridge collapse: जिस तरह से छठ महापर्व के मौके पर गुजरात के मोरबी में ब्रिज हादसा हुआ उसके बाद पूरे देश में शोक की लहर है। इस हादसे में तकरीबन 140 लोगों की जान जा चुकी है। इस ब्रिज को समय से पहले ही लोगों के लिए खोल दिया गया। दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है कि इस ब्रिज का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिला था और समय से पहले ही इसे शुरू कर दिया गया था। इस ब्रिज की मरम्मत का काम एक प्राइवेट कंपनी ओरेवा ग्रुप को दिया गया था।
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7 महीने में ही खोल दिया ब्रिज
ओरेवा कंपनी की बात करें तो यह कंपनी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी बनाने की कंपनी बताती है, इशके साथ ही कंपनी लाइटिंग और ई-बाइक्स भी बनाती है। ओरेवा कंपनी को इस ब्रिज की मरम्मत का काम दिया गया था। यह ब्रिज काफी पुराने जमाने का है। इसकी मरम्मत का काम मार्च माह में कंपनी को दिया गया था। मरम्मत काम के चलते 7 महीने तक यह ब्रिज बंद था। 26 अक्टूबर को गुजराती नववर्ष के मौके पर इस ब्रिज को खोला जाना था।

17 रुपए का टिकट लगाया
कंपनी के साथ जो करार हुआ था उसके तहत ब्रिज को 8-12 महीनों के लिए बंद रखा जाना था। लेकिन समय से पहले इस ब्रिज के शुरू किया गया और रिपोर्ट के अनुसार लोगों से 17 रुपए इस ब्रिज पर जाने के लिए लिए जा रहे थे। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार मार्च माह में कंपनी और मोरबी निकाय के बीच जो करार हुआ था उसके अनुसार कंपनी ने ब्रिज की मरम्मत के लिए तकनीकी चीजों के लिए आउटसोर्स किया था। इसके लिए छोटी निर्माण कंपनी देवपक्ष सॉल्यूशन की मदद ली गई थी।

15 साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला है
कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार कंपनी को 15 साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। कंपनी इस ब्रिज की देखरेख करेगी और लोगों से इसके लिए टिकट लेगी। इसी अग्रीमेंट के जरिए कंपनी को यह अधिकार मिला है कि वह हर साल टिकट के दाम को बढ़ा सकती है। ब्रिज पर जाने के लिए प्रति व्यक्ति 12-17 रुपए का टिकट वसूला जाता था। लेकिन ब्रिज पर लोगों की भीड़ को नियंत्रित नहीं किया गया। भीड़ को ना तो प्राइवेट कंपनी ने नियंत्रित किया और ना ही प्रशासन ने इसे नियंत्रित किया।

क्या कहना है कंपनी का
मोरबी में ब्रिज को पिछले हफ्ते ही लोगों के लिए खोल दिया गया। ओरेवा के मैनेजिंग डायरेक्टर जयसुखभाई पटेल ने कहा कि कंपनी ने ब्रिज की मरम्मत का 100 फीसदी काम 2 करोड़ रुपए में पूरा कर दिया था। जयसुखभाई ने कहा कि हमने लोगों के लिए ब्रिज को खोला, ऐसे में हम ब्रिज की एंट्री को फ्री नहीं रख सकते थे, ब्रिज पर अधिक लोग ना जाएं और भीड़ ना बढ़े इसके लिए हमने उनसे टिकट के पैसे लिए थे।












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