गुजरात में 2 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार, 53 हजार आंगनवाड़ियों के बावजूद यहां हालत दयनीय
गांधीनगर. गुजरात सरकार द्वारा राज्य में 53,000 आंगनवाड़ियों के माध्यम से शुद्ध औऱ गुणवत्तायुक्त भोजन प्रदान करने के बावजूद, राज्य में 1.96 लाख से अधिक कुपोषित बच्चे पाये गए हैं। इस तरह के बच्चों की सबसे अधिक संख्या मुख्य रूप से आदिवासी जिलों दाहोद और नर्मदा में हैं। राज्य सरकार ने कहा कि गुजरात के 33 जिलों में 1,96,660 कुपोषित बच्चे हैं। सरकार के आरोग्य विभाग के अधिकारी ने कहा कि सबसे अधिक कुपोषित 42,488 बच्चे दाहोद जिले में हैं। नर्मदा में 14,722 बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा पोरबंदर (709) और बोटाद (938) में सबसे कम कुपोषित बच्चे मिले हैं।

अधिकारी ने कहा कि गुजरात में कुल 53,029 आंगनबाड़ियां है। कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार लाने के लिए, 20 जिलों में दुर्ग संजीवनी योजना के तहत गरिष्ठ सुगंधित दूध की आपूर्ति कर रहा है। पोषण स्तर में सुधार करने के लिए, यह राज्य में अग्नबाडियों को फोर्टिफाइड नमक और तेल की आपूर्ति भी करता है।
सरकार सप्ताह में दो बार 3-6 साल की उम्र के बीच बच्चों को गर्म नाश्ता और फल प्रदान करती रही है। 3-6 वर्ष की आयु के कुपोषित बच्चों के लिए, सरकार तीसरे भोजन के रूप में लाडु भी दे रही है, जो कि एक कैरी-भोजन है। इन कुपोषित बच्चों के लिए, सरकार उन्हें घर ले जाने के लिए गेहूं, हरा चना और तेल दे रही है। 23 जिलों में, 6 महीने से तीन साल तक की आयु के बच्चों को घर का राशन लेने के लिए "बालशक्ति" दिया जाता है।
दाहोद में 3,056 आंगनबाड़ियों की उपस्थिति के बावजूद, अहमदाबाद और बनासकांठा के बाद तीसरा जिला है जिस में सबसे अधिक कुपोषित बच्चों की संख्या दर्ज की गई। इसकी तुलना में, नर्मदा जिले में केवल 952 आंगनवाड़ी है। गुजरात के आदिजाति जिलों में कुपोषित बच्चों के लिये हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (एनआईएन) और मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंस (आईआईपीएस) को सर्वेक्षण करने के लिए नियुक्त किया है।
गुजरात के आंगनबाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए पिछले पांच वर्षों में उठाए गए कदमों के बारे में अधिकारी ने कहा कि, हमने 1790 नए आंगनवाडियों को खोलने की अनुमति केंद्र सरकार के मांगी थी, लेकिन राज्य को केव 892 आंगनवाडियों को खोलने की अनुमति दी गइ है।












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