5 साल में 1127 अधिकारी-कर्मचारी गुजरात में रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए, यहां भ्रष्टाचार दूसरे राज्यों से कम
गांधीनगर। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा संचालित इंडिया करप्शन सर्वे-2019 में हाल ही गुजरात को देश में सबसे कम भ्रष्ट प्रांत बताया गया। इस सर्वे के आने के बाद राज्य सरकार ने भी भ्रष्टाचार की कमर तोड़ देने का दावा किया है। राज्य विधानसभा में सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान 1,127 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को घूस लेने के लिए गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, जो चार्जशीट दायर की गई है, उसका प्रतिशत कैलेंडर वर्ष 2014 के मुकाबले 2018 की अवधि के दौरान थोड़ा नीचे आ गया है।

गुजरात में रिश्वत लेने के सर्वाधिक मामले राजस्व विभाग में
राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य में त्वरित एक्शन लिया गया। सभी जांच एंजेसियों से पता चला है कि सरकारी विभागों में केवल राजस्व विभाग ही ऐसा है, जहां भ्रष्टाचार की ज्यादा शिकायतें मिलती हैं। या यूं मानें कि, यह विभाग सभी विभागों में आज भी नंबर वन है।

केंद्रीय एजेंसियों का है यह कहना
मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का कहना है कि हमने राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार दूर करने के लिये कड़े कदम उठाए हैं, फिर भी यह विभाग सबसे ज्यादा करप्ट है। केंद्रीय एजेंसियों का भी कहना है कि, राजस्व औऱ शहरी विकास मंत्रायल सबसे ज्यादा करप्ट होते हैं, जिसका कारण जमीन के सौदे हैं।

सबसे ज्यादा 14 प्रतिशत गिरफ्तारी अहमदाबाद में हुईं
भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य की सबसे ज्यादा 14 प्रतिशत गिरफ्तारी अहमदाबाद में हुई हैं। इस जिले में 161 सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। अहमदाबाद में 2015 में एक वर्ष में सबसे अधिक गिरफ्तारियां भी दर्ज की गईं। गिरफ्तार किए गए सरकारी अधिकारियों में दूसरे नंबर पर 88 के साथ वडोदरा, 88 और 81 के साथ तीसरा सबसे बड़ा सूरत था।

गांधीनगर में 49 अधिकारियों को पकड़ा गया
एक और हैरानी की बात यह है कि बनासकांठा के ग्रामीण जिले में 58 अधिकारियों को पकड़ा गया था। बनासकांठा में पंजीकृत संख्याएँ मुख्यमंत्री रूपाणी के गृहनगर राजकोट के समान हैं, जहाँ समान संख्या में अपराधी पकड़े गए थे। जबकि, राज्य की राजधानी गांधीनगर में 49 अधिकारियों को पकड़ा गया।

एंटी करप्शन ब्यूरो के निदेशक बोले— हमारे पास आधुनिक साधन हैं
एंटी करप्शन ब्यूरो के विशेष निदेशक केशव कुमार ने कहा कि मैं मानता हूं कि यह आंकडे पिछले सालों के हैं, तब विजय रुपाणी मुख्यमंत्री नहीं थे। उनके कार्यकाल के तो ढाई साल हैं। हमारा ब्यूरो इतना सक्रिय है कि, जहां पचा चलता है वहीं घूस लेने वाले अधिकारी औऱ कर्मचारियों को पकड़ लेता है। हमारे पास लेटेस्ट तकनीक के साधन भी मौजूद हैं, जिसमें रिश्वत लेने वाला पकड़ा जाता है।

सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राजस्व विभाग में पाया गया
राज्य विजिलेंस कमीशन के आंकड़े भी बताते हैं कि, सरकार के सभी विभागों में से सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राजस्व विभाग में पाया गया है। उसके बाद राज्य पुलिस विभाग और शहरी विकास विभाग आता है। इनके साथ पंचायत, शिक्षा एवं अन्य भी। हालांकि, आंकड़ों से पता चला है कि गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में से 10 प्रतिशत से भी कम को बर्खास्त किया गया है, जबकि 2014 में चार्ज किए गए उन लोगों का प्रतिशत 91 प्रतिशत से गिरकर 2017 में सिर्फ 33 प्रतिशत रह गया है।

1,127 गिरफ्तारियां हुईं, महज 3.23 करोड़ की रिश्वत पकड़ी
वर्ष 2014 में पकड़े गए कुल 265 आरोपियों में से 241 चार्जशीट के तहत हुए थे। जबकि, वर्ष 2017 में 141 में से ऐसे 46 पकड़े गए थे। सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि रिश्वत के कुल 934 मामलों में जहां 1,127 गिरफ्तारियां बीते पांच साल की अवधि में की गई थी, वह सिर्फ 3.23 करोड़ रुपये की थीं।

सबसे कम रिश्वत के मामले गुजरात के इन जिलों में
छोटा उदेपुर जिले में सबसे कम रिश्वत की राशि 1,300 रुपये थी। जिसमें दो सरकारी अधिकारी पकड़े गए थे। उसी वर्ष, एक अन्य अधिकारी को महिसागर जिले में 2,000 रुपये से कम रिश्वत के लिए पकड़ा गया था।












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